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VB-G RAM G Yojana Jharkhand: 1 जुलाई से बड़ा बदलाव, मजदूरों को चौंकाने वाला फायदा!

झारखंड के ग्रामीण इलाकों में सालों से रोजगार का सबसे बड़ा सहारा रही मनरेगा (MGNREGA) योजना अब इतिहास बनने जा रही है। केंद्र सरकार ने इसकी जगह एक बेहद आधुनिक और मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया है, जिसे VB-G RAM G Yojana Jharkhand (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण) के रूप में पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है। 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होने वाला यह नया कानून झारखंड के उन लाखों परिवारों की जिंदगी बदलने की क्षमता रखता है, जो हर साल काम की तलाश में पलायन करने को मजबूर होते हैं।

इस ग्राउंड ब्रेकिंग कानून के आने से न केवल काम के दिन बढ़ेंगे, बल्कि सीधे बैंक खातों में आने वाली मजदूरी के तरीके में भी क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा। ‘लोकल खबर’ की टीम ने झारखंड के विभिन्न जिलों के ग्रामीण इलाकों का दौरा किया और यह समझने की कोशिश की कि इस नए कानून का जमीन पर क्या और कितना असर होने वाला है। आइए, इस पूरी व्यवस्था को बेहद आसान शब्दों में बारीकी से समझते हैं।

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VB-G RAM G Yojana Jharkhand क्या है?

केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने और रोजगार की पक्की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G एक्ट, 2025 को पारित किया है। झारखंड में इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह केवल एक नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे पूरा कानूनी ढांचा बदल दिया गया है।

पहले की मनरेगा योजना में कई तरह की कमियां थीं, जैसे कि पैसों के भुगतान में महीनों की देरी होना, कच्चे कामों के नाम पर भ्रष्टाचार और सिर्फ गड्ढे खोदने तक सीमित रह जाना। नए कानून VB-G RAM G Yojana Jharkhand के तहत इन सभी लूपहोल्स को बंद कर दिया गया है। अब इसे ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ सीधे जोड़ दिया गया है, ताकि मजदूर सिर्फ दिहाड़ी न कमाएं, बल्कि उनके काम से गांव में पक्की संपत्तियों का निर्माण भी हो सके।

मनरेगा बनाम VB-G RAM G: क्या बदला?

जब हम पुराने कानून और नए कानून की तुलना करते हैं, तो जमीन-आसमान का अंतर नजर आता है। पुराने कानून में जहां सरकार का ध्यान केवल किसी तरह 100 दिन का काम देने पर रहता था, वहीं इस नए मिशन में मजदूरों की आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ उनके कौशल (Skill) विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।

नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि पुरानी मनरेगा और नई योजना में क्या मुख्य अंतर हैं:

मुख्य बिंदुपुरानी मनरेगा (MGNREGA)नई VB-G RAM G योजना
सालाना गारंटीड कामअधिकतम 100 दिनअब पूरे 125 दिन
भुगतान की समयसीमा15 दिन या उससे अधिक (अक्सर महीनों की देरी)साप्ताहिक भुगतान (अधिकतम 7 से 15 दिन)
लेट पेमेंट मुआवजानियमों में था, पर जमीन पर मिलना मुश्किल था0.05% प्रतिदिन का अनिवार्य मुआवजा
काम का प्रकारमुख्य रूप से कच्चे काम (मिट्टी काटना आदि)4 वर्टिकल्स (पक्के और टिकाऊ निर्माण)
महिला सुरक्षा/सुविधाकेवल बुनियादी छाया और पानी की व्यवस्था5 से अधिक बच्चों पर आया/क्रैच की कानूनी गारंटी
खेती के लिए विशेष प्रावधानकोई निश्चित ब्रेक नहीं था60 दिनों का नो-वर्क पीरियड (खेती के लिए)

झारखंड के मजदूरों को अब मिलेंगे 125 दिन काम

झारखंड जैसे आदिवासी बहुल और पिछड़े राज्य के लिए सबसे राहत की बात यह है कि अब VB-G RAM G Yojana Jharkhand के तहत रोजगार के दिनों को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। पुराने कानून में मिलने वाले 100 दिन अक्सर परिवारों के लिए नाकाफी साबित होते थे, जिसके बाद उन्हें काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।

महत्वपूर्ण नोट: साल में मिलने वाले यह अतिरिक्त 25 दिन सीधे तौर पर हर परिवार की जेब में कम से कम 7,000 से 8,000 रुपये की अतिरिक्त सालाना आय डालेंगे। झारखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय और ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सभी 24 जिलों में इसे समान रूप से लागू किया जाएगा।

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मजदूरी भुगतान के कड़े नियम और साप्ताहिक पेमेंट

झारखंड के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा को लेकर सबसे बड़ी शिकायत हमेशा से यह रही है कि काम करने के बाद भी महीनों तक पैसे नहीं मिलते थे। गुमला, लातेहार और पलामू जैसे जिलों से अक्सर ऐसी खबरें आती थीं जहां मजदूरों का पैसा छह-छह महीने तक अटका रहता था।

VB-G RAM G Yojana Jharkhand ने इस दर्द को हमेशा के लिए खत्म करने का दावा किया है। नए कानून के सख्त नियम इस प्रकार हैं:

  1. 7 दिनों में भुगतान: मजदूर ने हफ्ते भर में जितना भी काम किया है, उसका मास्टर रोल बंद होने के ठीक 7 दिनों के भीतर पैसा सीधे उसके बैंक खाते में ट्रांसफर (DBT) कर दिया जाएगा।
  2. आधार लिंक्ड कंपलसरी: पैसे की हेराफेरी रोकने के लिए शत-प्रतिशत भुगतान आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS) के जरिए ही होगा, जिससे बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
  3. पारदर्शिता: हर मजदूर के मोबाइल पर काम के दिन और भेजे गए पैसों का अलर्ट तुरंत एसएमएस (SMS) के जरिए आएगा।

देरी होने पर मुआवजा और बेरोजगारी भत्ते का नया सच

अगर सरकार या स्थानीय प्रशासन तय समयसीमा के भीतर मजदूरों को उनका हक देने में नाकाम रहता है, तो नए कानून में अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है।

  • देरी का हर्जाना: यदि काम पूरा होने के 15 दिनों के बाद भी मजदूर के खाते में पैसा नहीं पहुंचता है, तो प्रशासन को 0.05% प्रतिदिन की दर से अतिरिक्त मुआवजा देना होगा। यह राशि सीधे तौर पर दोषी अधिकारी या एजेंसी के बजट से काटी जाएगी।
  • बेरोजगारी भत्ता: यदि कोई कार्ड धारक मजदूर काम की मांग करता है और उसे 15 दिनों के भीतर काम नहीं दिया जाता, तो वह बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। पहले 30 दिनों के लिए यह भत्ता सामान्य मजदूरी दर का 25% होगा, और उसके बाद भी काम न मिलने पर यह बढ़कर 50% हो जाएगा। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि सरकार हर हाल में ग्रामीण युवाओं को काम देने के लिए तत्पर रहे।

खेती के सीजन में 60 दिनों की छुट्टी का गणित

झारखंड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मानसून आधारित कृषि पर टिकी है। यहाँ का मजदूर सिर्फ मजदूर नहीं है, बल्कि वह छोटा या सीमांत किसान भी है। खरीफ के सीजन में (धान की बुआई और कटाई के समय) अक्सर गांवों में मजदूरों की भारी कमी हो जाती थी क्योंकि लोग अपने खेतों में व्यस्त रहते थे।

इस व्यावहारिक समस्या को समझते हुए VB-G RAM G Yojana Jharkhand के तहत साल भर में 60 दिनों का ‘नो-वर्क पीरियड’ यानी काम बंदी की अवधि तय की गई है।

  • यह 60 दिन मुख्य रूप से मानसून की शुरुआत (धान रोपनी) और नवंबर-दिसंबर (धान कटनी) के समय लागू किए जाएंगे।
  • इसका फायदा यह होगा कि मजदूर बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी खुद की खेती कर सकेंगे।
  • बाकी बचे 305 दिनों में से उन्हें आसानी से अपने हिस्से के 125 दिनों का रोजगार मिल जाएगा। इससे राज्य के कृषि उत्पादन पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

झारखंड में पलायन पर कैसे लगेगी लगाम?

झारखंड के लिए ‘पलायन’ एक ऐसा नासूर है जो हर साल हजारों परिवारों को बिखरने पर मजबूर करता है। रोजगार की कमी के चलते संताल परगना और छोटानागपुर के इलाकों से बड़े पैमाने पर आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग लेह-लद्दाख, ईंट-भट्टों या महानगरों की ओर पलायन करते हैं, जहाँ अक्सर उनका शोषण होता है।

VB-G RAM G Yojana Jharkhand इस पलायन को रोकने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। जब गांवों में ही 125 दिनों का पक्का रोजगार मिलेगा और समय पर पैसे की गारंटी होगी, तो कोई भी अपना घर-बार छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहेगा। इसके अलावा, नए कानून में केवल मिट्टी काटने जैसे अस्थायी काम नहीं होंगे, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाले 4 मुख्य वर्टिकल्स पर काम होगा:

  1. जल सुरक्षा: तालाबों का जीर्णोद्धार, नए चेकडैम और जल संरक्षण की संरचनाएं।
  2. ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर: पक्की ग्रामीण सड़कें, सामुदायिक भवन और शेड का निर्माण।
  3. आजीविका इंफ्रास्ट्रक्चर: मुर्गी पालन शेड, बकरी शेड और दुधारू पशुओं के लिए पक्के तबेले बनाना।
  4. क्लाइमेट रेजिलिएंट वर्क्स: जलवायु परिवर्तन के खतरों से गांवों को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और पर्यावरण अनुकूल कार्य।

महिला मजदूरों के लिए विशेष सुविधाएं और चाइल्डकेयर

झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पुरुषों से कम नहीं है। राज्य में मनरेगा के तहत काम करने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी हमेशा से सराहनीय रही है। इसे ध्यान में रखते हुए नए कानून में महिला सशक्तिकरण को विशेष तरजीह दी गई है।

कानूनी क्रैच सुविधा: नए नियमों के अनुसार, यदि किसी कार्यस्थल (Worksite) पर 5 या उससे अधिक ऐसे बच्चे मौजूद हैं जिनकी उम्र 5 साल से कम है और उनकी माताएं वहां मजदूरी कर रही हैं, तो वहां प्रशासन को अनिवार्य रूप से एक चाइल्डकेयर वर्कर (आया या क्रैच कार्यकर्ता) की नियुक्ति करनी होगी। इस आया को भी योजना के तहत निर्धारित दैनिक मजदूरी दी जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि माताएं बिना किसी चिंता के अपना काम पूरा कर सकेंगी और बच्चों की देखभाल भी सही तरीके से हो पाएगी।

Women safety under vb-g ram g yojana jharkhand

पुराने जॉब कार्ड का क्या होगा? e-KYC नियम

जैसे ही इस नए कानून की घोषणा हुई, झारखंड के सुदूर गांवों में यह अफवाह फैलने लगी कि पुराने सभी मनरेगा जॉब कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे और लोगों को नए सिरे से दफ्तरों के चक्कर काटने होंगे। ‘लोकल खबर’ अपनी इस विशेष रिपोर्ट के जरिए स्पष्ट करना चाहता है कि ऐसी खबरों पर बिल्कुल ध्यान न दें।

  • रद्द नहीं होंगे पुराने कार्ड: राज्य ग्रामीण विकास विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक, जिन मजदूरों के पास पहले से सक्रिय मनरेगा जॉब कार्ड हैं, वे पूरी तरह मान्य रहेंगे।
  • e-KYC है अनिवार्य: केवल एक ही शर्त है कि आपका जॉब कार्ड e-KYC सत्यापित होना चाहिए। यदि आपका आधार कार्ड और बैंक खाता आपके जॉब कार्ड से लिंक है, तो आपको कोई नया कार्ड तुरंत बनवाने की जरूरत नहीं है।
  • नया ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड: सरकार धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से पुराने कार्डों को बदलकर नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी करेगी, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान आपका काम या भुगतान बिल्कुल नहीं रोका जाएगा।

लोकल खबर एक्सपर्ट एनालिसिस और जमीनी हकीकत

VB-G RAM G Yojana Jharkhand कागजों पर जितनी शानदार और क्रांतिकारी नजर आती है, जमीन पर इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि झारखंड की नौकरशाही और पंचायत प्रतिनिधि इसे कितनी ईमानदारी से लागू करते हैं।

झारखंड में ब्लॉक स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार, बिचौलियों का दखल और फर्जी मस्टर रोल जैसी बीमारियां पुरानी मनरेगा को दीमक की तरह चाटती रही हैं। हालांकि, नए कानून में डिजिटल तकनीक, जीपीएस टैगिंग और अनिवार्य सोशल ऑडिट के जो कड़े प्रावधान किए गए हैं, वे उम्मीद जगाते हैं। साप्ताहिक भुगतान का नियम अगर पूरी तरह लागू हो गया, तो यह राज्य के ग्रामीण बाजारों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को रातों-रात बदल कर रख देगा। ग्रामीण इलाकों में पैसे का रोटेशन बढ़ेगा, जिससे छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापार को भी भारी मुनाफा होगा।

सरकार का यह कदम सराहनीय है, लेकिन राज्य सरकार को ब्लॉक स्तर पर कंप्यूटर ऑपरेटरों, रोजगार सेवकों और कनीय अभियंताओं (Junior Engineers) के खाली पड़े पदों को तुरंत भरना होगा। बिना पर्याप्त स्टाफ के 7 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

संक्षेप में कहें तो, VB-G RAM G Yojana Jharkhand झारखंड के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने का एक ऐतिहासिक मौका है। 125 दिन का काम, समय पर पैसा और काम के साथ-साथ गांवों में पक्के इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण- ये ऐसी चीजें हैं जिनका इंतजार झारखंड की जनता लंबे समय से कर रही थी। अब देखना यह है कि 1 जुलाई 2026 से जब यह कानून जमीन पर उतरेगा, तो प्रशासन जन-आकांक्षाओं पर कितना खरा उतर पाता है। ग्रामीण विकास और रोजगार से जुड़ी ऐसी ही हर छोटी-बड़ी और प्रामाणिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए लोकल खबर (localkhabar.com)

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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