सुदेश महतो और सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी पर कोर्ट की सख्ती

सुदेश महतो और सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी पर कोर्ट की सख्ती

रांची: झारखंड की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। आजसू (AJSU) पार्टी के प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो समेत कई दिग्गज नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। साल 2021 में पिछड़ों के हक के लिए सड़क पर उतरना आजसू नेताओं के लिए कानूनी मुसीबत बन गया है। रांची की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने सुदेश महतो, गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस समेत कई बड़े चेहरों के खिलाफ आरोप (Charges) गठित कर दिए हैं।

यह पूरा मामला 8 सितंबर 2021 का है, जब रांची की सड़कें ‘सामाजिक न्याय’ के नारों से गूंज उठी थीं। 27% ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर निकले हजारों कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई उस तीखी भिड़ंत ने राज्य की राजनीति को हिला कर रख दिया था। अब कोर्ट की इस सख्ती के बाद झारखंड में एक बार फिर आरक्षण की राजनीति गरमाने के आसार हैं।

स्पेशल कोर्ट में क्या हुआ? न्यायिक दंडाधिकारी के सामने पेश हुए दिग्गज

गुरुवार को रांची स्थित न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत में आजसू के शीर्ष नेताओं की पेशी हुई। कोर्ट में सुदेश महतो, चंद्रप्रकाश चौधरी, देवशरण भगत और पूर्व विधायक शिवपूजन मेहता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ विधिवत रूप से आरोप गठित किए।

आजसू के मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कोर्ट परिसर में मीडिया से बात करते हुए इसे ‘दमनकारी कार्रवाई’ बताया। उन्होंने कहा कि “हम पिछड़ों की आवाज उठा रहे थे, लेकिन सरकार ने बदले की भावना से निहत्थे कार्यकर्ताओं पर लाठियां चलवाईं और झूठे मुकदमे दर्ज किए।”

8 सितंबर 2021: मोराबादी से सचिवालय तक का वो ‘खूनी’ संघर्ष

इस मामले की जड़ें 2021 के उस आंदोलन में हैं, जिसने हेमंत सोरेन सरकार की नींद उड़ा दी थी।

  • मकसद: झारखंड में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाना।
  • रणनीति: राज्यभर से 10 लाख ‘स्मरण पत्र’ (हस्ताक्षर अभियान) लेकर कार्यकर्ता रांची पहुंचे थे।
  • हड़कंप: जब सुदेश महतो के नेतृत्व में भीड़ मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर बढ़ी, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया।
  • एफआईआर: लालपुर थाना में कांड संख्या 201/2021 दर्ज किया गया, जिसमें सरकारी काम में बाधा डालने और कोविड गाइडलाइंस के उल्लंघन का आरोप लगाया गया।

पिछड़ों की सियासत और आजसू का दांव

झारखंड में ओबीसी वोट बैंक करीब 50% से अधिक है। आजसू शुरू से ही 27% आरक्षण को अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाती रही है। कोर्ट में आरोप तय होने के बाद, आजसू इसे जनता के बीच ‘कुर्बानी’ के रूप में पेश करने की तैयारी में है।

रांची की गलियों में चर्चा है कि क्या यह कानूनी प्रक्रिया सुदेश महतो को जनता के बीच और सहानुभूति दिलाएगी? जानकारों का मानना है कि चुनाव के करीब आते ही इस केस का ट्रायल तेज होना सियासी पारा बढ़ा सकता है।

प्रशासन और सरकार का अगला कदम

आरोप गठित होने का मतलब है कि अब इस मामले में नियमित ट्रायल शुरू होगा। गवाहों को बुलाया जाएगा और साक्ष्य पेश किए जाएंगे। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इन दिग्गजों की सदस्यता और चुनावी भविष्य पर असर पड़ सकता है। हालांकि, आजसू ने साफ कर दिया है कि वे झुकेंगे नहीं और ‘सामाजिक न्याय’ की यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन और अब अदालत तक लड़ी जाएगी।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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