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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा कॉकरोच जनता पार्टी विवाद, क्यों मचा हड़कंप?

New Delhi | सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है। नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ यह डिजिटल व्यंग्य अब एक गंभीर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में तब्दील हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर इस स्व-घोषित संगठन के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

इस याचिका के सामने आते ही सियासी गलियारों और डिजिटल दुनिया में हड़कंप मच गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह संगठन सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का अपने फायदे के लिए गलत इस्तेमाल कर रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब इसके पीछे किसी बड़े नेक्सस की आशंका जताई जा रही है, जिससे इस डिजिटल कैंपेन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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शुरुआती जांच और इनपुट्स के मुताबिक, बात सिर्फ एक सोशल मीडिया पेज तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ता का दावा है कि अदालत की टिप्पणियों का इस्तेमाल करके बकायदा प्रचार, व्यापारिक गतिविधियां और डिजिटल मार्केटिंग की जा रही है, जो कि हमारी संवैधानिक प्रक्रियाओं का एक खतरनाक व्यावसायीकरण है।

CBI जांच की मांग: फर्जी वकीलों और डिग्रियों पर भी उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट में दायर इस PIL में मामले की गहराई से जांच के लिए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की गुहार लगाई गई है। खबरों के मुताबिक, कोर्ट रूम के गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि इस पूरे विवाद के पीछे कुछ ऐसे तत्व शामिल हैं जो कानूनी पेशे की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

याचिका में साफ तौर पर मांग की गई है कि इस पूरे इकोसिस्टम में शामिल कथित नकली वकीलों और फर्जी डिग्री रखने वाले लोगों की भी पहचान की जाए और उन पर शिकंजा कसा जाए।

सुप्रीम कोर्ट परिसर

संस्थापक का दावा- ‘अकाउंट्स ब्लॉक’, बीजेपी से ज्यादा फॉलोअर्स का था दावा

दूसरी तरफ, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपक ने एक चौंकाने वाला दावा करके इस विवाद को और हवा दे दी है। अभिजीत का आरोप है कि संगठन के सभी आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट रातों-रात बंद कर दिए गए हैं।

“हमारा पूरा डिजिटल वजूद खत्म करने की कोशिश की जा रही है। अब हम अपने किसी भी ऑफिशियल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।” — अभिजीत दीपक, संस्थापक (CJP)

गौरतलब है कि हाल ही में इंस्टाग्राम पर इस पार्टी की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी थी कि इसके फॉलोअर्स की संख्या सत्ताधारी बीजेपी से भी अधिक होने का दावा किया गया था। अभिजीत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग साझा कर दावा किया था कि 22 अप्रैल से 21 मई के बीच उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को 1.6 बिलियन व्यूज मिले और महज एक महीने में 1.2 करोड़ नए फॉलोअर्स उनसे जुड़े। आज आलम यह है कि देश का एक बड़ा युवा वर्ग सोशल मीडिया पर खुद को ‘कॉकरोच’ कहकर सिस्टम पर तंज कस रहा है।

संस्थापक अभिजीत दीपक

सियासी अखाड़ा बना डिजिटल विवाद: कांग्रेस ने केंद्र को घेरा

महाराष्ट्र की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर हमले शुरू हो गए हैं। मुंबई और नागपुर के राजनीतिक हलकों से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने इस डिजिटल बैन को ‘जन आक्रोश’ दबाने की तानाशाही कोशिश करार दिया है।

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।

“खुफिया एजेंसी की तथाकथित चेतावनी का बहाना बनाकर युवाओं की आवाज को बंद किया जा रहा है। सरकार युवाओं, बेरोजगारों और गरीबों के असली मुद्दों और उनके गुस्से का समाधान तो कर नहीं पा रही, उल्टा एक डिजिटल व्यंग्य से डरकर लोगों की आवाज दबाने में जुट गई है।” — नाना पटोले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

सिस्टम की तैयारी और अगला कदम: अब क्या होगा?

यह मामला महज एक सोशल मीडिया अकाउंट के सस्पेंशन का नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर फ्रीडम ऑफ स्पीच बनाम अदालत की अवमानना और डिजिटल नैरेटिव के कमर्शियलाइजेशन का एक पेचीदा मामला बन चुका है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या अदालत इस PIL को स्वीकार कर CBI जांच का आदेश देती है या फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने के लिए कोई नई गाइडलाइन जारी करती है। प्रशासन और खुफिया एजेंसियां भी इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि इस अभूतपूर्व डिजिटल रीच के पीछे कहीं कोई सुनियोजित टूलकिट या विदेशी फंडिंग तो काम नहीं कर रही थी।

इसे भी पढ़ें: Cockroach Janta Party सच या मजाक? 4 दिन में 80 लाख फॉलोअर्स

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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