New Delhi | भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार 2026 की सूची सामने आते ही देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इस साल कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंज़ूरी दी गई है, जिसमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं।
कला, राजनीति, खेल, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, सामाजिक कार्य से लेकर व्यापार और उद्योग तक — हर क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों को सम्मानित किया गया है। खास बात यह है कि इस सूची में 19 महिलाएं, 16 मरणोपरांत सम्मान और विदेशी/एनआरआई श्रेणी के 6 नाम शामिल हैं, जिसने इस बार के पद्म पुरस्कारों को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।
गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर घोषित हुई इस सूची को लेकर देशभर में भावनात्मक प्रतिक्रिया, गर्व और बहस — तीनों एक साथ देखने को मिल रही है।
पद्म पुरस्कार 2026: सम्मान नहीं, राष्ट्र की पहचान
पद्म पुरस्कार केवल सम्मान नहीं होते, बल्कि ये देश की संस्कृति, विचारधारा, संघर्ष और योगदान की पहचान होते हैं। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में मार्च/अप्रैल 2026 में आयोजित भव्य समारोह में इन पुरस्कारों को प्रदान किया जाएगा।
इस साल के चयन में साफ दिखता है कि सरकार ने:
- ग्रासरूट योगदानकर्ताओं
- लोकसेवा में जीवन खपाने वाले चेहरे
- संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने वाले लोग
- वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाली हस्तियां
— सभी को बराबर महत्व दिया है।
पद्म विभूषण: सर्वोच्च सम्मान, सबसे बड़ा संदेश
सम्मानित नाम:
- धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत) – कला
- के टी थॉमस – सार्वजनिक मामले
- एन राजम – कला
- पी नारायणन – साहित्य एवं शिक्षा
- वी. एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत) – सार्वजनिक मामले
विश्लेषण:
यह सूची साफ दिखाती है कि सरकार ने विचार, संस्कृति और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मरणोपरांत सम्मान यह संकेत देता है कि योगदान कभी मरता नहीं — वह इतिहास बन जाता है।
पद्म भूषण: राजनीति, कला, व्यापार और खेल का संतुलन
इस श्रेणी में नाम जैसे:
- अलका याग्निक (कला)
- ममूटी (कला)
- उदय कोटक (व्यापार)
- विजय अमृतराज (खेल)
- शिबू सोरेन (मरणोपरांत) (झारखंड, सार्वजनिक मामले)
झारखंड एंगल:
शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिलना सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के इतिहास को राष्ट्रीय मान्यता है।
यह निर्णय भावनात्मक भी है और राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक भी।
पद्म श्री 113 नाम: असली भारत की असली कहानियाँ
पद्म श्री सूची में वो भारत दिखता है जो:
- गांवों में काम करता है
- जमीन पर बदलाव लाता है
- बिना सुर्खियों के समाज बनाता है
कला, कृषि, रेडियो प्रसारण, पुरातत्व, सामाजिक सेवा, लोकसंस्कृति, खेल, शिक्षा — हर क्षेत्र से लोग चुने गए हैं।

ग्राउंड रिपोर्टिंग संकेत:
यह सूची बताती है कि सरकार अब सिर्फ “सेलेब्रिटी मॉडल” नहीं, बल्कि इम्पैक्ट मॉडल पर अवॉर्ड दे रही है।
अहम आंकड़े जो तस्वीर साफ करते हैं
- कुल पुरस्कार: 131
- महिलाएं: 19
- मरणोपरांत सम्मान: 16
- विदेशी/एनआरआई/पीआईओ/ओसीआई: 6
- क्षेत्र: 15+ अलग-अलग सेक्टर
आगे क्या? | What Next
अब सबकी नजरें होंगी:
- राष्ट्रपति भवन के औपचारिक समारोह पर
- किसे मंच पर सबसे पहले सम्मान मिलेगा
- कौन सा नाम बनेगा 2026 का “सबसे बड़ा प्रतीकात्मक चेहरा”
- क्या कुछ नामों पर राजनीतिक या सामाजिक बहस होगी?
पद्म पुरस्कार 2026 सिर्फ सम्मान नहीं — यह आने वाले भारत की वैचारिक दिशा का संकेत है।










