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Jharkhand News

विधवा पेंशन की बहाली की मांग, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर किया हमला

भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आज झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की उदासीनता और गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण झारखंड की विधवा महिलाएं भारी संकट में हैं।

विधवा पेंशन के भुगतान में देरी पर सवाल

अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार द्वारा विधवा पेंशन की राशि बंद कर दी गई है। उनके अनुसार, पिछले 5-6 महीनों से पेंशन का भुगतान ठप पड़ा हुआ है, जिससे राज्य की विधवा माताएं और बहनें अत्यधिक परेशान हैं। उन्होंने इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।

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मरांडी ने कहा कि यह पेंशन उन महिलाओं के लिए जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सहारा होती है, लेकिन सरकारी उपेक्षा के कारण अब यह सहायता मिलनी बंद हो गई है। उनका कहना था कि इस पेंशन के बिना महिलाएं अपने दिन-प्रतिदिन के खर्चों, जैसे कि भोजन, दवाइयों और अन्य जरूरी चीजों के लिए संघर्ष कर रही हैं।

“मंईया सम्मान योजना” पर सवाल

श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने विधवा पेंशन फंड से पैसे निकालकर उन्हें “मंईया सम्मान योजना” में ट्रांसफर कर दिया है। इस कदम ने उन महिलाओं की परेशानियों को और बढ़ा दिया है, जिनकी जीविका इस पेंशन पर निर्भर थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव किसी भी लिहाज से न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि एक योजना के नाम पर दूसरी योजना को आगे बढ़ाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह पूरी तरह से महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन भी है।

सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार से आग्रह किया कि वह अपनी उदासीनता को समाप्त करे और विधवा पेंशन का तत्काल भुगतान शुरू करे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए इस समस्या को शीघ्र हल करें।

उनका कहना था कि विधवा पेंशन केवल एक राशि नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं के लिए सम्मान, आत्मनिर्भरता और जीवन के प्रति उम्मीद का प्रतीक है। पेंशन के बिना यह महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से और अधिक पिछड़ रही हैं।

महिलाओं के दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

मारांडी ने सरकार से यह भी कहा कि माताओं और बहनों की समस्याओं और दर्द को नजरअंदाज करना अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है। उन्होंने सरकार से आह्वान किया कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता पर लेकर जल्द से जल्द समाधान करें, ताकि झारखंड की विधवा महिलाएं अपने जीवन को गरिमा और आत्मनिर्भरता के साथ जी सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मसले में किसी प्रकार की देरी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है और यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो पार्टी इस मुद्दे को और अधिक तीव्रता से उठाएगी।

यह स्थिति न केवल महिलाओं के लिए बल्कि राज्य की विकासशीलता और समानता के लिए भी खतरे की घंटी है, और बाबूलाल मरांडी के इस बयान ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह इस संवेदनशील मामले का शीघ्र समाधान करे।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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