Patna । बिहार की सियासत ने आज वह कर दिखाया जिसकी कल्पना दशक भर पहले नामुमकिन लगती थी। करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही सूबे में ‘सुशासन बाबू’ के युग का अंत होता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कर इतिहास रच दिया है। सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री होंगे। मंगलवार को पटना में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगा दी गई है। बुधवार को राजभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह होगा, जहाँ सम्राट बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में गोपनीयता की शपथ लेंगे।
ऐतिहासिक फैसला: सम्राट चौधरी के सिर सजेगा बिहार का ताज
बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन “टर्निंग पॉइंट” साबित हुआ है। भाजपा ने नीतीश कुमार की जगह अपने सबसे आक्रामक चेहरे सम्राट चौधरी को कमान सौंपकर यह साफ कर दिया है कि अब वह बिहार में ‘बड़े भाई’ की भूमिका से आगे बढ़कर ‘अकेले दम’ पर राज करने की तैयारी में है।
विजय कुमार सिन्हा ने विधायक दल की बैठक में सम्राट के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। पर्यवेक्षक के तौर पर आए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जैसे ही सम्राट के नाम की घोषणा की, पटना की सड़कों पर जश्न का माहौल बन गया।

क्यों खास है सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना?
- भाजपा का पहला सीएम: जनसंघ के जमाने से लेकर आज तक, भाजपा बिहार में हमेशा बैसाखी या गठबंधन के सहारे रही। यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भाजपा का कोई कार्यकर्ता बैठेगा।
- सोशल इंजीनियरिंग: सम्राट चौधरी ‘लव-कुश’ समीकरण (विशेषकर कोइरी-कुर्मी वोट बैंक) में बड़ी सेंधमारी करने वाले नेता माने जाते हैं। उनका उदय नीतीश के कोर वोट बैंक में भाजपा की सीधी एंट्री है।
- आक्रामक छवि: सम्राट अपनी बेबाक बयानबाजी और नीतीश कुमार के खिलाफ कड़े स्टैंड के लिए जाने जाते रहे हैं।
कैसा होगा नई सरकार का स्वरूप? (Analysis)
बुधवार को होने वाले शपथ ग्रहण में सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू कोटे से दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बार सत्ता के संतुलन को अपने पक्ष में रखते हुए गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय भी अपने पास रख सकती है।
पटना के गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का इस्तीफा केवल एक पद का त्याग नहीं, बल्कि एक युग का अवसान है। कैबिनेट की आखिरी बैठक में नीतीश का भावुक होना और फिर राजभवन जाकर इस्तीफा सौंपना, बिहार की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण की शुरुआत है।
पिछली घटनाओं का लिंक: तीसरी बार नेता चुने गए सम्राट
सम्राट चौधरी का कद भाजपा में कितनी तेजी से बढ़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लगातार तीसरी बार भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए हैं।
- 2024: नीतीश के एनडीए में लौटने पर नेता चुने गए (डिप्टी सीएम बने)।
- 2025: विधानसभा चुनाव जीत के बाद दोबारा कमान मिली।
- 2026 (अब): अंततः उन्हें सूबे की सर्वोच्च कुर्सी यानी मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है।
आगे क्या? जनता पर क्या होगा असर?
सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिहार की चरमराती कानून व्यवस्था और बेरोजगारी से निपटना होगा। भाजपा अब सीधे तौर पर जवाबदेह होगी, क्योंकि अब “गठबंधन की मजबूरी” वाला बहाना खत्म हो चुका है।
अगला कदम: बुधवार को शपथ ग्रहण के बाद नई कैबिनेट की पहली बैठक होगी, जिसमें कुछ बड़े लोकलुभावन फैसलों की उम्मीद की जा रही है ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार की जा सके।











