रांची। बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के भारी दबाव के बीच विद्यार्थियों को डिप्रेशन और तनाव से बचाने के लिए राजधानी रांची में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। हजाम स्थित पारसनाथ पब्लिक स्कूल में कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए विशेष ‘मानसिक स्वास्थ्य और करियर मार्गदर्शन शिविर’ का आयोजन किया गया। कॉस्मोस यूथ क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट की इस पहल का मुख्य मकसद युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और सही करियर चुनना है।
परीक्षा का डर, पढ़ाई में एकाग्रता की कमी और भविष्य की चिंता से जूझ रहे सैकड़ों छात्रों को इस वर्कशॉप में सीधे विशेषज्ञों से समाधान मिला। कार्यक्रम में सी.आई.पी. (CIP) रांची की प्रसिद्ध क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. रेनू गहलोत ने छात्रों से सीधा संवाद किया और सफलता के प्रैक्टिकल टिप्स दिए।
सीआईपी विशेषज्ञ के गुरुमंत्र: तनाव को बनाएं ताकत
आयोजन के दौरान आर.सी.आई. रजिस्टर्ड क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. रेनू गहलोत ने छात्रों के मन से परीक्षा का डर निकालने के लिए सीधे बातचीत की।
“मानसिक संतुलन और समय प्रबंधन ही किसी भी परीक्षा में सफलता की असली कुंजी हैं। तनाव लेना कोई समाधान नहीं है, बल्कि नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच से किसी भी मुश्किल लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।” — डॉ. रेनू गहलोत, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक
डॉ. गहलोत ने छात्रों को बताया कि कैसे एकाग्रता बढ़ाएं, ओवरथिंकिंग से बचें और पढ़ाई के साथ-साथ अपने आत्मविश्वास को रीचार्ज रखें।
बच्चों के भविष्य के लिए आगे आया ट्रस्ट, जारी रहेंगे ऐसे शिविर
केवल किताबी ज्ञान ही काफी नहीं है, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास (Overall Development) बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ कॉस्मोस यूथ क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट लगातार ज़मीनी स्तर पर काम कर रहा है।
ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने बताया कि आने वाले दिनों में रांची और आसपास के ग्रामीण इलाकों के अन्य स्कूलों में भी ऐसे काउंसलिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे, ताकि कोई भी छात्र मार्गदर्शन के अभाव में पीछे न छूटे।
क्या बोले छात्र और शिक्षक?
शिविर के बाद 12वीं के छात्रों के चेहरे पर एक अलग राहत और आत्मविश्वास नजर आया। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान छात्रों ने बताया कि परीक्षा के दौरान टाइम मैनेजमेंट और फोकस कैसे बनाए रखना है, यह समझना उनके लिए बेहद आसान हो गया। अभिभावकों और शिक्षकों ने भी इस जनहितकारी कदम की जमकर सराहना की है।
अब आगे क्या? (What Next)
आज के डिजिटल युग में जहाँ सोशल मीडिया और प्रतिस्पर्धा का दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, ऐसे समय में हर स्कूल प्रशासन को इस तरह के काउंसलिंग सेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। प्रशासन और सामाजिक संगठनों के ऐसे साझा प्रयास ही नई पीढ़ी को डिप्रेशन मुक्त और आत्मनिर्भर भविष्य दे सकते हैं।









