रांची: क्या रांची के निजी अस्पताल अब मनमानी नहीं कर पाएंगे? क्या पैसों के लिए मरीजों के शव को बंधक बनाने वाले अस्पतालों के दिन अब लद चुके हैं? राजधानी रांची के हेल्थ सिस्टम को लेकर शनिवार को एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त (DC) श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए निजी अस्पतालों को दोटूक चेतावनी दी है।
शनिवार, 16 मई 2026 को समाहरणालय सभागार में आयोजित एक हाई-लेवल बैठक में रांची DC मंजूनाथ भजन्त्री ने साफ कहा कि मरीजों की सुरक्षा और उनके अधिकार सर्वोपरि हैं। इस बैठक के बाद से ही शहर के बड़े-बड़े कॉरपोरेट और निजी अस्पतालों के प्रबंधकों में हड़कंप का माहौल है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों को ताक पर रखने वाले अस्पतालों का एफिलिएशन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।
सर्जन श्री प्रभात कुमार और हेल्थ नोडल पदाधिकारी श्री राजेश साहू की मौजूदगी में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए कड़े हंटर चलाए गए हैं। आइए जानते हैं कि इस बैठक के बाद रांची के आम मरीजों पर क्या सीधा असर पड़ने वाला है।
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शव को बंधक बनाया तो खैर नहीं: क्लिनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट का हवाला
इस बैठक का सबसे संवेदनशील और बड़ा फैसला मरीजों के शवों को रोकने से जुड़ा है। अक्सर ऐसी शिकायतें आती हैं कि बिल न चुका पाने के कारण अस्पताल परिजनों को अपनों का शव सौंपने से इनकार कर देते हैं।
“पैसे के अभाव में बिल नहीं चुका पाने वाले मरीज के शव को परिजनों को नहीं सौंपना राज्य सरकार के आदेश एवं क्लिनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट का सीधा उल्लंघन है।”
— श्री मंजूनाथ भजन्त्री, DC, रांची
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सूरत में लाश को रोकना एक गंभीर कानूनी अपराध माना जाएगा। अगर किसी अस्पताल ने ऐसा अमानवीय कृत्य किया, तो उस पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को मरीजों के परिजनों के साथ शालीन और संवेदनशील व्यवहार रखने की सख्त हिदायत दी गई है।
अस्पतालों में फायर सेफ्टी: ICU और जेनरेटर का होगा रेगुलर ऑडिट
देशभर के अस्पतालों से आए दिन शॉर्ट सर्किट और आग लगने की दर्दनाक खबरें आती रहती हैं। रांची DC मंजूनाथ भजन्त्री ने इस मुद्दे पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
- इलेक्ट्रिकल और फायर ऑडिट: अस्पतालों की पुरानी वायरिंग, इलेक्ट्रिकल इक्यूपमेंट्स और खासकर ICU में चल रहे एसी (AC) और जेनरेटर का विशेषज्ञों से नियमित ऑडिट कराना अब अनिवार्य होगा।
- शून्य लापरवाही नीति: उपायुक्त ने साफ किया कि मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले अस्पतालों पर तत्काल सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है।
अल्ट्रासाउण्ड सेंटरों पर पैनी नजर: लिंग निर्धारण पर लगेगा ताला
रांची जिले में संचालित सभी अल्ट्रासाउण्ड सेंटरों को लेकर भी प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और लिंग निर्धारण संबंधी कानून (PCPNDT Act) का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
| निर्देश | प्रशासनिक कार्रवाई |
| अवैध लिंग निर्धारण | संस्थान सील, संचालक के खिलाफ जेल और कठोर कानूनी कार्रवाई। |
| रजिस्ट्रेशन नवीकरण | वैधता समाप्त होने से पहले ही रिन्यूअल के लिए आवेदन करना अनिवार्य। |
| स्टाफ वेरिफिकेशन | सभी डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के सर्टिफिकेट्स की गहन जांच के आदेश। |
आयुष्मान भारत योजना और संक्रामक बीमारियों पर अलर्ट
बैठक में प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत अस्पतालों को मिलने वाले भुगतान की भी समीक्षा की गई। DC ने सभी अस्पतालों को स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन (STG) का पालन करने को कहा ताकि क्लेम भुगतान की प्रक्रिया में देरी न हो। गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को आयुष्मान पैनल से बाहर (De-empanel) कर दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, मॉनसून के दस्तक देने से पहले डेंगू, मलेरिया, टीबी और अन्य संक्रामक बीमारियों को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। अब निजी अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे ऐसे मरीजों की सूचना समय पर जिला स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, बायो मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल को लेकर भी नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
आगे क्या होगा: प्रशासन का अगला कदम?
रांची जिला प्रशासन का यह कदम सराहनीय है, लेकिन चुनौती इसके जमीनी स्तर पर लागू होने की है। इस कड़े निर्देश के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें जल्द ही रांची के विभिन्न अल्ट्रासाउण्ड सेंटरों और निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) शुरू कर सकती हैं। आम जनता के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि अब इलाज के नाम पर मनमानी और अमानवीय व्यवहार करने वाले अस्पतालों पर कानून का शिकंजा कसना तय है।










