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यह खबर कहाँ की हैपश्चिम बंगाल

बंगाल में अब परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा! अमित शाह का दोटूक एलान— घुसपैठियों की पहचान शुरू, क्या अब खत्म होगा सिंडिकेट राज?

कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए ‘महापरिवर्तन’ के बाद दिल्ली से कोलकाता तक हलचल तेज है। शुक्रवार को कोलकाता के शक्ति केंद्र में भाजपा विधायक दल को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया कि अब बंगाल में पुरानी व्यवस्था की ईंट से ईंट बजने वाली है। शाह ने दोटूक कहा, “बंगाल की सीमाओं पर अब परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा, घुसपैठ और सिंडिकेट राज के दिन अब इतिहास बन चुके हैं।”

यह केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि आने वाले दिनों के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ है। शाह ने घोषणा की कि भाजपा सरकार के शपथ लेते ही सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और मवेशियों की तस्करी को पूरी तरह ‘नामुमकिन’ बना दिया जाएगा।

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श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना और 75 साल का इंतज़ार

अमित शाह ने इस जीत को भावनात्मक मोड़ देते हुए कहा कि यह केवल सत्ता का हस्तांतरण नहीं है। उन्होंने इसे 1950 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा शुरू की गई वैचारिक यात्रा की ‘ऐतिहासिक परिणति’ बताया। शाह के मुताबिक, जो लड़ाई जनसंघ के दौर से शुरू हुई थी, आज बंगाल की जनता ने उस पर मुहर लगाकर मुखर्जी के ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को संजीवनी दी है।

“इसे ध्रुवीकरण न कहें, यह नेशनल सिक्योरिटी है”

घुसपैठ के मुद्दे पर गृह मंत्री का रुख बेहद कड़ा रहा। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा:

“जो लोग इसे ध्रुवीकरण का चश्मा पहनकर देख रहे हैं, वे जान लें— यह देश की सुरक्षा का मामला है। नई सरकार हर एक घुसपैठिये की पहचान करेगी और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी। अब न घुसपैठ होगी और न ही गौ-तस्करी।”

ममता राज पर प्रहार: “जब अपराधी ही नेता बन जाएं…”

निवर्तमान तृणमूल सरकार की घेराबंदी करते हुए शाह ने बंगाल के पिछले 15 वर्षों को ‘विनाश का काल’ बताया। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासन में प्रशासन का राजनीतिकरण इतना गहरा था कि अपराधी ही खुद नेता बन बैठे थे।

  • सिंडिकेट और कट मनी: शाह ने वादा किया कि शपथ ग्रहण के कुछ ही महीनों के भीतर ‘सिंडिकेट’ और ‘कट मनी’ जैसे शब्द बंगाल के शब्दकोश से मिटा दिए जाएंगे।
  • डबल इंजन की रफ्तार: “गंगोत्री से गंगासागर तक अब एक ही विचार है। मोदी जी की जो योजनाएं अब तक बंगाल की दहलीज पर रोक दी गई थीं, अब वे बुलेट ट्रेन की रफ्तार से घर-घर पहुंचेंगी।”
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संदेशखाली की गूँज और ‘रेखा पात्रा’ का ज़िक्र

भाषण के दौरान शाह ने संदेशखाली की पीड़िता और अब विधायक बनीं रेखा पात्रा जैसी महिला नेतृत्व का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने संकल्प लिया कि अब बंगाल के चुनावों में हिंसा, धांधली या बूथ कैप्चरिंग की खबरें पुरानी बात हो जाएंगी। राहुल गांधी के ईवीएम वाले बयानों पर तंज कसते हुए शाह ने कहा कि हार का डर अब बहानों में बदल चुका है।

क्या फिर लौटेगा बंगाल का गौरव?

अमित शाह ने केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान का भी कार्ड खेला है। उन्होंने वादा किया कि साहित्य, कला और शिक्षा के क्षेत्र में बंगाल को फिर से भारत का सिरमौर बनाया जाएगा।

अब सबकी नजरें इस पर हैं कि नई सरकार के गठन के पहले 100 दिनों में ‘घुसपैठियों की पहचान’ और ‘सिंडिकेट’ पर प्रहार के लिए गृह मंत्रालय क्या विशेष टास्क फोर्स (STF) बनाता है। बंगाल के भविष्य के लिए यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक‘ जैसा मोड़ साबित हो सकता है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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