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Jharkhand News

झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती: 15 लाख की ‘सेटिंग’ और जेल की सलाखें; रांची पुलिस ने बेनकाब किया फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क

Ranchi: झारखंड में युवाओं के लिए बेरोजगारी एक बड़ी समस्‍या है। ऐसे में कोई उन्‍हें सरकारी नौकरी पाने का सपना देखााए तो वो कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हो जाते हैं। रांची की पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा किया है जो उन्‍हें सपना दिखाता था कि सरकारी नौकरी दिला देंगे। अच्‍छी खासी मोटी सैलरी होगी। यह झूठ वह वह इतने यकीन के साथ बालते की झारखंड के गरीब आदिवासी बेरोजगार युवा चंगुल में फंस जाते थे।

झारखंड उत्‍पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामला झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे कांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। पुलिस के खुलासे में कई चौंकाने वाली सनसनीखेज बातें सामने आये हैं।

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उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े फर्जी पेपर लीक मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए 166 अभ्यर्थियों और गिरोह के सदस्यों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल भेज दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की चयन प्रक्रिया और परीक्षा माफियाओं की पैठ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Quick Analysis: पेपर लीक कांड की मुख्य बातें

विवरणविवरण (Details)
कुल गिरफ्तारी166 अभ्यर्थी + गिरोह के सदस्य
मुख्य अड्डातमाड़ स्थित एक अर्द्धनिर्मित नर्सिंग होम
पैसे की वसूली10 से 15 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी
मास्टरमाइंडगौरव सिंह (जमशेदपुर निवासी ठेकेदार)
प्रमुख सहयोगीचुनचुन (पटना), क्रिस्टोफर (मैनेजमेंट)

नर्सिंग होम बना ‘कंट्रोल रूम’: कैसे रची गई साजिश?

हमारी पड़ताल और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कोई छोटी-मोटी धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सिंडिकेट था। तमाड़ प्रखंड के एक निर्माणाधीन नर्सिंग होम को इस फर्जीवाड़े का केंद्र बनाया गया था।

घटनाक्रम की बारीकियां:

  • दुर्गा सोरेन चौक का जाल: अभ्यर्थियों को पहले रांची के नामकुम स्थित दुर्गा सोरेन चौक पर इकट्ठा किया गया।
  • गुप्त परिवहन: वहां से निजी वाहनों के जरिए उन्हें रात के अंधेरे में तमाड़ पहुँचाया गया ताकि किसी को शक न हो।
  • कड़ी निगरानी: नर्सिंग होम में अभ्यर्थियों के रहने और खाने का पूरा इंतजाम मास्टरमाइंड गौरव सिंह ने किया था, ताकि कोई भी छात्र बाहरी संपर्क में न आ सके।

पटना से जुड़े हैं तार: ‘चुनचुन’ और लीक का दावा

जांच में बिहार कनेक्शन भी उभर कर सामने आया है। पटना निवासी चुनचुन इस गिरोह का वह मोहरा था जो प्रश्नपत्र और उनके उत्तर (Answer Keys) उपलब्ध कराने का दावा करता था। उसने अभ्यर्थियों को यह विश्वास दिलाया था कि उसकी पहुंच सीधे परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी तक है। हालांकि, पुलिस अब इस दावे की सच्चाई और एजेंसी के भीतर किसी ‘विभीषण’ की मौजूदगी की जांच कर रही है।

एक्सपर्ट नोट: “इस तरह के संगठित अपराध में अक्सर ‘NavBoost’ सिग्नल यह बताते हैं कि अभ्यर्थी उन कीवर्ड्स को सर्च कर रहे हैं जो परीक्षा एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े सामाजिक असंतोष को फिलहाल टाल दिया है।”


गिरिडीह के सबसे ज्यादा युवा शामिल

आंकड़ों पर गौर करें तो इस फर्जीवाड़े में झारखंड के 138 और बिहार के 21 अभ्यर्थी शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह है कि झारखंड में भी सबसे अधिक संख्या गिरिडीह जिले के युवकों की है। पुलिस अब इन अभ्यर्थियों के बैंक खातों और पैसे के लेन-देन (Money Trail) की जांच कर रही है।

पुलिस की अगली कार्रवाई

रांची एसएसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में पुलिस की टीमें जमशेदपुर, पटना और झारखंड के अन्य जिलों में छापेमारी कर रही हैं। ठेकेदार गौरव सिंह और गिरोह के अन्य फरार सदस्यों (विनोद, अरविंद, विक्की आदि) की तलाश तेज कर दी गई है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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