Ranchi | झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रस्तावित विदेश यात्राओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। पांडेय ने भाजपा के बयानों को तथ्यहीन बताते हुए इसे आदिवासी नेतृत्व के प्रति पार्टी की “सामंती सोच” और “दोहरी मानसिकता” का परिचायक करार दिया है। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि जो मंच अन्य राज्यों के लिए निवेश का जरिया है, वह झारखंड के लिए ‘सैर-सपाटा’ कैसे हो गया?
दावोस यात्रा पर भाजपा के दोहरे मापदंड का खुलासा
विनोद पांडेय ने साक्ष्यों के साथ भाजपा के विरोधाभासी रुख को बेनकाब किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ झारखंड जब पहली बार दावोस (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) जाने की तैयारी कर रहा है, तो भाजपा अनर्गल आरोप लगा रही है।
दूसरी ओर, कर्नाटक में यही भाजपा वहां की कांग्रेस सरकार पर दबाव बना रही थी कि वे दावोस क्यों नहीं जा रहे। पांडेय के अनुसार, कर्नाटक भाजपा ने दावोस न जाने को ‘राज्य के भविष्य से खिलवाड़’ बताया था। उन्होंने पूछा कि एक ही मंच के लिए दो अलग-अलग मापदंड क्यों रखे जा रहे हैं?
निजी दौरा नहीं, राज्य के निवेश के लिए रणनीतिक कदम
झामुमो महासचिव ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विदेश यात्राएं कोई निजी सैर-सपाटा नहीं हैं। यह यात्राएं राज्य के दीर्घकालिक औद्योगिक विकास, पर्यटन और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए की जा रही हैं।
दुनिया के बड़े निवेश मंचों पर उपस्थिति दर्ज कराना आज हर प्रगतिशील राज्य की जरूरत है। भाजपा द्वारा इसे ‘शौक’ बताना दरअसल झारखंड के सुनहरे भविष्य और यहां की संभावनाओं का मजाक उड़ाने जैसा है।
भाजपा शासित राज्यों और केंद्र का उदाहरण
विनोद पांडेय ने भाजपा को आईना दिखाते हुए कहा कि तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य दावोस में करोड़ों के एमओयू (MoU) साइन कर रहे हैं। महाराष्ट्र के मामले में तो भाजपा नेता खुद 15.70 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों का गौरवगान करते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री विदेश यात्राएं करते हैं, तब कोई श्वेत पत्र नहीं मांगा जाता। लेकिन जब एक आदिवासी मुख्यमंत्री झारखंड के विकास के लिए कदम बढ़ाता है, तो भाजपा को तकलीफ होने लगती है।
आदिवासी मुख्यमंत्री के प्रति सामंती सोच का आरोप
झामुमो नेता ने सीधे तौर पर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा को असल समस्या यह है कि झारखंड का नेतृत्व एक आत्मविश्वास से भरा आदिवासी मुख्यमंत्री कर रहा है।
जब हेमंत सोरेन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झारखंड का पक्ष मजबूती से रखते हैं, तो भाजपा का सामंती चेहरा उजागर हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड को केवल खनन और लूट का केंद्र बनाए रखना चाहती है, जबकि हेमंत सरकार इसे औद्योगिक हब बनाना चाहती है।
निवेश की जमीनी हकीकत और पिछली सरकारों की विफलता
विनोद पांडेय के अनुसार, निवेश लाना एक सतत प्रक्रिया है जिसमें एमओयू से लेकर नीति निर्धारण और बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। हेमंत सरकार ने नई उद्योग नीति और पर्यटन नीति के जरिए स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने भाजपा के शासनकाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय झारखंड को केवल लूट का मॉडल मिला था। वर्तमान सरकार अब उन उद्योगों और स्थानीय संसाधनों को पुनर्जीवित करने का काम कर रही है जिन्हें भाजपा शासन में नजरअंदाज किया गया था।
आगे की राह: विकास की प्रतिबद्धता
झामुमो ने साफ कर दिया है कि भाजपा के दुष्प्रचार और नकारात्मक राजनीति से सरकार विचलित नहीं होगी। हेमंत सरकार राज्य के विकास, निवेश और युवाओं के रोजगार के लिए प्रतिबद्ध है।
विनोद पांडेय ने भाजपा को आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भाजपा को नकारात्मक राजनीति छोड़कर झारखंड के हित में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए, जो लोकतंत्र और राज्य की प्रगति के लिए आवश्यक है।
निष्कर्ष
झारखंड की राजनीति में विदेश यात्रा और निवेश के मुद्दे ने अब एक बड़े वैचारिक युद्ध का रूप ले लिया है। झामुमो द्वारा भाजपा के ‘दोहरे चरित्र’ को उजागर करने के बाद अब गेंद भाजपा के पाले में है। राज्य की जनता देख रही है कि विकास के वैश्विक मंचों पर झारखंड की भागीदारी को लेकर कौन सा दल किस मंशा के साथ खड़ा है।









