मनोज कुमार का निधन: भारतीय सिनेमा ने खोया एक महानायक

Subhash Shekhar
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देशभक्ति की मिसाल, सिनेमा का एक युग समाप्त

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार का 4 अप्रैल 2025 को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। “भारत कुमार” के नाम से प्रसिद्ध मनोज कुमार ने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में सुबह 4:03 बजे अंतिम सांस ली।

डॉक्टरों के अनुसार, उनका निधन कार्डियोजेनिक शॉक के कारण हुआ, जो तीव्र मायोकार्डियल इंफार्क्शन (गंभीर हार्ट अटैक) के कारण हुआ। बीते कुछ महीनों से वे लीवर सिरोसिस की गंभीर स्थिति से भी जूझ रहे थे, जिससे उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्हें 21 फरवरी 2025 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

सिनेमा में देशभक्ति का अमर चेहरा

मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। उनका जन्म 24 जुलाई 1937 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। हिंदी सिनेमा में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई, विशेष रूप से देशभक्ति से भरपूर फिल्मों में।

उन्होंने ‘शहीद’, ‘उपकार’ और ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्मों में अपने किरदारों से देशवासियों के दिलों में देशभक्ति की लौ जगाई। उनकी फिल्मों में राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति की झलक साफ देखने को मिलती थी।

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सिनेमा में देशभक्ति का अमर चेहरा

पुरस्कार और सम्मान

मनोज कुमार ने अपने करियर में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और सात फिल्मफेयर अवार्ड्स सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किए। उनके अपार योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया।

2015 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया, जो भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है। उनका योगदान भारतीय फिल्म जगत के लिए सदैव अमूल्य रहेगा।

फिल्मी जगत में शोक की लहर

मनोज कुमार के निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा,
“यह बताते हुए बेहद दुख हो रहा है कि दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता, हमारे प्रेरणास्रोत, भारतीय सिनेमा के महानायक मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। यह पूरी इंडस्ट्री के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम अक्सर उनसे मिलते रहते थे, वे हमेशा जिंदादिल रहते थे। ऐसे महान कलाकार और निर्देशक को खोना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा झटका है। अलविदा मनोज जी, आपको बहुत याद किया जाएगा।”

एक विरासत जो अमर रहेगी

मनोज कुमार न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक दूरदर्शी फिल्मकार भी थे। उनकी फिल्मों ने करोड़ों भारतीयों को प्रेरित किया और देशभक्ति की भावना को जीवंत रखा। उनका योगदान भारतीय सिनेमा में हमेशा अमर रहेगा।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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