IMD Monsoon Forecast: देश पर मंडराया सूखे का खतरा, अब क्या होगा?

Subhash Shekhar
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IMD Monsoon Forecast

Ranchi | देश में इस साल भीषण सूखे का खतरा मंडराने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में देश को चौंकाते हुए साफ किया है कि इस साल मानसून के दौरान औसत से 10% कम बारिश दर्ज की जा सकती है।

मौसम विभाग ने पहले अप्रैल में सामान्य के आसपास बारिश होने की उम्मीद जताई थी, लेकिन अब अलनीनो परिस्थितियों के एक्टिव होने के कारण इस अनुमान को घटाकर 90 फीसदी कर दिया गया है। देश में करीब 10 साल बाद ऐसे हालात बन रहे हैं, जिसने नीति-निर्माताओं से लेकर किसानों तक की चिंता बढ़ा दी है।

इधर राष्ट्रीय स्तर पर सूखे की घंटी बजी है, तो दूसरी तरफ झारखंड में मौसम ने अचानक भयानक करवट ली है। राज्य में दो टर्फ लाइन सक्रिय होने के कारण रांची समेत कई जिलों में भारी तबाही हुई है, जहां वज्रपात की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई है।

10 साल बाद मंडराया संकट: अलनीनो ने बिगाड़ा खेल

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, जून से सितंबर के दौरान देश में औसत की सिर्फ 90 फीसदी ही बारिश होने की संभावना है। इस पूर्वानुमान में 4% कम या ज्यादा रहने की गुंजाइश है, यानी अगर हालात बिगड़े तो बारिश का आंकड़ा 86% तक भी गिर सकता है।

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“यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी 10 साल पहले 2015 में देखी गई थी, जब देश में मानसून 86% पर सिमट गया था और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ था।” – डॉ. मृत्युंजय महापात्र, महानिदेशक, IMD

अलनीनो ने बिगाड़ा खेल

केरल पहुंचने में होगी देरी

मौसम की मार यहीं खत्म नहीं हो रही है। मानसून रेखा की अरब सागर ब्रांच कमजोर पड़ने की वजह से मानसून केरल के तट पर समय से दस्तक नहीं दे पा रहा है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में हलचल जारी है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मुख्य भूमि तक मानसून को पहुंचने में अभी एक सप्ताह का समय और लग सकता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: झारखंड में राहत बनी आफत, वज्रपात से 4 की मौत

राजधानी रांची समेत झारखंड के कई हिस्सों में शुक्रवार को अचानक आसमान में काले बादल छा गए। सुबह 9 से 11 बजे के बीच हुई झमाझम बारिश और 50 से 60 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत तो दी, लेकिन यह राहत कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का गम बन गई। राज्य के अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।

कहां-कहां हुई अनहोनी?

  • रांची (इटकी): कुल्ली गांव में जंगल के भीतर आम और सूखी लकड़ियां चुनने गई 11 साल की मासूम बच्ची असृति मिंज की वज्रपात की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • बोकारो (पिंड्राजोरा): जंगलुडीह गांव में दोस्तों के साथ क्रिकेट मैच देख रहा 21 वर्षीय युवक अमित कुमार महतो बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। इसी दौरान पेड़ पर बिजली गिरी और उसकी जान चली गई।
  • गढ़वा (कांडी): बनकट टोला की रहने वाली 45 वर्षीय सोनमती देवी तेज बारिश के बीच अपनी बकरियों को बचाने बाहर निकली थीं। बकरियों को घर के अंदर लाते समय वह आकाशीय बिजली का शिकार हो गईं।
  • धनबाद (राजगंज): चुंगी गांव की 44 वर्षीय सपना देवी बाजार से घर लौट रही थीं, तभी रास्ते में आकाशीय बिजली की चपेट में आ गईं। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
झारखंड में वज्रपात से मची तबाही

ऑरेंज अलर्ट जारी: अभी और गिरेगा पारा, प्रशासन मुस्तैद

झारखंड मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य के ऊपर इस समय दो टर्फ लाइन सक्रिय हैं। इसके प्रभाव से रांची में 14 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे पारा 8.6 डिग्री लुढ़ककर 27.8 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। वहीं जमशेदपुर में भी तापमान 4 डिग्री गिरकर 32.0 डिग्री दर्ज किया गया है। धनबाद के भूली और हीरापुर इलाकों में ओले गिरने की भी खबर है।

मौसम विभाग ने 31 मई तक रांची, चतरा, पूर्वी सिंहभूम, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, लातेहार, लोहर्दगा, रामगढ़, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम समेत अधिकांश जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे में तापमान में 5 डिग्री की और गिरावट आ सकती है।

प्रशासन का अगला कदम: क्या है सिस्टम की तैयारी?

राष्ट्रीय स्तर पर कम बारिश के संशोधित अनुमान को देखते हुए केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय जल्द ही आकस्मिक योजना (Contingency Plan) पर काम शुरू कर सकते हैं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अलनीनो का असर कम किया जा सके।

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वहीं, स्थानीय स्तर पर झारखंड आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम केंद्र ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने आम जनता, विशेषकर किसानों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान वे खेतों में न जाएं, खुले स्थानों, बिजली के खंभों और ऊंचे पेड़ों के नीचे शरण बिल्कुल न लें। प्रभावित जिलों में स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।