Ranchi: झारखंड की सीजीएल परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस हाई-प्रोफाइल केस में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) रांची ने अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईडी द्वारा जब्त किए गए मोबाइल डाटा में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है। यानी, जब्त किए गए मोबाइल में मौजूद सभी जानकारी मूल और सुरक्षित पाई गई है।
इस रिपोर्ट ने न केवल इस मामले की गंभीरता को और पुख्ता किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सीजीएल परीक्षा पेपर लीक के आरोपों को नकारा नहीं जा सकता। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी कहानी और एफएसएल रिपोर्ट के महत्व को विस्तार से।
सीजीएल परीक्षा पेपर लीक का बड़ा मामला
सीजीएल परीक्षा झारखंड के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों का सबसे बड़ा जरिया मानी जाती है। हजारों अभ्यर्थी इस परीक्षा की तैयारी में सालों मेहनत करते हैं। लेकिन सितंबर 2024 में हुए सीजीएल पेपर लीक कांड ने न केवल अभ्यर्थियों बल्कि पूरे राज्य को हिला कर रख दिया।
21 सितंबर 2024 की रात से लेकर 22 सितंबर 2024 की सुबह तक कई उम्मीदवारों के मोबाइल पर प्रश्न और उत्तर साझा किए गए। अगले दिन आयोजित हुई सीजीएल परीक्षा में वही प्रश्न पूछे गए, जिससे पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे।
सीआईडी द्वारा नौ मोबाइल फोन की जब्ती
पेपर लीक मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई। सीआईडी ने जांच के दौरान कुल नौ मोबाइल फोन जब्त किए। इन मोबाइल फोनों को आगे की जांच के लिए एफएसएल रांची भेजा गया।
एफएसएल की टीम ने इन मोबाइल्स का गहन परीक्षण किया। यह जांच न केवल तकनीकी स्तर पर हुई, बल्कि डेटा की विश्वसनीयता, ट्रांसमिशन पैटर्न और जीपीएस लोकेशन तक की पुष्टि की गई।
एफएसएल रिपोर्ट में खुलासा – नहीं हुई कोई छेड़छाड़
एफएसएल की विस्तृत रिपोर्ट ने अदालत को यह साफ कर दिया कि जब्त मोबाइल में दर्ज डाटा से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। सभी जानकारी अपने मूल रूप में संरक्षित रही।
इस रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया कि उम्मीदवारों के मोबाइल से मिले संदेश और व्हाट्सएप चैट्स वास्तविक हैं। यानी, सीजीएल परीक्षा पेपर लीक का खेल किसी काल्पनिक या झूठे डेटा पर आधारित नहीं था, बल्कि यह एक सच्चाई थी जिसे तकनीकी जांच ने प्रमाणित किया।
व्हाट्सएप चैट में मिले 70 प्रश्न और उत्तर
एफएसएल रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि एक मोबाइल फोन में 21 सितंबर की रात 11:06 बजे से लेकर परीक्षा शुरू होने तक लगातार मैसेज फॉरवर्ड हुए।
इन मैसेजों में कुल 70 प्रश्नों के उत्तर मौजूद थे। चौंकाने वाली बात यह रही कि अगले दिन आयोजित सीजीएल परीक्षा में यही प्रश्न पूछे गए। इसका मतलब है कि पेपर का लीक होना और अभ्यर्थियों तक पहुंचना पूरी तरह से प्रमाणित हो चुका है।
धनबाद का बीडी कॉलेज इलाका आया रडार पर
जांच में यह भी सामने आया कि ये मैसेज धनबाद स्थित बीडी कॉलेज इलाके से भेजे गए थे। मोबाइल की जीपीएस लोकेशन और चैट हिस्ट्री, दोनों ने इस तथ्य की पुष्टि की।
इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि पेपर लीक की जड़ें यहीं से जुड़ी हुई हैं। सीजीएल परीक्षा पेपर लीक का यह एंगल अब अदालत की कार्यवाही में बेहद अहम साबित हो सकता है।
हाईकोर्ट में पेश हुई एफएसएल रिपोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान यह रिपोर्ट पेश की गई। अदालत को बताया गया कि मोबाइल डेटा असली है और उसमें दर्ज चैट्स और प्रश्नों को फर्जी नहीं कहा जा सकता।
अब अदालत यह तय करेगी कि इस रिपोर्ट के आधार पर सीजीएल परीक्षा पेपर लीक में दोषियों की पहचान कैसे होगी और अभ्यर्थियों पर लगे आरोपों की स्थिति क्या बनेगी।
अगली सुनवाई 16 सितंबर को
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 16 सितंबर 2025 तय की है। इस दिन अदालत यह देखेगी कि एफएसएल की रिपोर्ट के बाद केस किस दिशा में बढ़ेगा।
हजारों अभ्यर्थी इस सुनवाई की ओर टकटकी लगाए हुए हैं, क्योंकि उनके भविष्य का फैसला कहीं न कहीं इस केस के परिणाम पर निर्भर करता है।
अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर
सीजीएल परीक्षा पेपर लीक की वजह से झारखंड के हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। अभ्यर्थियों ने कई बार सरकार और परीक्षा नियामक संस्थाओं से निष्पक्ष जांच और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है।
लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है। इस बीच एफएसएल रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि मोबाइल डाटा असली है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार और परीक्षा नियामक संस्था पर उठे सवाल
इस पूरे कांड ने झारखंड सरकार और परीक्षा नियामक संस्था दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- आखिर पेपर लीक की घटना को पहले क्यों नहीं रोका जा सका?
- सुरक्षा इंतजामों के बावजूद पेपर बाहर कैसे गया?
- जिम्मेदार अफसरों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ये वो प्रश्न हैं जिनका जवाब हर अभ्यर्थी और अभिभावक जानना चाहता है।
एफएसएल रिपोर्ट का महत्व
एफएसएल रिपोर्ट ने इस मामले में टर्निंग प्वाइंट का काम किया है। क्योंकि अब यह साफ है कि सीजीएल परीक्षा पेपर लीक महज अफवाह या आरोप नहीं था, बल्कि यह एक ठोस और सबूतों पर आधारित सच्चाई है।
इस रिपोर्ट के बाद अदालत को अब यह तय करना है कि असली दोषी कौन हैं और उन्हें सजा कैसे दी जाएगी।
सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामला झारखंड की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा धांधली के रूप में सामने आया है। एफएसएल रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि जब्त किए गए मोबाइल में मौजूद डाटा असली और छेड़छाड़ से मुक्त है। अब अदालत की अगली कार्यवाही ही यह तय करेगी कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य का क्या होगा और दोषियों को कैसे सजा मिलेगी।
एफएसएल रिपोर्ट में क्या मुख्य खुलासा हुआ?
एफएसएल रिपोर्ट में साफ किया गया कि जब्त मोबाइल फोनों में दर्ज डाटा से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। सभी जानकारी असली और मूल रूप में सुरक्षित पाई गई।
कितने प्रश्न लीक हुए थे?
एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सएप पर साझा किए गए 70 प्रश्न और उनके उत्तर अगले दिन आयोजित सीजीएल परीक्षा में पूछे गए थे।
अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।









