बिहार में ‘खेला’ शुरू? नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले पर भड़के मनोज झा, कहा- “ये मुख्यमंत्री की भाषा नहीं, स्क्रिप्ट दिल्ली से आई है”

बिहार में 'खेला' शुरू? नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले पर भड़के मनोज झा, कहा- "ये मुख्यमंत्री की भाषा नहीं, स्क्रिप्ट दिल्ली से आई है"

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक ट्वीट ने राज्य की सियासत में जो आग लगाई थी, उसमें अब विपक्षी दल आरजेडी (RJD) ने ‘घी’ डालने का काम किया है। राज्यसभा जाने की नीतीश कुमार की इच्छा पर आरजेडी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने बेहद तीखा और चौंकाने वाला हमला बोला है। झा ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार का यह ट्वीट उनका अपना नहीं है, बल्कि इसे दिल्ली (बीजेपी हेडक्वार्टर) में बैठकर लिखा गया है।

इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ की चर्चा तेज हो गई है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या नीतीश कुमार पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है?

“ये बचकाना है…” – मनोज झा का सीधा प्रहार

दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए मनोज झा ने नीतीश कुमार के राजनीतिक कद का हवाला देते हुए इस पूरे घटनाक्रम को ‘अजीब’ बताया। उन्होंने कहा कि एक ऐसा नेता जो सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहा हो, वह अचानक ऐसी इच्छा जताए, यह गले नहीं उतरता।

“तमाम बातें अपनी जगह, ये नीतीश कुमार की भाषा नहीं है। विरोध और समर्थन दोनों में हम उनके साथ रहे हैं। ये ट्वीट दिल्ली में लिखा गया है। कितना बचकाना लगता है ये सुनना भी… ये कोई बात हुई? सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि मैं राज्यसभा में जाना चाहता हूं… इसकी गूंज कई वर्षों तक रहेगी।” – मनोज कुमार झा, सांसद, RJD

क्या बिहार में होगा ‘महाराष्ट्र वाला प्रयोग’?

मनोज झा ने अपने बयान में एक बहुत ही गंभीर इशारा किया है। उन्होंने ‘महाराष्ट्र’ का जिक्र करते हुए सत्ता परिवर्तन के तरीकों पर सवाल उठाए। झा ने कहा कि बिहार की धरती पर इस तरह के राजनीतिक प्रयोग (तोड़-फोड़ या दबाव की राजनीति) सफल होंगे, इसमें उन्हें भारी शंका है।

सियासी गलियारों में उठते 3 बड़े सवाल:

  1. दिल्ली का दबाव: क्या बीजेपी ने नीतीश कुमार को केंद्र में भेजने और बिहार में अपना मुख्यमंत्री बिठाने का ‘प्लान’ तैयार कर लिया है?
  2. स्क्रिप्टेड ट्वीट: मनोज झा के दावे के अनुसार, क्या नीतीश कुमार को यह लिखने के लिए मजबूर किया गया है?
  3. आरजेडी का रुख: मनोज झा ने साफ कर दिया है कि आरजेडी इस मुद्दे पर ‘राजनीतिक संघर्ष’ करेगी। यानी आने वाले दिनों में बिहार की सड़कों पर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।

एक्सप्लेनर: क्यों मचा है हड़कंप?

नीतीश कुमार का चारों सदनों (लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधान परिषद) का सदस्य बनने का सपना सुनने में तो व्यक्तिगत लगता है, लेकिन टाइमिंग संदिग्ध है। चुनाव के ठीक पहले या गठबंधन की खींचतान के बीच इस तरह का ‘सेल्फ-एग्जिट’ जैसा बयान विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे रहा है।

आरजेडी अब इस मुद्दे को ‘बिहार के स्वाभिमान’ से जोड़ने की कोशिश कर रही है, यह दिखाकर कि बिहार के फैसले पटना के बजाय दिल्ली से लिए जा रहे हैं।

मनोज झा के इस बयान ने जेडीयू (JDU) को बैकफुट पर धकेल दिया है। अब नजरें नीतीश कुमार की अगली प्रतिक्रिया या जेडीयू के प्रवक्ताओं पर हैं। क्या वे मनोज झा के ‘दिल्ली वाली स्क्रिप्ट’ के आरोप का जवाब देंगे? एक बात साफ है—बिहार की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहाँ से वापसी का रास्ता बहुत कठिन है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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