Ranchi | देश में होने जा रहे राज्यसभा द्विवार्षिक और उपचुनावों (Biennial/Bye-Elections to the Rajya Sabha – 2026) को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने झारखंड से राज्यसभा सीट के लिए अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार और वरिष्ठ नेता प्रणव झा के नाम पर मुहर लगा दी है।
पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के.सी. वेणुगोपाल के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में मल्लिकार्जुन खड़गे (कर्नाटक), पवन खेड़ा (कर्नाटक) और प्रवीण चक्रवर्ती (तमिलनाडु) जैसे दिग्गजों के साथ प्रणव झा का नाम शामिल होना यह साफ दर्शाता है कि केंद्रीय संगठन में उनका कद कितना मजबूत है।
कौन हैं प्रणव झा? (खड़गे और राहुल की कोर टीम के अहम सिपहसालार)
प्रणव झा कांग्रेस के राष्ट्रीय गलियारों में पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले एक बेहद कद्दावर और बौद्धिक नेता माने जाते हैं। वर्तमान में वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय (Office of Congress President) में बतौर AICC कोऑर्डिनेटर (समन्वयक) अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे सीधे तौर पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की कोर रणनीतिक टीम का हिस्सा हैं।
इससे पहले वे लंबे समय तक AICC के संचार विभाग (Communication Department) में सेक्रेटरी इंचार्ज (Secretary Incharge) की भूमिका भी निभा चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की मीडिया रणनीति तैयार करने, प्रेस कॉन्फ्रेंस का समन्वय करने और बड़े मुद्दों पर पार्टी का नैरेटिव सेट करने में उनकी मुख्य भूमिका रही है।
कॉर्पोरेट जगत से राजनीति तक का सफर (प्रोफेशनल बैकग्राउंड)
राजनीति में पूर्णकालिक (Full-time) आने से पहले प्रणव झा का एक लंबा और शानदार कॉर्पोरेट और मीडिया मैनेजमेंट का बैकग्राउंड रहा है। वे उन चुनिंदा चेहरों में शामिल हैं जो एक बेहतरीन प्रोफेशनल करियर छोड़कर राजनीति और नीति-निर्माण (Policy Making) में आगे आए। यही कारण है कि वे संगठन के सबसे बेहतरीन संकटमोचकों में गिने जाते हैं।
बिहार-झारखंड से है गहरा नाता
प्रणव झा मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले (मिथिला क्षेत्र) के रहने वाले हैं। हालांकि, उनका झारखंड से बेहद पुराना और गहरा नाता है। उनका जन्म और शुरुआती परवरिश झारखंड (तब के अविभाजित बिहार) के जमशेदपुर (टाटानगर) में हुई, जहां उनके पिता कार्यरत थे। ऐसे में वे झारखंड की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से भली-भांति वाकिफ हैं।
क्या है कांग्रेस की रणनीति और JMM का गणित?
चूंकि प्रणव झा ने अपने राजनीतिक जीवन में इससे पहले कोई भी लोकसभा या विधानसभा का प्रत्यक्ष (Direct) चुनाव नहीं लड़ा है, इसलिए राज्यसभा के जरिए संसद के उच्च सदन में यह उनकी पहली विधायी पारी होगी। लेकिन उनकी इस राह को आसान बनाने के लिए रांची से लेकर दिल्ली तक रणनीतियों का दौर शुरू हो चुका है:
- JMM के समर्थन पर टिकी निगाहें: राज्यसभा चुनाव पूरी तरह संख्या बल का खेल है। झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन (I.N.D.I.A. ब्लॉक) में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सबसे बड़ा दल है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व के बीच हुए आपसी समझौते के तहत ही कांग्रेस ने यह सीट अपने पाले में ली है, इसलिए इस बात की पूरी उम्मीद है कि प्रणव झा को जेएमएम (झामुमो) और राजद (RJD) का एकमुश्त समर्थन मिलेगा।
- क्रॉस-वोटिंग रोकने पर फोकस: कांग्रेस और जेएमएम के रणनीतिकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखना और विपक्ष की किसी भी संभावित सेंधमारी को नाकाम करना है। इसके लिए गठबंधन स्तर पर ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ शुरू कर दिया गया है।
- ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ की चुनौती: विपक्ष इस चुनाव में उनके मूल रूप से बिहार के होने के मुद्दे को उछाल सकता है। हालांकि, कांग्रेस उनके जमशेदपुर कनेक्शन और केंद्रीय संगठन में उनके ऊंचे रसूख को आगे रखकर यह संदेश दे रही है कि उनके राज्यसभा जाने से झारखंड के मुद्दों को दिल्ली की संसद में ज्यादा वजन मिलेगा।
प्रणव झा की प्रोपर्टी कितनी है?
प्रणव झा राजनीति में अपनी स्वच्छ और बेदाग छवि के लिए जाने जाते हैं। उनकी कुल चल-अचल संपत्ति का सटीक और प्रमाणित आंकड़ा तब सार्वजनिक होगा जब वे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना आधिकारिक चुनावी हलफनामा (Affidavit) दाखिल करेंगे। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की वेबसाइट पर अपलोड होने वाले इस शपथ पत्र में ही उनके बैंक बैलेंस, निवेश, गाड़ियों और पैतृक/आवासीय संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत सामने आ सकेगी।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (1486670.jpg) द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद अब प्रणव झा जल्द ही रांची में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। यदि झामुमो का पूरा संख्या बल उनके साथ एकजुट रहता है, तो खड़गे के इस ‘चाणक्य’ का संसद पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।
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