ऑपरेशन सिंदूर: पहलगाम हमले का करारा जवाब, पाकिस्तान और POK में 9 आतंकी ठिकाने तबाह

Subhash Shekhar
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भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का करारा बदला लेते हुए एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। मंगलवार रात किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया।

इस जवाबी कार्रवाई को तीनों सेनाओं ने मिलकर अंजाम दिया। एयर स्ट्राइक में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। वायुसेना ने इस ऑपरेशन में मिराज 2000 और सुखोई 30 एमकेआई फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया।

LOC पर भी तनाव, भारतीय सेना सतर्क

सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन में पाकिस्तान में बहावलपुर, सियालकोट और मुरीदके जैसे आतंकी गढ़ों को खासतौर पर निशाना बनाया गया। वहीं POK के कोटली और मुजफ्फराबाद में भी आतंकियों के कैंप तबाह किए गए। भारत ने यह पूरा हमला अपनी ही सीमा से अंजाम दिया।

LOC पर भी तनाव का माहौल है। पाकिस्तानी सेना ने पुंछ-राजौरी के भीमबेर गली क्षेत्र में संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी की। जवाब में भारतीय सेना भी मोर्चे पर डटी हुई है और उचित जवाब दे रही है। सभी वायु रक्षा इकाइयों को सतर्क कर दिया गया है।

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भारतीय खुफिया एजेंसियों को जैसे ही आतंकी ठिकानों की सटीक जानकारी मिली, सेना ने एक साथ तीनों अंगों को अलर्ट कर ऑपरेशन की योजना बनाई। इसमें लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे आधुनिक हथियारों का भी उपयोग किया गया।

रक्षा मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंदूर की पुष्टि की

रक्षा मंत्रालय ने ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए बताया कि पाकिस्तान और POK में मौजूद वे आतंकी ढांचे जो भारत में हमलों की साजिश रच रहे थे, उन्हीं को निशाना बनाया गया। खास बात ये रही कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को टारगेट नहीं किया गया।

यह ऑपरेशन पूरी तरह से आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई का प्रतीक है। इससे यह भी संदेश गया है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाने को तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक की तर्ज पर हुआ है, लेकिन इस बार कार्रवाई ज्यादा व्यापक और योजनाबद्ध रही। सेना ने न केवल ठिकानों को सफलतापूर्वक नष्ट किया बल्कि पाकिस्तान को भी एक स्पष्ट चेतावनी दी।

ऑपरेशन सिंदूर एक बार फिर साबित करता है कि भारत अब सिर्फ सहता नहीं, बल्कि मुंहतोड़ जवाब देने में भी सक्षम और तैयार है।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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