Ranchi | रांची में आयोजित राज्यस्तरीय ‘एसआईपी प्रॉडिजी-2026’ प्रतियोगिता में बच्चों ने जो कर दिखाया, उसने शिक्षा जगत से लेकर अभिभावकों तक सभी को चौंका दिया।
11 मिनट से भी कम समय में 300 गणितीय प्रश्न, वो भी बिना कैलकुलेटर—यह नज़ारा खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में देखने को मिला।
इस प्रतियोगिता में 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के 2200 बच्चों ने भाग लिया और यह साबित कर दिया कि सही प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास से बच्चों की बौद्धिक क्षमता असाधारण स्तर तक पहुंच सकती है।
क्या, क्यों और कैसे — 3 लाइनों में पूरी खबर
- रांची में राज्यस्तरीय एसआईपी प्रॉडिजी-2026 का आयोजन
- 2200 बच्चों ने अबेकस और मेंटल मैथ्स में दिखाया कमाल
- 300 सवाल 11 मिनट से कम समय में हल कर बनाया नया बौद्धिक रिकॉर्ड-सा माहौल
कैलकुलेटर भी फेल! बच्चों की गणना ने तोड़े सारे भ्रम
रविवार को आयोजित इस प्रतियोगिता में अबेकस, ब्रेन जिम और मेंटल मैथ्स के ज़रिए बच्चों ने जिस गति और सटीकता से सवाल हल किए, उसने यह सोच बदल दी कि इतनी कम उम्र में इतनी तेज़ गणना संभव नहीं।
रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, डाल्टनगंज, देवघर, दुमका, गोड्डा, गिरीडीह, गुमला, खूंटी और लोहरदगा सहित
झारखंड के 85 एसआईपी लर्निंग सेंटर्स से आए बच्चों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

1593 बच्चों को मंच पर सम्मान, स्टेडियम तालियों से गूंज उठा
प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाले बच्चों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया—
- 🥇 17 बच्चे बने प्रतियोगिता चैंपियन
- 🥈 129 बच्चे प्रथम उपविजेता
- 🥉 186 बच्चे द्वितीय उपविजेता
- 🏅 347 बच्चे तृतीय उपविजेता
- 🎖️ 861 बच्चों को सांत्वना पुरस्कार
👉 कुल 1593 बच्चों को मंच पर सम्मान मिला, जिससे बच्चों और अभिभावकों का उत्साह चरम पर दिखा।
आयोजकों की ज़ुबानी: “ये सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, माइंड पावर का सबूत है”
SIP Academy India के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश विक्टर ने कहा—
“बच्चों की गति और सटीकता यह साबित करती है कि एसआईपी ट्रेनिंग मस्तिष्क को नई ऊंचाई देती है।”
रीजनल हेड सुभजीत मल्लिक ने कहा—
“झारखंड के बच्चों में गजब की प्रतिभा है, सही मंच मिले तो ये राष्ट्रीय स्तर पर भी चमक सकते हैं।”
स्टेट हेड इकबाल सिंह होरा ने जोड़ा—
“आज बच्चों ने साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन मिले तो कैलकुलेटर भी उनके सामने फेल है।”
पांच बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है प्रतियोगिता
‘एसआईपी प्रॉडिजी’ अब तक पांच बार लिम्का बुक ऑफ नेशनल रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुकी है।
आयोजकों के अनुसार, यह प्रतियोगिता सिर्फ जीत-हार नहीं बल्कि—
- आत्मविश्वास
- एकाग्रता
- तेज निर्णय क्षमता
- और बौद्धिक विकास
का मजबूत प्लेटफॉर्म है।
आम लोगों के लिए क्यों खास है यह खबर?
- यह शिक्षा के पारंपरिक तरीकों पर सवाल उठाती है
- यह दिखाती है कि ग्रामीण-शहरी बच्चे समान रूप से प्रतिभाशाली हैं
- यह माता-पिता को बच्चों की ब्रेन ट्रेनिंग पर सोचने को मजबूर करती है
आयोजकों के अनुसार, आने वाले महीनों में नेशनल लेवल एसआईपी प्रॉडिजी की तैयारी शुरू होगी, जहां झारखंड के ये प्रतिभाशाली बच्चे देशभर के मंच पर अपनी क्षमता दिखाएंगे।
सवाल यही है—
👉 क्या अब स्कूलों में मेंटल मैथ्स और अबेकस को गंभीरता से अपनाया जाएगा?











