रांची: झारखंड के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स (RIMS) से एक बेहद स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। हॉस्टल नंबर 8 के बंद कमरे में एमबीबीएस सेकंड ईयर के एक बेहद होनहार छात्र अक्षित कुजूर का शव मिलने के बाद पूरे कैंपस में हड़कंप मच गया है। शुक्रवार की रात खाना खाकर सोने गए अक्षित की सुबह लाश मिलने से साथी छात्र और रिम्स प्रशासन गहरे सदमे में है।
यह घटना केवल एक मेडिकल छात्र की मौत नहीं है, बल्कि देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रोफेशन की पढ़ाई कर रहे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ी करती है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि भविष्य के एक उभरते हुए डॉक्टर को मौत गले लगानी पड़ी? बरियातू थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही है, लेकिन अभी तक सुसाइड की असली वजहों का खुलासा नहीं हो पाया है।
दोस्तों ने जब खटखटाया दरवाजा, तो उड़ गए होश
ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से झारखंड के सिमडेगा जिले का रहने वाला अक्षित कुजूर रिम्स में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र था। शुक्रवार रात को वह अपने हॉस्टल के दोस्तों के साथ सामान्य रूप से खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने गया था।
चश्मदीद दोस्तों के मुताबिक: “शनिवार की सुबह जब कुछ साथी छात्र अक्षित से मिलने उसके कमरे पर पहुंचे और दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई आवाज नहीं आई। अनहोनी की आशंका होने पर जब दरवाजा खोला गया, तो अक्षित बेसुध पड़ा हुआ था।”
साथी छात्र आनन-फानन में अक्षित को उठाकर रिम्स के ही ट्रॉमा सेंटर ले गए। वहां डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम ने उसे बचाने की काफी देर तक कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पल भर में ही पूरे रिम्स परिसर में यह खबर आग की तरह फैल गई और हॉस्टल में सन्नाटा पसर गया।
बरियातू पुलिस की जांच शुरू: सुसाइड नोट का इंतजार
घटना की जानकारी मिलते ही बरियातू थाना प्रभारी मनोज कुमार पुलिस बल के साथ रिम्स हॉस्टल नंबर 8 पहुंचे। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर रिम्स के मॉर्चरी (शवगृह) में रखवा दिया है।
पुलिस और प्रशासन की अब तक की कार्रवाई:
- कमरे की सीलिंग: अक्षित के कमरे को अभी शुरुआती जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
- परिजनों को सूचना: अक्षित के माता-पिता वर्तमान में पंजाब में रह रहे हैं, जिन्हें इस दर्दनाक हादसे की सूचना दे दी गई है। उनके रांची पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।
- सुसाइड नोट की तलाश: पुलिस परिजनों की मौजूदगी में कमरे की विस्तृत तलाशी लेगी। पुलिस को उम्मीद है कि अगर कोई सुसाइड नोट या डायरी मिलती है, तो मौत के असली कारणों से पर्दा उठ सकेगा।
रिम्स निदेशक का बड़ा बयान: “गहरे डिप्रेशन में था अक्षित”
इस दर्दनाक घटना पर गहरा दुख जताते हुए रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि अक्षित पढ़ाई-लिखाई में बेहद मेधावी और योग्य छात्र था। रिम्स ने एक ऐसे छात्र को खो दिया जो भविष्य का एक बेहतरीन डॉक्टर बनता।
रिम्स निदेशक ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा, “शुरुआती फीडबैक से जो बात सामने आ रही है, उसके मुताबिक अक्षित पिछले कुछ समय से गहरे डिप्रेशन (तनाव) में था। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि हॉस्टल में रूम शेयरिंग में रहने के बावजूद उसके दोस्त या आसपास के लोग यह भांप नहीं पाए कि वह इस कदर मानसिक तनाव से गुजर रहा है कि ऐसा आत्मघाती कदम उठा लेगा।”
मेडिकल की पढ़ाई का प्रेशर या कुछ और? रिम्स उठाएगा बड़ा कदम
डॉ. राजकुमार ने स्वीकार किया कि मेडिकल की पढ़ाई में छात्रों पर कई तरह का मानसिक और अकादमिक दबाव होता है। इस घटना से सबक लेते हुए रिम्स प्रशासन अब अपने छात्रों के लिए एक विशेष लेक्चर और काउंसलिंग सेशन आयोजित करने जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को डिप्रेशन का शिकार होने से बचाया जा सके।
माता-पिता के लिए रिम्स प्रबंधन की भावुक अपील:
रिम्स निदेशक ने देश और राज्य के सभी मेडिकल स्टूडेंट्स के अभिभावकों से अपील की है:
- रोजाना करें बात: अपने बच्चों से हर दिन फोन पर बात करें और उनका हालचाल जानें।
- व्यवहार पर रखें नजर: यदि बातचीत के दौरान बच्चों के व्यवहार में थोड़ा भी बदलाव, चिड़चिड़ापन या उदासी दिखे, तो इसे हल्के में न लें।
- तुरंत कदम उठाएं: ऐसा होने पर तुरंत बच्चे को कुछ दिनों के लिए घर बुलाएं या सीधे कॉलेज प्रबंधन/हॉस्टल वार्डन को सूचित करें।
आगे क्या? सिस्टम और समाज के सामने बड़े सवाल
अक्षित कुजूर की मौत ने एक बार फिर मेडिकल शिक्षा प्रणाली और हॉस्टल लाइफ के अकेलेपन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस अब अक्षित के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) और सोशल मीडिया चैट्स को भी खंगालने की तैयारी में है ताकि यह जाना जा सके कि मौत से कुछ घंटे पहले वह किसके संपर्क में था। सिमडेगा से रांची आ रहे परिजनों के बयान के बाद ही पुलिस की जांच आगे बढ़ेगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आख़िर हमारे देश के सबसे मेधावी दिमाग अवसाद के इस चक्रव्यूह को तोड़ क्यों नहीं पा रहे हैं?











