Ranchi | झारखंड में संचालित कई वित्त रहित इंटर कॉलेजों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक सीटों पर नामांकन लेने के बाद अब हजारों छात्रों का 11वीं का पंजीकरण अटक गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की तय अधिकतम सीमा के चलते झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) अतिरिक्त सीटों पर नामांकित विद्यार्थियों के पंजीकरण पर अब तक निर्णय नहीं ले सका है, जबकि पंजीकरण की अंतिम तिथि नजदीक है।
राज्य के कई वित्त रहित इंटर कॉलेजों ने विभाग द्वारा निर्धारित 512–520 सीटों से अधिक पर 11वीं में नामांकन कर लिया। अब इन अतिरिक्त सीटों पर पढ़ रहे छात्रों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है।
कॉलेजों ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) के माध्यम से जांच रिपोर्ट जैक को भेज दी, लेकिन जैक स्तर पर निर्णय लंबित है।
तय समय-सीमा और बढ़ती चिंता
जैक द्वारा 11वीं पंजीकरण की अंतिम तिथि 2 जनवरी तय है। समय-सीमा नजदीक आने के साथ प्रभावित छात्रों में संशय और आक्रोश बढ़ रहा है।
छात्र और अभिभावक कॉलेज, जिला कार्यालय और जैक के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
पिछले वर्ष का उदाहरण और इस बार की स्थिति
अतिरिक्त सीटों का यह मामला नया नहीं है। पिछले वर्ष भी ऐसा ही विवाद सामने आया था। तब झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर जैक ने 16 इंटर कॉलेजों की जांच कर अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दी थी और छात्रों का पंजीकरण कराया गया था।
इस बार लगभग 40 इंटर कॉलेजों में अतिरिक्त नामांकन का मामला फंसा हुआ है, जिससे संकट और गहरा गया है।
अधिकारों का टकराव
मामला मुख्य रूप से सीट स्वीकृति के अधिकार को लेकर है।
- स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी इंटर कॉलेजों के लिए अधिकतम 520 सीटों की सीमा तय की है।
- इससे पहले जैक अतिरिक्त सीटों को भी मंजूरी देता रहा है।
- विभाग ने इस पर आपत्ति जताते हुए जैक से जवाब तलब किया।
- जैक ने अधिनियम का हवाला देते हुए अतिरिक्त सीटों की स्वीकृति को अपना अधिकार बताया।
यह अधिकार-संघर्ष अब छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रहा है।
प्रशासन और संगठनों की प्रतिक्रिया
झारखंड वित्त रहित शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि जैक के निर्देश पर ही जिलों के डीईओ ने सितंबर में जांच रिपोर्ट भेज दी थी।
मोर्चा का आरोप है कि यदि अतिरिक्त सीटों की मंजूरी नहीं देनी थी, तो यह निर्णय पहले ही लिया जाना चाहिए था। अब देरी का खामियाजा छात्र और कॉलेज भुगत रहे हैं।
50 हजार छात्र अधर में
अनुमान के अनुसार लगभग 50 हजार विद्यार्थी इस निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
- छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अनिश्चित हो गया है।
- कॉलेजों को अभिभावकों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।
- पंजीकरण नहीं होने की स्थिति में छात्रों की आगे की पढ़ाई पर संकट मंडरा रहा है।
यदि 2 जनवरी तक जैक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लेता, तो मामला फिर से न्यायिक हस्तक्षेप की ओर बढ़ सकता है।
शिक्षा जगत की निगाहें जैक और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड के अगले कदम पर टिकी हैं।
अतिरिक्त सीटों पर नामांकन का यह विवाद प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर करता है।
समय पर निर्णय नहीं होने से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग और जैक जल्द स्पष्ट और छात्रहित में फैसला लें।











