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कितना गुमराह किया जाएगा इस प्रदेश की जनता को? सिल्ली में अवैध बालू कारोबार पर उठते सवाल

Ranchi: झारखंड में अवैध बालू कारोबार अब एक सामान्य अपराध न रहकर एक सुनियोजित माफियागिरी का रूप ले चुका है। सिल्ली, सोनाहातू, बुंडू और नामकुम जैसे इलाकों में प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक अवैध बालू लेकर निकलते हैं, और इसकी खबरें लगातार प्रभात खबर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर समेत कई बड़े अखबारों में छपती हैं। इसके बावजूद हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर किसी भी बड़े राजनीतिक दल या नेता का ठोस बयान सामने नहीं आया। सवाल यह है कि आखिर प्रदेश की जनता को कब तक गुमराह किया जाएगा और इस लूट पर कब तक चुप्पी साधी जाएगी?

सिल्ली में अवैध बालू कारोबार की हकीकत

सिल्ली विधानसभा क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में अवैध बालू कारोबार का नेटवर्क दिन-ब-दिन और मजबूत होता जा रहा है।

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  • प्रतिदिन 70 से 80 हाईवा ट्रक नदी घाटों से बालू लादकर निकलते हैं।
  • एक ट्रक से 20,000 से 22,000 रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है।
  • महीने भर में यह आंकड़ा 6 करोड़ से अधिक तक पहुंच जाता है।

यह कारोबार न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों को बर्बाद कर रहा है, बल्कि सीधे तौर पर सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल

अखबारों की रिपोर्ट्स साफ इशारा करती हैं कि पुलिस-प्रशासन और बालू माफियाओं के बीच मिलीभगत का खेल चल रहा है।

  • पुलिस नाकों से बालू से लदे ट्रक बिना जांच-पड़ताल के गुजर जाते हैं।
  • शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
  • कई मामलों में अधिकारियों पर दबाव बनाने और जान से मारने तक की धमकियां भी मिल चुकी हैं।

हाल ही में एक घटना में बालू लदे हाईवा से एसडीओ और डीएमओ को कुचलने का प्रयास किया गया। यह घटना बताती है कि किस हद तक माफियाओं का दबदबा है।

पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल

नेताओं की चुप्पी क्यों?

जब बड़े-बड़े अखबार इस मुद्दे पर बार-बार खबरें छाप रहे हैं तो सवाल उठता है कि प्रदेश के नेता और जनप्रतिनिधि क्यों चुप हैं?

  • क्या यह चुप्पी माफियाओं से मिलीभगत का नतीजा है?
  • या फिर नेताओं के चुनावी फंड का बड़ा हिस्सा इसी धंधे से आता है?
  • आखिर क्यों जनता के टैक्स और संसाधनों की लूट पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा?

अखबारों की रिपोर्ट्स का खुलासा

  1. प्रभात खबर – सिल्ली और सोनाहातू में अवैध बालू कारोबार का खुलासा, पुलिस-प्रशासन की लापरवाही उजागर।
  2. दैनिक जागरण – प्रतिदिन 20 लाख की अवैध वसूली का दावा, सीबीआई जांच की मांग।
  3. दैनिक भास्कर – 60 किमी की दूरी में 5 हजार का बालू 45 हजार तक बिकने का खुलासा।

इन रिपोर्ट्स से साफ है कि बालू माफिया, दलाल, पुलिस और नेताओं के बीच कमीशन का खेल चलता है।

अवैध बालू कारोबार से नुकसान

1. पर्यावरणीय क्षति

  • नदियों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।
  • जलस्तर नीचे गिर रहा है।
  • ग्रामीण इलाकों में खेती प्रभावित हो रही है।

2. आर्थिक हानि

  • सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान।
  • जनता को महंगे दामों पर बालू खरीदना पड़ता है।

3. सामाजिक असर

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार का वादा कर माफिया उनका इस्तेमाल करते हैं।
  • विरोध करने वालों को धमकियां दी जाती हैं।

कमीशन का खेल – कौन कितना लेता है?

अखबारों की पड़ताल में सामने आया कि एक ट्रक पर औसतन ₹45,000 तक का कमीशन बंटता है।

  • घाट पर एजेंटों का चार्ज – ₹5,000
  • ट्रक का डीजल – ₹8,000
  • राजनेताओं और थाने स्तर तक पहुंच – ₹15,000
  • पुलिस चौकियों पर रिश्वत – ₹3,000
  • बालू माफियाओं का हिस्सा – ₹10,000
  • अन्य खर्चे – ₹4,000

यानी माफियाओं का यह धंधा संगठित अपराध की तरह चलता है।

कमीशन का खेल – कौन कितना लेता है?

जनता की गुमराही

प्रदेश की जनता को यह भरोसा दिलाया जाता है कि सरकार सख्त है और अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि जनता को गुमराह किया जा रहा है

  • अखबार लगातार सच्चाई उजागर कर रहे हैं।
  • लोग खुलेआम सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं।
  • फिर भी कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है।

निष्कर्ष

सिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अवैध बालू कारोबार केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की शासन व्यवस्था, राजनीति और प्रशासन की सांठगांठ का आईना है। जब तक नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत खत्म नहीं होगी, तब तक यह कारोबार चलता रहेगा और जनता को गुमराह किया जाता रहेगा।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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