रांची के इन अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा या नहीं? DC मंजूनाथ भजन्त्री की सख्ती के बाद अब 10 अस्पतालों की किस्मत का फैसला

Subhash Shekhar
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Ranchi। अगर आप या आपके परिजन आयुष्मान भारत या अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (MASSY) के तहत मुफ्त इलाज की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। रांची के 10 निजी अस्पतालों ने सरकार के साथ जुड़ने की अर्जी तो दी थी, लेकिन उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजन्त्री के कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल ‘नाम’ के अस्पतालों को पैनल में जगह नहीं मिलेगी। 15 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज वाली योजना में अब वही अस्पताल टिक पाएंगे, जो कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देंगे।

सरकारी खजाने से होगा भुगतान, तो इलाज में कोताही क्यों?

उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई ‘जिला सूचीबद्धता समिति’ (District Empanelment Committee) की बैठक में साफ कर दिया गया कि जनता के स्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार और अन्य विशेषज्ञों की मौजूदगी में 10 अस्पतालों के आवेदनों को बारीकी से परखा गया। इनमें से 8 अस्पतालों की स्थिति ऐसी मिली कि DC ने तुरंत उनकी सुविधाओं की दोबारा जांच (Re-inspection) का आदेश दे दिया।

अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना: 15 लाख का सवाल और DC की ‘सख्त’ क्लास

झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ (MASSY) के तहत अब पात्र परिवारों को 15 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल रहा है। चूंकि यह राशि आयुष्मान भारत की 5 लाख की सीमा से तीन गुना ज्यादा है, इसलिए सरकार अस्पतालों के चयन में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।

बैठक के मुख्य बिंदु:

  • सख्त मानक: केवल उन्हीं अस्पतालों को ‘सूचीबद्ध’ (Empanel) किया जाएगा जो चिकित्सा के उच्च मानकों को पूरा करेंगे।
  • स्पेशलिस्ट की कमी पर ‘नो एंट्री’: जिन अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर 24×7 उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें पैनल से बाहर रखा जा सकता है।
  • मरीज-केंद्रित सेवाएं: केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि मरीजों के साथ व्यवहार और सुविधाओं की पारदर्शिता भी देखी जाएगी।

ग्राउंड रिपोर्ट: रांची के अस्पतालों में हड़कंप, आखिर क्यों अटकी 8 अस्पतालों की फाइल?

सूत्रों की मानें तो जिन 8 अस्पतालों के पुन: निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं, उनमें फायर सेफ्टी, बेड स्ट्रेंथ और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट जैसे मुद्दों पर कमियां पाई गई हैं। DC मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट कहा, “राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवा देना हमारी प्राथमिकता है। चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी और मानकों से रत्ती भर भी समझौता नहीं होगा।”

आम आदमी पर क्या होगा असर?

अगर आप रांची के रहने वाले हैं, तो प्रशासन की इस सख्ती का सीधा फायदा आपको मिलेगा। अक्सर देखा गया है कि छोटे अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत पैनल में तो आ जाते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में मरीजों को रेफर कर देते हैं। इस नई छंटनी प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि जब आप 15 लाख वाले कार्ड के साथ अस्पताल पहुंचें, तो आपको वहां आईसीयू (ICU), वेंटिलेटर और विशेषज्ञ डॉक्टर मौके पर मिलें।

आगे क्या? प्रशासन का अगला कदम

आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें उन 8 अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगी जिनकी फाइलें दोबारा जांच के लिए भेजी गई हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि फरवरी के अंत तक रांची में सूचीबद्ध अस्पतालों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो जाए, ताकि ‘अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ का लाभ हर गरीब तक बिना किसी रुकावट के पहुंच सके।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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