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Waqf Amendment Bill: वक्फ पैनल ने NDA सदस्यों के 14 संशोधनों को मंजूरी दी, विपक्ष के 44 संशोधन खारिज

Waqf Amendment Bill: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति ने सोमवार को NDA सदस्यों द्वारा प्रस्तावित 14 संशोधनों को मंजूरी दी और विपक्ष के 44 संशोधनों को खारिज कर दिया। यह कदम विधेयक को और प्रभावी बनाने और गरीब तथा पसमान्दा मुसलमानों के लिए लाभकारी साबित करने की दिशा में उठाया गया है।

विधेयक के संशोधनों की प्रक्रिया पर समिति की चर्चा

समिति की अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि सभी संशोधनों पर लोकतांत्रिक तरीके से विचार किया गया। उन्होंने बताया, “हमने प्रत्येक संशोधन को पढ़ा और मतदान के आधार पर निर्णय लिया। NDA के 16 सदस्यों के समर्थन के चलते विपक्ष के केवल 10 सदस्यों द्वारा समर्थित संशोधनों को खारिज कर दिया गया।”

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समिति में NDA और विपक्ष के सदस्यों का प्रतिनिधित्व

  • वक्फ पैनल में कुल 31 सदस्य हैं।
    • NDA: 16 सदस्य (12 सदस्य बीजेपी से)
    • विपक्ष: 13 सदस्य
    • YSR कांग्रेस पार्टी से 1 सदस्य
    • 1 नामांकित सदस्य

स्वीकृत संशोधन और उनके प्रभाव

1. राज्य सरकार को अधिकार देना

पहले वक्फ संपत्तियों के विवादों के मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार कलेक्टर को दिया गया था। अब संशोधन के अनुसार यह अधिकार राज्य सरकार द्वारा नियुक्त आयुक्त या सचिव को दिया जाएगा।

2. वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव

नए प्रस्ताव के तहत वक्फ बोर्ड में अब तीन सदस्य होंगे, जिनमें एक इस्लामी विद्वान भी शामिल होगा। यह कदम बोर्ड के निर्णयों को अधिक विविधतापूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।

3. पोर्टल पर संपत्ति प्रविष्टियों की समयसीमा में विस्तार

पहले वक्फ संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया था। अब इस समय सीमा को बढ़ाया गया है, जिससे संबंधित पक्षों को अधिक समय मिलेगा।

विपक्ष के खारिज किए गए संशोधन

44 संशोधन खारिज क्यों हुए?

विपक्ष ने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों और गैर-मुस्लिम सीईओ को शामिल करने जैसे प्रस्तावों का विरोध किया। साथ ही, वक्फ संपत्तियों के मामलों में कलेक्टर के अधिकार को लेकर भी आपत्ति जताई गई। हालांकि, इन प्रस्तावों को बहुमत के आधार पर खारिज कर दिया गया।

प्रमुख बिंदु जहां असहमति रही

  • वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना।
  • वक्फ संपत्तियों की जांच और निर्णय लेने का अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल के बजाय कलेक्टर को देना।

विधेयक का उद्देश्य और प्रभाव

गरीब और पसमान्दा मुसलमानों को लाभ

यह विधेयक गरीब और पसमान्दा मुसलमानों को लक्षित कर उनके उत्थान के लिए वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और विवादों के समाधान को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है।

विधेयक के प्रावधान

  • वक्फ संपत्तियों के विवादों में सरकारी भूमि की पहचान के लिए कलेक्टर की भूमिका।
  • वक्फ बोर्डों में विविधता लाने के लिए गैर-मुस्लिम सदस्यों का समावेश।
  • संपत्तियों की जानकारी को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल का उपयोग।

विपक्ष के आरोप और तर्क

विपक्ष का कहना है कि विधेयक पक्षपातपूर्ण है

विपक्ष ने विधेयक को पक्षपातपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।

वक्फ ट्रिब्यूनल की भूमिका घटाने पर आपत्ति

विपक्ष ने वक्फ ट्रिब्यूनल की जगह कलेक्टर को विवाद निपटान का अधिकार दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।

समिति की अध्यक्ष का बयान

जगदम्बिका पाल ने इस पर जोर दिया कि विधेयक का उद्देश्य विधिसम्मत और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लेना है। उन्होंने कहा, “हमने सभी संशोधनों को पढ़ा और मतदान के आधार पर पारित या खारिज किया। विपक्ष को अपने तर्क प्रस्तुत करने का पूरा मौका दिया गया।”

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर उठाए गए कदम भारतीय राजनीति और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। NDA द्वारा पारित 14 संशोधन विधेयक को मजबूत बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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