21 जून NEET परीक्षा पर जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान की बड़ी बैठक

Subhash Shekhar
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New Delhi | 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा को लेकर सरकार फुल एक्शन मोड में आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से एक बेहद अहम मुलाकात की। इस हाई-लेवल बैठक में आगामी परीक्षा की तैयारियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की गहन समीक्षा की गई।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने साफ किया कि इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुचारू, सुरक्षित और बिना किसी बाधा के आयोजित करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय हर मुमकिन कदम उठाएगा। नड्डा ने शिक्षा मंत्रालय को हर स्तर पर पूरा सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश भर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजरें परीक्षा की शुचिता पर टिकी हैं। दोनों मंत्रालयों ने एक सुर में दोहराया कि छात्रों के लिए एक परेशानी-मुक्त (Hassle-free) अनुभव सुनिश्चित करना ही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

आखिर क्यों बुलाई गई यह इमरजेंसी बैठक?

दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में इस बैठक को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालय के बीच का यह तालमेल सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि ग्राउंड लेवल पर परीक्षा केंद्रों को अभेद्य बनाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का आधिकारिक बयान:

“देश भर में 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में कराना हमारा संकल्प है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इसके लिए शिक्षा मंत्रालय को बैकएंड से लेकर लॉजिस्टिक्स तक, हर स्तर पर चौबीसों घंटे सहयोग देगा।”

इस बार प्रशासन किसी भी तरह की चूक या विवाद की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता। ग्राउंड पर तैनात नोडल अधिकारियों को भी कड़े निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य का ‘डबल लेयर’ चक्रव्यूह

बैठक में केवल कागजी रणनीति पर बात नहीं हुई, बल्कि जमीनी स्तर पर बड़े बदलावों का खाका खींचा गया है। इस बार NEET परीक्षा के दौरान छात्रों को किसी भी तरह की मानसिक या शारीरिक परेशानी न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

  • मेडिकल इमरजेंसी रिस्पांस टीम: भीषण गर्मी और छात्रों के स्वास्थ्य को देखते हुए हर बड़े परीक्षा केंद्र पर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मेडिकल कैंप्स और डॉक्टरों की तैनाती की जा सकती है।
  • सख्त निगरानी और सुरक्षा: शिक्षा मंत्रालय इस बार तकनीकी निगरानी को दोगुना कर रहा है ताकि किसी भी तरह के डिजिटल या फिजिकल फ्रॉड को रोका जा सके।
  • कोऑर्डिनेशन कमेटी: दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी 21 जून तक सीधे संपर्क में रहेंगे ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत फैसला लिया जा सके।

क्या होगा असर?

इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद देश भर के कोचिंग हब्स जैसे कोटा, दिल्ली और पटना के छात्रों के बीच हलचल तेज हो गई है। ग्राउंड ज़ीरो से मिली जानकारी के अनुसार, अभिभावक सरकार के इस कदम से थोड़े आश्वस्त जरूर हैं, लेकिन उनकी मांग है कि इन फैसलों का असर परीक्षा के दिन जमीन पर भी दिखना चाहिए।

प्रशासनिक स्तर पर, राज्य सरकारों को भी इस संबंध में जल्द ही नए दिशा-निर्देश भेजे जा सकते हैं ताकि स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य अमला अलर्ट मोड पर रहे।

इस बड़ी बैठक के बाद अब गेंद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और स्थानीय प्रशासन के पाले में है। सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि 21 जून को होने वाली परीक्षा में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दो-तीन दिनों में परीक्षा केंद्रों की नई गाइडलाइंस और सुरक्षा प्रोटोकॉल की आधिकारिक लिस्ट जारी हो सकती है। अब देखना यह होगा कि मंत्रालयों का यह साझा ‘एक्शन प्लान’ जमीनी स्तर पर कितना कारगर साबित होता है।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।