झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद 504 सैप जवानों की सेवा समाप्त, जमशेदपुर की सैप-2 बटालियन पर सबसे बड़ा असर

Subhash Shekhar
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Jamshedpur | झारखंड हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद पुलिस मुख्यालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य के 504 स्पेशल ऑक्ज़िलरी पुलिस (SAP) जवानों की सेवा समाप्त कर दी है। इसका सीधा असर जमशेदपुर के हलुदबनी स्थित सैप-2 बटालियन पर पड़ा है, जहां तैनाती में भारी कमी दर्ज की गई है।

हटाए गए सभी जवान पूर्व सैनिक हैं, जिन्होंने अपनी सात साल की अनुबंध सेवा पूरी कर ली थी। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि रिक्त हुए पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

पुलिस मुख्यालय के आदेश के तहत सेवा समाप्ति की कार्रवाई कोल्हान प्रमंडल सहित पूरे राज्य में लागू की गई है। जमशेदपुर के अलावा सरायकेला, चाईबासा, धनबाद और रामगढ़ समेत 15 जिलों में थानों, पिकेट्स और संवेदनशील स्थलों पर तैनात सैप जवान इस निर्णय की जद में आए हैं।

राज्य में सैप की दो प्रमुख बटालियन—हलुदबनी (सैप-2) और टाटीसिलवे, रांची (सैप-1)—हैं। छंटनी के बाद दोनों बटालियनों को मिलाकर करीब 700 जवान ही शेष रह जाएंगे, जिससे तैनाती प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है।

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सैप का गठन वर्ष 2008 में हुआ था। नियमावली के अनुसार, पूर्व सैनिकों की नियुक्ति दो साल के अनुबंध पर होती है, जिसे अधिकतम पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। इस प्रकार, एक सैप जवान की अधिकतम सेवा अवधि सात साल निर्धारित है।

कुछ जवानों ने अदालत में यह दलील दी थी कि सैप बटालियनों का कार्यकाल 31 मई 2027 तक है और नियमों में 69 वर्ष की आयु तक सेवा का उल्लेख मिलता है, इसलिए उन्हें आगे सेवा का अवसर मिलना चाहिए। हालांकि, अदालत ने सरकार के सात साल वाले प्रावधान को वैध ठहराया।

प्रशासन और पुलिस मुख्यालय की प्रतिक्रिया

पुलिस मुख्यालय का कहना है कि यह निर्णय नियमों के अनुपालन में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 504 जवानों की सेवा समाप्ति तत्काल प्रभाव से हुई है। इसके अलावा, अगले दो दिनों में 70 और जवानों को कार्यमुक्त किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, 550 अन्य जवानों के मामलों में जैसे ही अदालत का स्टे हटेगा, उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी पूरी की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए रिक्त पदों पर पूर्व सैनिकों की नई भर्ती प्राथमिकता के आधार पर शुरू होगी।

जनता और सुरक्षा व्यवस्था पर असर

छंटनी के बाद थानों और पिकेट्स में तैनाती का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कोल्हान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ड्यूटी रोस्टर और बल प्रबंधन पर तत्काल असर दिखा है। हालांकि, पुलिस का दावा है कि स्थानीय पुलिस बल और वैकल्पिक तैनाती से स्थिति संभाली जा रही है।

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स्थानीय स्तर पर पूर्व सैनिक संगठनों और जवानों के परिवारों में निराशा देखी गई है, जबकि आम जनता सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई न होने की उम्मीद कर रही है।

पुलिस मुख्यालय ने संकेत दिए हैं कि भर्ती कैलेंडर जल्द जारी किया जाएगा। चूंकि हलुदबनी और टाटीसिलवे बटालियनों का कार्यकाल 2027 तक है, इसलिए नई नियुक्तियों के जरिए बल की कमी पूरी करने पर जोर रहेगा। आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया, योग्यता मानदंड और समय-सीमा को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई इस बड़ी छंटनी ने राज्य की सैप व्यवस्था को नए सिरे से संतुलित करने की चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन जहां नियमों के पालन पर कायम है, वहीं नई भर्ती के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की तैयारी में जुटा है।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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