क्या बदल जाएगी ब्रेस्ट कैंसर की जंग? कल्पना सोरेन की मौजूदगी में विशेषज्ञों ने खोला ‘सर्जरी के आगे’ का रास्ता

क्या बदल जाएगी ब्रेस्ट कैंसर की जंग? कल्पना सोरेन की मौजूदगी में विशेषज्ञों ने खोला 'सर्जरी के आगे' का रास्ता

Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों चिकित्सा जगत की सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। शहर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Breast Cancer Today – Surgery & Beyond 2026” ने न केवल देश के शीर्ष सर्जनों और ऑन्कोलॉजिस्ट्स को एक मंच पर लाया, बल्कि एक ऐसी उम्मीद भी जगाई है जो आने वाले समय में कैंसर के इलाज की पूरी दिशा बदल सकती है।

मुख्य अतिथि श्रीमती कल्पना मुर्मू सोरेन ने इस मौके पर एक बेहद भावनात्मक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि कैंसर से जंग सिर्फ अस्पतालों में नहीं, बल्कि घर-घर की जागरूकता से जीती जाएगी। जब देश के 200 से अधिक दिग्गज डॉक्टर एक साथ झारखंड की धरती पर जुटे, तो मकसद सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि उन महिलाओं को बचाना था जो जानकारी के अभाव में अंतिम समय पर अस्पताल पहुंचती हैं।

रिम्स से शुरू हुई क्रांति: शरीर भी बचेगा और कैंसर भी हारेगा

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी हाईलाइट रिम्स (RIMS) के ऑपरेशन थिएटर में हुई लाइव सर्जिकल वर्कशॉप रही। आधुनिक तकनीकों के जरिए डॉक्टरों ने दिखाया कि अब ब्रेस्ट कैंसर का मतलब शरीर के अंगों का खोना नहीं है।

  • ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी (BCS): ऑनकोप्लास्टी के जरिए अब कैंसर भी निकलेगा और शारीरिक संरचना भी सुरक्षित रहेगी।
  • सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी: जटिलताओं को कम करने वाली इस तकनीक का सजीव प्रदर्शन देशभर से आए पीजी छात्रों के लिए किसी मास्टरक्लास से कम नहीं था।
  • ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: रांची के सेलिब्रेशन्स हॉल में हुए सत्रों में डॉ. रोसिना अहमद और डॉ. दिप्तेंद्र सरकार जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञों ने साक्ष्य-आधारित प्रबंधन पर जोर दिया।

“ये सिर्फ बीमारी नहीं, समाज की जिम्मेदारी”: कल्पना सोरेन

सम्मेलन के दौरान कल्पना मुर्मू सोरेन का संबोधन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने आयोजन अध्यक्ष डॉ. नम्रता महंसारिया के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा:

“ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे सामान्य है, लेकिन हमारी चुप्पी इसे घातक बना देती है। महिलाएं अक्सर लक्षणों को नजरअंदाज करती हैं। यह सिर्फ एक स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम उन्हें इस लड़ाई के लिए सशक्त बनाएं।”

"ये सिर्फ बीमारी नहीं, समाज की जिम्मेदारी": कल्पना सोरेन

सर्जरी से आगे की दुनिया: जब सर्वाइवर्स ने सुनाई दास्तां

आयोजन की कमान संभाल रहीं डॉ. नम्रता महंसारिया ने एक बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने बताया कि इलाज केवल गांठ निकालने तक सीमित नहीं है। सम्मेलन का “सर्वाइवरशिप प्रोग्राम” सबसे भावुक क्षण था, जहां कैंसर को मात दे चुकी महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई।

डॉ. नम्रता के अनुसार, “आज के दौर में हमें मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच की जरूरत है। सर्जरी के बाद की देखभाल, मानसिक मजबूती और सामाजिक सहयोग ही एक मरीज को पूरी तरह ठीक करता है।”

सम्मेलन के मुख्य बिंदु और टीम की मेहनत

भूमिकानाम
आयोजन अध्यक्षडॉ. नम्रता महंसारिया
मुख्य संरक्षकडॉ. आर. पी. श्रीवास्तव
मार्गदर्शकप्रो. डॉ. पंकज बोदरा
आयोजन सचिवडॉ. रोहित झा एवं डॉ. सतीश शर्मा
कोषाध्यक्षडॉ. सतवीर सिंह एवं डॉ. कुमार गौरव

झारखंड बनेगा कैंसर केयर का हब!

ASI झारखंड चैप्टर और ABSI के सहयोग से हुए इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड अब केवल मरीजों को भेजने वाला राज्य नहीं, बल्कि इलाज की नई तकनीकें सिखाने वाला राज्य बन रहा है। डॉ. राजेश सिंह (सचिव, एएसआई झारखंड) ने युवा सर्जनों के उत्साह को देखते हुए संकेत दिया कि आने वाले समय में ऐसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रांची में और अधिक विकसित होंगे।

यह सम्मेलन इस बात की तस्दीक है कि कैंसर अब मौत की सजा नहीं है। तकनीक, सही समय पर जांच और कल्पना सोरेन जैसी राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ अगर चिकित्सा जगत हाथ मिला ले, तो ‘सर्जरी के आगे’ की जिंदगी और भी खूबसूरत हो सकती है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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