Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रथम चरण के मतदान से ठीक 5 दिन पहले पूर्व मेदिनीपुर में हड़कंप मच गया है। रविवार दोपहर पुलिस की नाका चेकिंग के दौरान दो अलग-अलग वाहनों से 1 करोड़ 27 लाख रुपये की भारी नकदी जब्त की गई है। 23 अप्रैल को होने वाली वोटिंग से पहले इतनी बड़ी रकम की बरामदगी ने राज्य की चुनावी शुचिता और प्रशासन की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह पैसा वोटरों को लुभाने के लिए था या इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश है?
दो गाड़ियां और नोटों के बंडल: कैसे पकड़ी गई खेप?
रविवार को जब पूर्व मेदिनीपुर जिले की सीमाओं पर पुलिस सघन तलाशी अभियान (नाका चेकिंग) चला रही थी, तभी दो संदिग्ध वाहनों को रोका गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक:
- पहली कार: एक निजी कार की तलाशी के दौरान पुलिस की आंखें फटी रह गईं, जब वहां से 1 करोड़ रुपये के नोट बरामद हुए।
- दूसरी बस: एक यात्री बस को रोकने पर तलाशी के दौरान 23 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी मिली।
अचानक हुई इस जब्ती के बाद इलाके में तनाव फैल गया और पुलिस ने तुरंत आयकर विभाग और चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वाड (FST) को सूचित किया।
बैंक का कनेक्शन या चुनावी साजिश?
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में कार से बरामद 1 करोड़ रुपये की राशि को तमलुक घाटाल कोऑपरेटिव बैंक से संबंधित बताया गया है। हालांकि, पुलिस इस दावे को आसानी से स्वीकार नहीं कर रही है।
जांच के घेरे में ‘बैंक ट्रांजेक्शन’ का दावा
- दस्तावेजों की कमी: क्या यह बैंक की आधिकारिक राशि है? अगर हाँ, तो क्या बैंक के पास इसे ले जाने के लिए ज़रूरी अनुमति पत्र और सुरक्षा प्रोटोकॉल मौजूद थे?
- संदिग्ध समय: चुनाव से महज 100 घंटे पहले इतनी बड़ी राशि का मूवमेंट बैंक की रूटीन प्रक्रिया है या ‘पर्दे के पीछे’ का खेल?
- बस वाली नकदी का रहस्य: बस से बरामद 23 लाख रुपये को लेकर अब तक कोई स्पष्ट दावा सामने नहीं आया है, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है।
मेदिनीपुर में दहशत और चुनावी सरगर्मी
ग्राउंड रिपोर्ट की मानें तो पूर्व मेदिनीपुर हमेशा से ही बंगाल की राजनीति का ‘पावर सेंटर’ रहा है। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने पहले ही राज्य में सैकड़ों करोड़ की अवैध शराब और ड्रग्स जब्त की है। लेकिन नकदी की यह ताज़ा जब्ती सीधे तौर पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) के उल्लंघन की ओर इशारा कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल अंतिम समय में “वोट मैनेजमेंट” के लिए किया जाना था। प्रशासन अब इस बात की कड़ियों को जोड़ रहा है कि क्या इन पैसों का संबंध किसी विशेष राजनीतिक दल से है।
चुनाव आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
चुनाव आयोग की स्टैटिक सर्विलांस टीम (SST) ने साफ कर दिया है कि 50,000 रुपये से अधिक की किसी भी नकदी ले जाने पर ठोस सबूत देने होंगे। बिना पुख्ता कागजात के बरामद हुई इस 1.27 करोड़ की राशि को फिलहाल जब्त कर सुरक्षित रख लिया गया है।
क्या होगी अगली कार्रवाई?
- पुलिस बैंक अधिकारियों से पूछताछ कर रही है।
- वाहनों के ड्राइवरों और सवारों के फोन कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाले जा रहे हैं।
- यदि सबूत नहीं मिले, तो इसे ‘चुनावी भ्रष्टाचार’ मानकर बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
क्या निष्पक्ष होगा 23 अप्रैल का मतदान?
बंगाल चुनाव में ‘कैश फॉर वोट’ का मुद्दा पुराना है, लेकिन 2026 के इस महामुकाबले में प्रशासन की सख्ती ने खेल बिगाड़ दिया है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ हिमशैल का सिरा (Tip of the iceberg) है? क्या बंगाल की सड़कों पर अभी और भी ऐसी ‘मनी वैन’ दौड़ रही हैं? अगले 48 घंटे बंगाल की राजनीति और जांच एजेंसियों के लिए निर्णायक होने वाले हैं।











