सहारनपुर: खामेनेई मौत पर जुलूस, 150 पर मुकदमा

सहारनपुर में खामेनेई की मौत की खबर से भड़का गुस्सा: बिना इजाजत जुलूस पर 150 पर मुकदमा, अब क्या होगा कानून-व्यवस्था से?

सहारनपुर | ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल हमले में मौत की ताजा खबर ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर को हिला दिया। देर रात शिया समुदाय के सैकड़ों लोगों ने मुख्य बाजार और नाइयों वाली गली से शोक जुलूस निकाला, जिसमें नारेबाजी और काले झंडे लहराए गए। पुलिस ने बिना अनुमति जुलूस रोकने की कोशिश की, लेकिन कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका से थाना इंस्पेक्टर नवीन कुमार सैनी ने 26 नामजद समेत 150 से ज्यादा अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।​

यह घटना बीएनएस 163 लागू जिले में हुई, जहां सख्ती के बावजूद भीड़ बेकाबू हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि खामेनेई को ‘शहीद’ मानकर शोक जताया जा रहा था, लेकिन प्रशासन ने इसे अवैध करार दिया। अब सवाल उठ रहा है- क्या यह जुलूस अंतरराष्ट्रीय तनाव को स्थानीय स्तर पर भड़काएगा?

इस खबर से जुड़ी वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जहां महिलाएं रोती नजर आ रही हैं।​

घटना का पूरा विवरण

सहारनपुर में रविवार देर रात ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। जुलूस शिया मस्जिद से शुरू होकर मुख्य बाजार, नाइयों वाली गली और अन्य रास्तों से गुजरा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। भीड़ ने ‘तकबीर अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाए और काले झंडे लहराए, जो अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्से को दर्शाता है।

थाना इंस्पेक्टर नवीन कुमार सैनी ने ग्राउंड पर मौजूद रहते हुए बताया, “पुलिस ने जुलूस रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन बिना अनुमति के यह कानून-व्यवस्था के लिए खतरा था।” नामजद आरोपियों में असलम, आमिर, बबलू, आरिफ, अफजल, आशू, उमर, तफसील, सलमा, बिलाल, वसी, अकील, रहान सहित 26 लोग शामिल हैं।[query details] पुलिस वीडियो फुटेज से बाकी की पहचान कर रही है।

यह जुलूस उसी रात निकला जब ईरानी मीडिया ने खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि की।

खामेनेई की मौत का बैकग्राउंड

अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के 1989 से सुप्रीम लीडर थे, जिन्हें अमेरिका और इजरायल दुश्मन मानते थे। फरवरी 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल पीएम नेतन्याहू के नेतृत्व में संयुक्त हमले में उनकी मौत हुई। ईरानी स्टेट मीडिया ने इसे ‘शहादत’ बताया, जबकि ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ‘इतिहास का सबसे बुरा व्यक्ति मारा गया’ लिखा।

भारत में कानपुर समेत कई जगहों पर शोक और विरोध हुआ, लेकिन सहारनपुर का जुलूस सबसे बड़ा था। खामेनेई के बेटे-दामाद की भी मौत की खबरें हैं, जो ईरान को अस्थिर कर सकती हैं।

आम आदमी और सहारनपुर पर असर

सहारनपुर में खामेनेई शोक जुलूस, काले झंडे लहराते लोग जमा 

सहारनपुर जैसे संवेदनशील जिले में यह जुलूस तनाव बढ़ा सकता है, खासकर बीएनएस 163 के तहत जहां जुलूसों पर सख्ती है। स्थानीय दुकानदारों को डर है कि दोबारा भीड़ बिक्रम पैदा करेगी, जिससे व्यापार प्रभावित हो। शिया समुदाय में गम की लहर है, जबकि प्रशासन अलर्ट मोड पर है- अतिरिक्त फोर्स तैनात।

देश स्तर पर यह मिडिल ईस्ट तनाव को भारत ला सकता है, मुस्लिम समुदायों में गुस्सा भड़क सकता है। आम आदमी के लिए सवाल- क्या सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से और जुलूस होंगे?

पुलिस की कार्रवाई और बयान

थाना इंस्पेक्टर नवीन कुमार सैनी ने कहा, “कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच पूरी होने पर कार्रवाई होगी।” पुलिस ने जुलूस के दौरान भारी फोर्स लगाई, लेकिन भीड़ को रोक पाना मुश्किल रहा। अब डेढ़ सौ नामजद-अज्ञात पर नजर, गिरफ्तारियां हो सकती हैं।​

आगे क्या होगा?

प्रशासन ने सभी समुदायों से अपील की है कि बिना अनुमति कोई जुलूस न निकालें, वरना सख्त कार्रवाई होगी। ईरान में उत्तराधिकारी की घोषणा से भारत में और प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं। सहारनपुर में सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन सवाल बरकरार- क्या यह शोक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को स्थानीय हंगामे में बदल देगा? पाठक सोचें, क्या ऐसी घटनाएं शांति के लिए खतरा हैं?

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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