वरिष्ठ पत्रकार राणा गौतम का निधन: पत्रकारिता जगत में शोक की लहर

Subhash Shekhar
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रांची के प्रतिष्ठित पत्रकार राणा गौतम का निधन

वरिष्ठ पत्रकार राणा गौतम का 8 जनवरी को निधन हो गया। राजधानी रांची के पत्रकारिता जगत के लिए यह खबर एक गहरी क्षति के रूप में सामने आई है। राणा गौतम पिछले एक साल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज मुंबई के टाटा कैंसर हॉस्पिटल और रांची के स्थानीय अस्पतालों में चल रहा था। उनका अंतिम संस्कार 9 जनवरी को हरमू मुक्तिधाम में किया जाएगा। इससे पहले, उनके पार्थिव शरीर को रांची प्रेस क्लब में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।

तीस वर्षों का समर्पणपूर्ण पत्रकारिता सफर

राणा गौतम का जन्म जून 1971 में रांची में हुआ था। उनके पिता राजेंद्र प्रसाद एक सेवानिवृत्त अपर समाहर्ता हैं। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, राणा गौतम ने 1992 में पत्रकारिता को अपने करियर के रूप में चुना। देशप्राण, आज, रांची एक्सप्रेस, खबरमंत्र, और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में उन्होंने बतौर क्राइम रिपोर्टर काम किया। उनकी रिपोर्टिंग शैली और विषयों पर गहन पकड़ ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई।

2023 में उन्होंने रांची प्रेस क्लब का चुनाव लड़ा और कार्यकारिणी सदस्य के रूप में चुने गए। उनके मृदुल स्वभाव और सटीक लेखनी के कारण वे पत्रकारिता जगत में बेहद लोकप्रिय थे।

पत्रकारिता जगत में शोक की लहर

राणा गौतम के निधन की खबर ने रांची के पत्रकारों और उनके प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके निधन के बाद उनके घर पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लग गया।

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शोक व्यक्त करने पहुंचे प्रमुख पत्रकार

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुरेंद्र लाल सोरेन, सचिव अमरकांत, सह सचिव रतन लाल, पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह, और वरिष्ठ पत्रकार नीरज सिन्हा, आलोक सिन्हा, चंदन भट्टाचार्य, विजय मिश्र, मोनू कुमार, सौरभ शुक्ला, नवनीत नंदन, बॉबी, प्रसेनजीत मुखर्जी, और देव कुमार सहित कई पत्रकार उनके परिवार से मिलने पहुंचे।

उनकी संवेदनशीलता और सहयोगी स्वभाव ने उन्हें हर पत्रकार के दिल के करीब बना दिया था।

राणा गौतम का योगदान और उनकी विरासत

पत्रकारिता के प्रति समर्पण

राणा गौतम ने अपने करियर में न केवल पत्रकारिता के उच्च मानदंड स्थापित किए, बल्कि पत्रकारिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ। उनके लेखन ने कई सामाजिक मुद्दों को उजागर किया और जनता के समक्ष सत्य को प्रस्तुत करने का साहसिक कार्य किया।

क्राइम रिपोर्टिंग में महारत

उन्होंने क्राइम रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता के कारण व्यापक पहचान प्राप्त की। उनकी रिपोर्टिंग ने न केवल अपराधों के पीछे की सच्चाई को उजागर किया, बल्कि समाज में बदलाव लाने का प्रयास भी किया।

राणा गौतम का योगदान और उनकी विरासत

रांची प्रेस क्लब और उनकी भूमिका

राणा गौतम ने रांची प्रेस क्लब के कार्यकारिणी सदस्य के रूप में कई महत्वपूर्ण फैसलों में भाग लिया। उन्होंने पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद की और नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।

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पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत

मृदुल स्वभाव और सरल व्यक्तित्व

राणा गौतम का मृदुल स्वभाव और सहयोगी व्यक्तित्व उन्हें हर किसी का प्रिय बना देता था। पत्रकारिता में उनके अनुभव और सलाह ने कई नए पत्रकारों को मार्गदर्शन दिया।

निधन के बाद पत्रकारिता जगत की प्रतिक्रियाएं

राणा गौतम के निधन से न केवल पत्रकारिता जगत, बल्कि समाज का हर वह वर्ग स्तब्ध है जो सत्य और न्याय के लिए खड़ा होता है।

रांची प्रेस क्लब ने उन्हें एक श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “राणा गौतम का योगदान अमूल्य है। उनकी कमी हमेशा महसूस होगी।”

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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