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सरहुल मिलन समारोह : आदिवासी मूलवासी मंच देगा सांस्कृतिक एकता का संदेश

Ranchi: आदिवासी मूलवासी मंच द्वारा 5 अप्रैल को रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में सरहुल मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया जाएगा। मंच की ओर से शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई।

मंच के अध्यक्ष रंजीत टोप्पो, कार्यकारी अध्यक्ष सूरज टोप्पो और मीडिया प्रभारी डब्लू मुंडा ने संयुक्त रूप से बताया कि बीते पांच वर्षों से यह आयोजन लगातार किया जा रहा है। इस वर्ष का आयोजन भी उतना ही भव्य और सांस्कृतिक विविधता से भरपूर रहेगा।

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झारखंड की मिट्टी से जुड़ेगा सांस्कृतिक संगम

कार्यक्रम में प्रकृति पर्व सरहुल की झलक देखने को मिलेगी, जो झारखंड की परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। नागपुरी लोक गीतों के माध्यम से एक से बढ़कर एक गीतकारों की प्रस्तुति दर्शकों को भावविभोर कर देगी। ढोल, नगाड़ा, मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर जनजातीय नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

इस समारोह की खास बात यह होगी कि भगवान बिरसा मुंडा की वीरता और संघर्ष की गाथा मंच पर जीवंत रूप से प्रस्तुत की जाएगी। इसके ज़रिए युवाओं को प्रेरणा देने और अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा।

सामाजिक और धार्मिक अगुवाओं को भेजा गया है न्योता

समारोह में रांची और आसपास के क्षेत्रों के सभी सामाजिक और धार्मिक नेताओं को आमंत्रित किया गया है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम सामूहिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए बेहद ज़रूरी हैं। हजारों की संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

मंच के महासचिव विक्की करमाली, उपाध्यक्ष अमित मुंडा, अजीत लकड़ा, मिथलेश कुमार, कोषाध्यक्ष मोहन तिर्की, सचिव अंजू तिर्की, नेहा हेमरोम, संगठन सचिव ज्योत्सना केरकेट्टा, सह कोषाध्यक्ष रोहित कुमार और सुरेश मिर्धा भी इस प्रेस वार्ता में मौजूद थे।

परंपरा, संस्कृति और संघर्ष की एक साझा झलक

आदिवासी मूलवासी मंच द्वारा आयोजित यह सरहुल मिलन समारोह न सिर्फ एक पर्व का उत्सव है, बल्कि यह झारखंड की आदिवासी अस्मिता, परंपरा और संघर्ष को सम्मान देने का एक माध्यम भी है। इसके ज़रिए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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समारोह के आयोजन से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि झारखंड की मूल संस्कृति को संरक्षित रखना आज के समय की आवश्यकता है। मंच ने आमजन से भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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