हाई कोर्ट ने JPSC को लगाई फटकार, आरक्षण नियमों की अनदेखी पर पलटा फैसला

Subhash Shekhar
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रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने JPSC के एक विवादित फैसले को पलटते हुए अनुसूचित जाति वर्ग के एक अभ्यर्थी को सिविल जज जूनियर डिवीजन की प्रारंभिक परीक्षा में सफल मानने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि आयोग ने संविधान में प्रदत्त आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं किया और उम्मीदवार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया।

झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस राजेश शंकर शामिल थे, ने इस मामले में स्पष्ट रूप से कहा कि JPSC द्वारा उम्मीदवार को अनारक्षित श्रेणी में गिनना असंवैधानिक है। कोर्ट ने आयोग को आदेश दिया कि उम्मीदवार को पीटी परीक्षा में पास घोषित किया जाए।

JPSC का आदेश हुआ निरस्त, उम्मीदवार दीपक को मिला न्याय

विवाद की जड़ में थे वर्ष 2023 में निकले सिविल जज जूनियर डिवीजन के विज्ञापन, जिसमें दीपक कुमार नामक अभ्यर्थी ने अनुसूचित जाति वर्ग के तहत आवेदन किया था। हालांकि, आवेदन पत्र में उन्होंने आरक्षण वाले कॉलम को खाली छोड़ दिया था, जिससे आयोग ने उन्हें सामान्य श्रेणी का मान लिया।

दीपक कुमार ने पीटी परीक्षा में अनुसूचित जाति वर्ग के कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे। बावजूद इसके, JPSC ने उन्हें 31 जुलाई 2024 को भेजे ईमेल के माध्यम से असफल घोषित कर दिया। आयोग का कहना था कि आरक्षण कॉलम न भरने के कारण उन्हें सामान्य श्रेणी में गिना गया।

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उम्मीदवार ने कोर्ट का रुख किया और बताया कि उसने अपने वर्ग में आवश्यक अंक प्राप्त किए हैं और तकनीकी त्रुटि के आधार पर उसे वंचित किया जाना गलत है। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकारते हुए साफ कहा कि संवैधानिक अधिकारों को तकनीकी खामियों के कारण नकारा नहीं जा सकता।

संविधान के आरक्षण प्रावधान सर्वोपरि – हाई कोर्ट

कोर्ट ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि अनुसूचित जाति जैसे वर्गों के लिए संविधान में जो विशेष संरक्षण और अवसर दिए गए हैं, उन्हें दरकिनार करना गलत है। सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को लागू करने के लिए आरक्षण जरूरी है और इसे नकारना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तकनीकी गलती के आधार पर ऐसे वर्ग के उम्मीदवार को उसके हक से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले से न केवल दीपक कुमार को राहत मिली है, बल्कि उन सभी उम्मीदवारों के लिए भी उम्मीद की किरण जगी है जो समान परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।

JPSC के कामकाज पर उठे सवाल

इस फैसले के बाद JPSC की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आयोग द्वारा आरक्षण नियमों की अनदेखी और तकनीकी आधार पर फैसले लेने की प्रवृत्ति पर न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है।

यह निर्णय झारखंड के प्रशासनिक तंत्र और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी स्थिति में संविधान के आरक्षण सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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