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Jharkhand News

बांग्लादेश में खसरे का हाहाकार, क्या झारखंड में भी मंडरा रहा है बड़ा खतरा?

Ranchi | पड़ोसी देश बांग्लादेश में जानलेवा खसरे (मीजल्स) के प्रकोप ने कोहराम मचा दिया है। वहां अब तक 500 से अधिक मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों बच्चे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। सीमा पार मची इस चीख-पुकार के बाद झारखंड का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर आ गया है।

संथाल परगना संभाग के सीमावर्ती इलाकों में खसरे को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने देवघर सहित पूरे संभाग में युद्ध स्तर पर जागरूकता और जांच अभियान तेज कर दिया है, ताकि इस खतरनाक वायरस को भारतीय सीमा में दाखिल होने से रोका जा सके।

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ग्राउंड जीरो से मिली रिपोर्ट के अनुसार, देवघर, साहिबगंज और पाकुड़ जैसे संवेदनशील जिलों में प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि, राहत की बात यह है कि देवघर जिले में अब तक खसरे का एक भी पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है। संदिग्ध लक्षण वाले बच्चों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।

सीमावर्ती जिलों में नाकेबंदी, देवघर में मेडिकल कैंप की तैयारी

संथाल परगना का साहिबगंज और पाकुड़ जिला सीधे तौर पर बांग्लादेश सीमा के बेहद करीब है। वहीं देवघर को इस संभाग की धड़कन (सांस्कृतिक राजधानी) माना जाता है, जहां रोजाना हजारों की तादाद में लोगों की आवाजाही होती है। संक्रमण के इसी खतरे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग अब बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और देवघर एयरपोर्ट पर विशेष मेडिकल कैंप लगाने की रूपरेखा तैयार कर रहा है।

जिले के टीकाकरण पदाधिकारी डॉ. केके सिंह ने बताया:

“बांग्लादेश में खसरा के बढ़ते मामलों के बाद संथाल परगना के सभी जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य बना दिया गया है। सीमावर्ती इलाकों से सीधे या परोक्ष संपर्क को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। घबराने की जरूरत नहीं है, हमारी टीमें पूरी तरह तैयार हैं।”

एमआर वैक्सीन का स्टॉक फुल, घर-घर दस्तक दे रही है टीम

एमआर वैक्सीन का स्टॉक फुल, घर-घर दस्तक दे रही है टीम

डॉ. केके सिंह के मुताबिक, सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एमआर (मीजल्स-रूबेला) वैक्सीन उपलब्ध करा दी गई है। ग्रामीण और सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। जिन बच्चों का नियमित टीकाकरण किसी वजह से छूट गया था, उन्हें ‘लेफ्ट आउट’ श्रेणी में चिन्हित कर तुरंत ऑन-स्पॉट वैक्सीन दी जा रही है।

मेडिकल गाइड: हवा के जरिए फैल रहा है यह ‘कातिल’ वायरस, समझें क्रोनोलॉजी

वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, खसरा (Measles) कोई सामान्य बीमारी नहीं बल्कि पैरामाइक्सोवायरस (Paramyxovirus) से होने वाला एक अत्यंत संक्रामक रोग है। यह वायरस संक्रमित मरीज के खांसने, छींकने या यहां तक कि सामान्य बात करने के दौरान हवा में तैरने वाली सूक्ष्म बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए दूसरे इंसानों में फैलता है।

वायरस का हमला: मुंह/नाक के रास्ते प्रवेश ➡️ सांस की नली ➡️ फेफड़ों के इम्यून सेल्स (मैक्रोफेज) पर कब्जा ➡️ शरीर का सुरक्षा कवच ध्वस्त

बच्चों के साथ बुजुर्गों को भी खतरा, ये हैं शुरुआती लक्षण:

देवघर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शरद कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह बीमारी केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। कमजोर इम्यूनिटी वाले बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं भी इसकी चपेट में आ सकती हैं। संक्रमण के 10-12 दिनों बाद ये लक्षण दिखते हैं:

  • अचानक बहुत तेज बुखार आना।
  • लगातार सूखी खांसी, नाक बहना और आंखों का अत्यधिक लाल होना।
  • मुंह के अंदरूनी हिस्से में सफेद दाने (कोप्लिक स्पॉट) उभरना।
  • चेहरे से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर लाल चकत्ते (रैश) फैल जाना।

लापरवाही की कीमत: आंखों की रोशनी छीन सकता है खसरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट डराने वाली है। खसरा सिर्फ बुखार और दानों तक सीमित नहीं रहता। यदि सही समय पर इलाज न मिले, तो यह सीधे बच्चे के फेफड़ों और दिमाग पर हमला करता है। इससे निमोनिया, ब्रेन में सूजन (एन्सेफलाइटिस) और जानलेवा दस्त हो सकते हैं। सबसे क्रूर सच यह है कि हर साल दुनिया भर में हजारों बच्चे खसरे के कारण अपनी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खो देते हैं।

[खसरे के लक्षणों और बचाव के चार्ट का इन्फोग्राफिक यहाँ देखें]

खसरे के लक्षणों और बचाव के चार्ट का इन्फोग्राफिक
बांग्लादेश में खसरे का हाहाकार, क्या झारखंड में भी मंडरा रहा है बड़ा खतरा? 2

अंतिम हथियार: दो डोज टीका और 97% सुरक्षा की गारंटी

चिकित्सकों के मुताबिक, इस जानलेवा बीमारी का एकमात्र और सबसे अचूक इलाज सिर्फ और सिर्फ टीकाकरण है। एमएमआर (MMR) या एमआर (MR) का टीका बच्चों को ट्रिपल सुरक्षा प्रदान करता है।

डोजसही उम्रप्रभावशीलता
पहली डोज12 से 15 महीने की उम्र में
दूसरी डोज4 से 6 साल की उम्र में97% तक सुरक्षित

डॉ. शरद कुमार की अपील:

“अगर किसी बड़े या बच्चे को बचपन में यह टीका नहीं लगा है, तो वे अभी भी 28 दिनों के अंतराल पर इसकी दो डोज ले सकते हैं। लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत आइसोलेट करें और नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करें।”

निष्कर्ष और आगे की राह (What Next?)

बांग्लादेश का संकट भारत के सीमावर्ती राज्यों के लिए एक कड़ा वेक-अप कॉल है। झारखंड सरकार और संथाल परगना प्रशासन इस समय प्रो-एक्टिव मोड में काम कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग का अगला कदम रेलवे स्टेशनों और ट्रांजिट पॉइंट्स पर थर्मल स्कैनिंग शुरू करना हो सकता है।

आम जनता, विशेषकर माता-पिता की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अफवाहों से दूर रहकर अपने बच्चों का टीकाकरण शेड्यूल पूरा करें। इस लड़ाई में जागरूकता ही सबसे बड़ा ढाल है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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