कोटा को टक्कर: मोशन रांची का नया परिसर क्यों चौंका रहा है?

Subhash Shekhar
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Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची अब देश का नया एजुकेशनल हब बनने की राह पर है। इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं (JEE-NEET) की तैयारी कराने वाले प्रतिष्ठित संस्थान ‘मोशन रांची’ ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे राज्य के शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। लालपुर के श्री राम नियोटिया बिल्डिंग में संस्थान के नए और आधुनिक परिसर का भव्य उद्घाटन किया गया है।

इस बड़े विस्तार का उद्घाटन खुद भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने किया। इस दौरान संस्थान के ‘मोशन है तो भरोसा है’ के संकल्प ने राज्य के छात्रों और अभिभावकों के बीच एक नई चर्चा छेड़ दी है।

मंत्री संजय सेठ बोले- “सिर्फ कोचिंग से नहीं, खुद की आग से मिलेगी सफलता”

उद्घाटन समारोह के दौरान भारी संख्या में छात्र और अभिभावक मौजूद थे। इस मौके पर मुख्य अतिथि रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने युवाओं को संबोधित करते हुए एक बेहद व्यावहारिक बात कही।

“आज के बच्चे पूरी तरह करियर ओरिएंटेड हैं और मोशन जैसी संस्थाएं उन्हें बिना किसी लैप्स के सटीक तैयारी दे रही हैं। लेकिन याद रखिए, आप दुनिया के किसी भी बेस्ट कोचिंग सेंटर में चले जाएं, जब तक आपके भीतर खुद आगे बढ़ने की इच्छा और आग नहीं होगी, तब तक आप इतिहास नहीं रच सकते। असली ताकत आपके भीतर की मेहनत है।”

इस दौरान परिसर में मौजूद छात्रों की तालियों की गड़गड़ाहट ने माहौल को बेहद ऊर्जावान बना दिया। कार्यक्रम में मोशन रांची के सेंटर चेयरमैन महेंद्र अग्रवाल, डायरेक्टर कृष्णा अग्रवाल, को-डायरेक्टर सृष्टि डालमिया और सेंटर हेड नीरज कुमार सहित पूरी टीम मुस्तैद दिखी।

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67 बच्चों से 450+ का सफर: क्या है मोशन का ‘कोटा मॉडल’?

[यहाँ मोशन रांची के सफल छात्रों की मुस्कुराती हुई ग्रुप फोटो लगाएं]

कोटा को टक्कर: रांची के इस संस्थान ने क्यों चौंकाया?
कोटा को टक्कर: मोशन रांची का नया परिसर क्यों चौंका रहा है? 9

जब हमारी टीम ने मोशन रांची के डायरेक्टर श्री कृष्णा अग्रवाल से बात की, तो उन्होंने उस सीक्रेट फॉर्मूले का खुलासा किया जिसके दम पर रांची सीधे कोटा को टक्कर दे रहा है। कृष्णा अग्रवाल ने बताया:

“हमने 18 फरवरी 2020 को सिर्फ 67 विद्यार्थियों के साथ यह सफर शुरू किया था। आज वर्ष 2026 में 450 से अधिक छात्र हमारे साथ हैं। हमारी ताकत ‘पर्सनलाइज्ड एजुकेशन’ है। हर बच्चे का कोई सब्जेक्ट मजबूत तो कोई कमजोर होता है। हम हर बच्चे की जरूरत के हिसाब से उसे पर्सनल गाइडेंस देते हैं, जिससे उसे उड़ान भरने में समय नहीं लगता।”

महंगी होती कोचिंग और स्कॉलरशिप का सच

जब फीस और बढ़ती महंगाई को लेकर सवाल उठा, तो डायरेक्टर ने साफ किया कि कोचिंग पर 18% जीएसटी जैसी चुनौतियों के बावजूद मोशन रांची किसी भी होनहार को पीछे नहीं छूटने देगा। उन्होंने कहा कि जो बच्चे किसान परिवारों से हैं, या जिनके माता-पिता पुलिस और आर्मी में हैं, उन्हें कोटा से विशेष अप्रूवल लेकर ‘हायर स्कॉलरशिप’ दी जा रही है। इसके साथ ही संस्थान झारखंड सरकार के सरकारी प्रोजेक्ट्स के साथ मिलकर भी गरीब बच्चों तक कोटा का स्टडी मटेरियल और टीचर्स पहुंचा रहा है।

गुमला और जमशेदपुर के टॉपरों ने शेयर किया अनुभव

इस उद्घाटन समारोह की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब सामने आई जब डिजिटल स्क्रीन पर मोशन रांची के इस साल (2026) के टॉपर्स के चेहरे चमके।

  • AIR 3881 लाने वाले दिव्यांश मिश्रा: जनरल कैटेगरी से जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 3881 लाने वाले दिव्यांश मिश्रा ने बताया, “मैंने 12वीं के साथ भी क्रैक किया था, पर अच्छे कॉलेज के लिए ड्रॉप लिया। टीचर्स ने तीन साल तक रात-रात भर जागकर मेरे डाउट्स क्लियर किए। आज मैं IIT बॉम्बे या दिल्ली जाने के लिए तैयार हूँ।”
  • गुमला के तनिष्क और अविनाश की कहानी: गुमला जैसे सुदूर इलाके से आए तनिष्क कुमार (वर्तमान में BIT मेसरा) और अविनाश डाक ने माहौल को थोड़ा हल्का करते हुए कहा, “हमने लेट जॉइन किया था और टीचर्स को डाउट्स पूछ-पूछ कर परेशान कर दिया था। आज हमारी सफलता में उसी पर्सनल केयर का हाथ है।”

रांची बनाम कोटा की इस जंग में आगे क्या?

मोशन रांची का यह आधुनिक विस्तार सिर्फ एक बिल्डिंग का उद्घाटन नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अब झारखंड के बच्चों को लाखों रुपए खर्च करके घर से दूर कोटा या दिल्ली जाने की मजबूरी नहीं होगी। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल लैब्स और एडवांस लर्निंग एनवायरनमेंट के कारण स्थानीय स्तर पर ही छात्रों को मानसिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। आने वाले समय में यह मॉडल झारखंड के अन्य जिलों के बच्चों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।