रांची। राजधानी रांची का प्रतिष्ठित राज अस्पताल इस वक्त एक बड़े विवाद के केंद्र में है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीज राजू कुमार रंजन के इलाज को लेकर परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच ठन गई है। जहां एक तरफ परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह निराधार बताया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कल, 4 जुलाई 2026 को एक सरकारी जांच टीम ने अस्पताल का दौरा किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब प्रशासन की एंट्री हो चुकी है, जिससे पूरे राज्य के चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। आइए जानते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी क्या है।
जिंदगी और मौत की जंग: क्या है मरीज की असल मेडिकल कंडीशन?
ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के मुताबिक, मरीज राजू कुमार रंजन को 24 मई 2026 को एक भीषण सड़क दुर्घटना के बाद अत्यंत नाजुक हालत में राज अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, मरीज ‘पॉलीट्रामा’ (एक साथ कई जानलेवा चोटें) का शिकार था।
अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“मरीज के सिर में गंभीर चोट थी और मस्तिष्क के भीतर भारी रक्तस्राव (SDH, IVH) हो रहा था। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर और दोनों फेफड़े बुरी तरह डैमेज थे। हमने तुरंत न्यूरोसर्जन और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम को काम पर लगाया।”
पैर काटने की नौबत और परिजनों का इनकार
इलाज के दौरान मरीज के बाएं पैर में खून का दौरा बंद हो गया (Vascular Compromise) और संक्रमण तेजी से फैलने लगा। डॉक्टरों का दावा है कि मरीज की जान बचाने के लिए पिछले 4 दिनों से पैर काटने (Amputation) की सलाह दी जा रही थी, लेकिन परिजनों ने इसके लिए लिखित सहमति देने से साफ मना कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने इस इनकार को अपने आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया है।
परिजनों का हंगामा vs अस्पताल की दलील: डॉक्टरों का घेराव
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब मरीज के परिजनों और समर्थकों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ओपीडी और आईसीयू के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस हंगामे के कारण कई घंटों तक अस्पताल की सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष: राज अस्पताल प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि परिजनों द्वारा ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का घेराव किया गया। इससे न केवल इलाज में व्यवधान आया, बल्कि अस्पताल में भर्ती अन्य गंभीर मरीजों की जान पर भी संकट बन आया। प्रशासन के बार-बार अनुरोध के बावजूद हंगामा शांत नहीं हुआ, लेकिन इसके बाद भी डॉक्टरों ने मरीज राजू रंजन के इलाज में कोई कोताही नहीं बरती।
सरकारी जांच टीम की एंट्री: ‘व्हाट नेक्स्ट’ और आगे की कार्रवाई
शनिवार, 4 जुलाई को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष सरकारी टीम राज अस्पताल पहुंची। जांच टीम ने मरीज के इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज, आईसीयू चार्ट्स और सर्जरी की सिफारिशों से जुड़ी फाइलों को अपने कब्जे में ले लिया है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने जांच टीम को पूरा सहयोग किया है और सभी तथ्य व रिकॉर्ड्स उनके सामने प्रस्तुत कर दिए हैं। अब हर किसी की नजरें सरकारी जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
सिस्टम की तैयारी और अगला कदम: इस घटना ने एक बार फिर डॉक्टर-मरीज के बीच के भरोसे और इमरजेंसी मेडिकल कंसेंट (सहमति) के कानूनी पहलुओं पर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस बात की पुष्टि करेगा कि क्या इलाज में वाकई कोई तकनीकी चूक हुई थी या फिर परिजनों का आक्रोश केवल पैनिक रिएक्शन था। फिलहाल, मरीज की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।











