रांची। अगर आप भी बेड पर लेटे-लेटे घंटों मोबाइल स्क्रॉल करते हैं, तो सावधान हो जाइए। आपकी यह छोटी सी आदत आपको ताउम्र के लिए व्हीलचेयर पर ला सकती है। आज डॉक्टर्स डे के मौके पर देश के जाने-माने ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रजनीश कुमार (लाइफ केयर हॉस्पिटल) ने युवाओं की सेहत को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
डॉ. रजनीश के मुताबिक, आजकल ओपीडी में आने वाले हर 50 में से 20 मरीज सिर्फ गर्दन दर्द और हाथों में झनझनाहट की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें मेजॉरिटी उन यंगस्टर्स की है, जो दिन-रात स्क्रीन से चिपके रहते हैं। गलत पोश्चर में मोबाइल का इस्तेमाल युवाओं की रीढ़ की हड्डी को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है।
‘बीमारी को पोसें नहीं’ – ओपीडी से लाइव ऑनेस्ट टॉक
हॉस्पिटल के ओपीडी चैंबर में मरीजों की भारी भीड़ के बीच डॉ. रजनीश कुमार ने बेहद बेबाकी से बात की। उन्होंने स्थानीय भाषा का जिक्र करते हुए एक बड़ा संदेश दिया।
“हमारे यहां एक शब्द होता है—बीमारी को पोसना यानी पालना। युवाओं और मरीजों से मेरी यही अपील है कि बीमारी को छुपाएं नहीं, उसे पोसें नहीं। जैसे ही लक्षण दिखें, तुरंत डॉक्टर से मिलें। 99% डॉक्टर हमेशा यही चाहते हैं कि उनका मरीज पूरी तरह ठीक होकर हँसते हुए घर लौटे।”
जेंजी (Gen Z) के जोड़ों में दर्द क्यों? लाइफस्टाइल बन रही है विलेन
पहले जो घुटनों और कमर का दर्द 50-60 की उम्र में होता था, वो अब 15 से 20 साल के बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। डॉ. रजनीश बताते हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह हमारा सिटिंग जॉब, जंक फूड और फिजिकल एक्टिविटी का शून्य होना है।
- गलत पोश्चर: सोफे या बेड पर आड़े-तिरछे लेटकर मोबाइल देखना नसों पर भारी दबाव डालता है।
- शॉर्टकट का क्रेज: आज के युवाओं के लिए लुक्स बहुत मैटर करते हैं, जिसके चक्कर में वे बिना ट्रेनर के जिम में ओवरवेट (भारी वजन) उठाने लगते हैं।
- नतीजा: जिम की इस लापरवाही से युवाओं में लिगामेंट इंजरी और रीढ़ की हड्डी में नस दबने के मामले तेजी से बढ़े हैं।
भावुक कर देने वाला किस्सा: “जब वो अपने बच्चे को लेकर मेरे पास आई…”
डॉक्टर्स डे के इस विशेष मौके पर डॉ. रजनीश ने अपने करियर का एक ऐसा अनुभव साझा किया जिसे सुनकर आंखें नम हो जाएं। उन्होंने बताया:
“कुछ साल पहले एक 22-23 साल की बच्ची मेरे पास आई थी। वो पिछले 5-7 सालों से पूरी तरह बेड-रिडन (बिस्तर पर) थी। उसके पिता उसे गोद में उठाकर वॉशरुम ले जाते थे। सबने कह दिया था कि ये कभी ठीक नहीं होगी। हमने रिस्क लिया और उसके दोनों कूलों का ट्रांसप्लांट (Hip Transplant) किया। कुछ दिन पहले जब वो अपनी शादी के बाद, अपने बच्चे को गोद में लेकर मुझसे मिलने आई, तो वो पल मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल था। डॉक्टर-मरीज का यही रिश्ता सबसे पवित्र है।”
आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य क्षेत्र में आई डिजिटल क्रांति
इलाज के महंगे खर्च पर बात करते हुए डॉ. रजनीश ने कहा कि अब देश और राज्य में स्थिति बदल चुकी है। आयुष्मान भारत योजना और झारखंड सरकार की गंभीर बीमारी रोग योजना ने गरीबों को एक नया जीवनदान दिया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब मरीजों को यूएचआईडी (UHID) नंबर मिल रहा है, जिससे उनका पूरा मेडिकल इतिहास एक क्लिक पर सुरक्षित रहता है। अब पैसे की कमी के कारण किसी गरीब का इलाज नहीं रुकता।
डॉ. रजनीश का ‘फिटनेस मंत्रा’ जो आपको रखेगा फ्रेश
24×7 ड्यूटी के बाद भी खुद को फ्रेश रखने का राज खोलते हुए डॉक्टर साहब ने युवाओं को कुछ जरूरी टिप्स दिए:
- अर्ली मॉर्निंग राइजर: सुबह जल्दी उठें और कम से कम 1 घंटा वॉक, जिम या एक्सरसाइज के लिए निकालें।
- प्रोटीन रिच डाइट: खाने में प्रोटीन और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं। तेल-मसाले और चीनी (शुगर) से जितनी दूरी हो सके, बना कर रखें।
- गैजेट्स से दूरी: मोबाइल और लैपटॉप को हमेशा एक सुरक्षित दूरी और सही पोश्चर में ही इस्तेमाल करें।
बदलते दौर में तकनीक और आरामदेह लाइफस्टाइल ने हमें सहूलियत तो दी है, लेकिन इसके बदले में हमारी सेहत छीन ली है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग डिजिटल हेल्थ कार्ड (UHID) के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहे हैं, लेकिन असली जिम्मेदारी हमारी खुद की है। अगली बार जब आप बेड पर लेटकर मोबाइल उठाएं, तो एक बार अपनी रीढ़ की हड्डी का ख्याल जरूर कर लें। बीमारी को पालने से बेहतर है, समय पर उसका इलाज चुनना।











