Ranchi | महाराष्ट्र के बाद झारखंड देश का ऐसा दूसरा राज्य बनने जा रहा है, जो अपने जीएसटी कानून में ऐतिहासिक बदलाव करने की तैयारी में है। राज्य सरकार आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में ‘जीएसटी संशोधन विधेयक’ पेश करने जा रही है।
इस नए कदम से राज्य के लाखों कारोबारियों, छोटे निर्यातकों और उद्यमियों को टैक्स की पेचीदगियों से सीधी राहत मिलेगी। आइए जानते हैं कि इस फैसले से ग्राउंड पर कारोबार का माहौल कैसे बदलने वाला है।
मानसून सत्र में आएगा संशोधन विधेयक: सरकार की तैयारी पूरी
केंद्र सरकार ने पिछले बजट सत्र में केंद्रीय जीएसटी अधिनियम में जो महत्वपूर्ण संशोधन किए थे, उन्हें अब झारखंड में लागू किया जा रहा है। दरअसल, जब तक राज्य सरकारें अपने जीएसटी कानून में संशोधन नहीं लातीं, तब तक केंद्रीय बदलाव जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाते।
ग्राउंड रिपोर्ट: पहले सरकार इस बदलाव को लागू करने के लिए अध्यादेश (Ordinance) लाने की योजना बना रही थी। लेकिन विधानसभा का मानसून सत्र अधिसूचित होते ही कैबिनेट ने इसे सीधे सदन से पास कराने का रणनीतिक फैसला लिया। फिलहाल इसका अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
विधेयक के पास होते ही वाणिज्य कर विभाग (Commercial Tax Department) अपने आईटी सिस्टम और जीएसटी पोर्टल को अपडेट करेगा, जिससे व्यापारियों को नए सिस्टम का फायदा बिना किसी रुकावट के तुरंत मिलने लगेगा।
कारोबारियों और निर्यातकों की पांच बड़ी राहतें
1. बिक्री के बाद छूट (Post-Sale Discount) के नियम होंगे आसान
अब सामान बिकने के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट को लेकर कंपनियों और टैक्स अधिकारियों के बीच मुकदमेबाजी खत्म होगी। कंपनियां स्पष्ट नियमों के तहत क्रेडिट नोट जारी कर सकेंगी, जिससे सालों से अटके विवाद खत्म होंगे।
2. अंतरिम रिफंड (Interim Refund) से बढ़ेगी वर्किंग कैपिटल
जब इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) आउटपुट टैक्स दायित्व से ज्यादा होगा, तो व्यापारियों को तुरंत अंतरिम रिफंड मिलेगा। इससे छोटे और मँझोले व्यापारियों का फंसा हुआ पैसा बाजार में वापस आएगा।
3. छोटे निर्यातकों को बड़ा फायदा
निर्यात (Export) पर IGST रिफंड के लिए तय न्यूनतम सीमा हटाई जा रही है। अब छोटे दावों पर भी निर्यातकों को रिफंड मिलेगा, जिससे वैश्विक बाजार में स्थानीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता (Competitiveness) बढ़ेगी।
4. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और पारदर्शी सिस्टम
मुकदमेबाजी कम होने और रिफंड प्रक्रिया तेज होने से राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को नई उड़ान मिलेगी। पारदर्शिता बढ़ने से टैक्स चोरी रुकेगी और सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।
विधानसभा से संशोधन विधेयक पारित होते ही राज्य वाणिज्य कर विभाग अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेगा। इसके साथ ही जीएसटी पोर्टल पर नए बदलाव इंटीग्रेट किए जाएंगे।
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इस कदम से राज्य में नए निवेश के रास्ते खुलेंगे और छोटे कारोबारियों को अपनी कार्यशील पूंजी (Working Capital) के लिए बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।










