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Silver Price Today: चांदी ने बनाया नया इतिहास, MCX पर ₹2,54,000 के पार — क्या अभी और तेजी बाकी या मुनाफावसूली का समय?

Silver price today ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को चौंका दिया है। सोमवार, 29 दिसंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत पहली बार ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार करते हुए नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेज उछाल के बीच निवेशकों के मन में एक ही सवाल है—क्या चांदी में तेजी जारी रहेगी या अब मुनाफावसूली करनी चाहिए?

आज की बड़ी खबर: MCX पर चांदी 6% उछली

सोमवार सुबह MCX पर सिल्वर मार्च फ्यूचर्स में करीब 6% की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। चांदी का भाव ₹2,54,174 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
सुबह करीब 9:40 बजे, चांदी ₹2,51,746 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले बंद भाव से ₹11,959 या लगभग 5% अधिक था।

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यह उछाल केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी चांदी ने नई ऊंचाइयों को छुआ।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या रहा रुख

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट सिल्वर ने सत्र के दौरान $83.62 प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई छुआ। हालांकि, बाद में मुनाफावसूली के चलते यह $78.12 प्रति औंस के आसपास आ गया, जिसमें करीब 1.3% की गिरावट दर्ज की गई।

इसके बावजूद, सालभर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चांदी अब तक 181% की छलांग लगा चुकी है, जो इसे इस साल का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला एसेट बनाता है।

सोने से भी आगे निकली चांदी

2025 में चांदी ने न सिर्फ सोने को पीछे छोड़ा है, बल्कि रिटर्न के मामले में कई बड़े एसेट क्लास को भी मात दी है।
इतना ही नहीं, चांदी का कुल मार्केट कैप $4.65 ट्रिलियन तक पहुंच गया है, जो दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल Nvidia ($4.63 ट्रिलियन) से भी अधिक है।

चांदी की कीमतों में इस साल क्यों आई बेतहाशा तेजी

1. सप्लाई की लगातार कमी

चांदी पिछले सात वर्षों से संरचनात्मक सप्लाई डेफिसिट में है। खनन उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं बढ़ पाया, जिससे कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रहा।

2. इंडस्ट्रियल डिमांड में उछाल

2025 में चांदी की औद्योगिक मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई।

  • सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स
  • रिन्यूएबल एनर्जी रोलआउट
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स
  • इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन

इन सभी क्षेत्रों में चांदी की खपत तेजी से बढ़ी, जिससे डिमांड-सप्लाई का अंतर और गहरा गया।

3. अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

अमेरिका के Federal Reserve द्वारा ब्याज दरों में कटौती और 2026 में आगे और नरमी की उम्मीद ने नॉन-यील्डिंग एसेट्स जैसे सोना और चांदी को आकर्षक बना दिया।

4. वैश्विक अनिश्चितता और सेफ हेवन डिमांड

डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े टैरिफ फैसलों, वैश्विक व्यापार तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी स्थितियों ने निवेशकों को सेफ हेवन एसेट्स की ओर मोड़ा।
इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता का सीधा फायदा चांदी को मिला।

क्या अब मुनाफावसूली का समय है?

इतनी तेज रैली के बाद निवेशकों के मन में स्वाभाविक चिंता है कि क्या अब मुनाफा बुक करना चाहिए।

प्रथमेश मल्ल्या, DVP रिसर्च (नॉन-एग्री कमोडिटीज और करेंसी) at Angel One के अनुसार,
अमेरिका में आर्थिक सुस्ती, टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, US-China ट्रेड टेंशन, ब्याज दरों में कटौती, ETF में निवेश और सप्लाई-डिमांड गैप जैसे कारक चांदी की तेजी को फिलहाल सपोर्ट करते रहेंगे।

हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि चांदी ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक वोलाटाइल रही है और तेज गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आगे कितना ऊपर और कितना नीचे?

विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • बेस केस में गिरावट: ₹1,50,000 प्रति किलोग्राम तक
  • अपसाइड टारगेट (2026): ₹2,75,000 प्रति किलोग्राम तक

मतलब साफ है—मौजूदा स्तरों पर जोखिम और रिटर्न दोनों ही ऊंचे हैं।

पोर्टफोलियो में चांदी की सही जगह क्या हो

निर्पेंद्र यादव, सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट, Bonanza का मानना है कि
धीमी वैश्विक ग्रोथ, नरम मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के माहौल में निवेशकों को पोर्टफोलियो को ज्यादा रेजिलिएंट बनाना चाहिए।

उनकी सलाह:

  • कुल पोर्टफोलियो का 15%–25% हिस्सा प्रेशियस मेटल्स में रखें
  • इस हिस्से में से करीब 40% आवंटन चांदी को दिया जा सकता है

चांदी ने 2025 में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है और नए रिकॉर्ड बनाए हैं। मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड, सीमित सप्लाई और वैश्विक अनिश्चितताओं ने इसकी चमक को और बढ़ाया है।
हालांकि, मौजूदा ऊंचे स्तरों पर वोलाटिलिटी भी उतनी ही ज्यादा है। दीर्घकालिक निवेशक सीमित मात्रा में होल्ड कर सकते हैं, जबकि शॉर्ट-टर्म निवेशकों को मुनाफावसूली और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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