Jahanabad | हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने जहानाबाद दौरे के दौरान धर्म और सामाजिक सौहार्द को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी मस्जिद के सामने गीता पढ़ना या किसी मंदिर के सामने कुरान का पाठ करना धार्मिकता नहीं, बल्कि तनाव को बढ़ावा देता है। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।
जहानाबाद पहुंचे जीतन राम मांझी ने मीडिया से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन दूसरों के धार्मिक स्थलों के सामने जाकर धार्मिक गतिविधियां करना अनुचित है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “हम हनुमान की पूजा करते हैं, इसका यह अर्थ नहीं कि हम गिरजाघर या मस्जिद के पास जाकर पूजा करें।”
मांझी ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और यहां शांति, सह-अस्तित्व और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान सबसे जरूरी है। किसी भी तरह की धार्मिक प्रतिस्पर्धा या प्रदर्शन से समाज में गलत संदेश जाता है।
धर्म पर बयान की पृष्ठभूमि और संदर्भ
बिहार समेत देश के कई हिस्सों में हाल के वर्षों में धार्मिक आयोजनों और जुलूसों को लेकर विवाद सामने आए हैं। कई मामलों में धार्मिक स्थलों के पास नारेबाजी या धार्मिक पाठ को लेकर तनाव की स्थिति बनी।
इसी पृष्ठभूमि में मांझी का बयान सामने आया है, जिसे सामाजिक संतुलन और संयम की अपील के रूप में देखा जा रहा है।
मांझी ने कहा कि धर्म का उद्देश्य जोड़ना है, तोड़ना नहीं। यदि धार्मिक गतिविधियां तनाव का कारण बनें, तो उन पर आत्ममंथन जरूरी है।
उपेन्द्र कुशवाहा को दी नसीहत
राज्यसभा सीट को लेकर अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए मांझी ने कहा कि उन्होंने केवल अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुझाव दिया था।
इसके साथ ही उन्होंने एनडीए के सहयोगी Upendra Kushwaha को नसीहत दी।
मांझी ने कहा कि जब किसी नेता को पहले ही राजनीतिक लाभ मिल चुका हो, तो बार-बार नई मांगों को लेकर असहमति जताना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कुशवाहा अपने और अपने परिवार के लिए मंत्री पद सुनिश्चित कर चुके हैं, ऐसे में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार पर प्रतिक्रिया
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों पर मांझी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में भी पहले इसी तरह की घटनाएं होती रही हैं।
मांझी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या घट रही है।
उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका जैसे देशों में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं, लेकिन वहां धार्मिक विवाद सामने नहीं आते। इससे यह स्पष्ट होता है कि विवाद धर्म से नहीं, बल्कि राजनीति और मानसिकता से पैदा होते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र
मांझी ने कहा कि देश में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने को लेकर Narendra Modi सचेत हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर ऐसे मुद्दों पर सख्ती से काम करेंगी, ताकि समाज में शांति बनी रहे।
राजनीति पर असर
जीतन राम मांझी के बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कुछ लोग इसे स्पष्ट और संतुलित सोच बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे मौजूदा राजनीतिक हालात से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, आम जनता के बीच यह संदेश गया है कि धर्म के नाम पर टकराव से बचना ही देशहित में है।
आने वाले दिनों में मांझी के इस बयान पर अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार की राजनीति में यह बयान सामाजिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता की बहस को फिर से केंद्र में ला सकता है।
जहानाबाद में दिया गया जीतन राम मांझी का बयान धर्म, राजनीति और समाज के बीच संतुलन की बात करता है।
उन्होंने साफ किया कि आस्था व्यक्तिगत है, लेकिन सार्वजनिक आचरण में संयम जरूरी है, तभी सामाजिक शांति संभव है।











