रांची: झारखंड की राजनीति के मजबूत स्तंभ और आदिवासी समाज के प्रेरणास्रोत दिशोम गुरु शिबू सोरेन का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में सुबह 8:56 बजे अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे शिबू सोरेन को किडनी इंफेक्शन और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं के कारण इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया था।
शिबू सोरेन के निधन की पुष्टि करते हुए डॉ. ए.के. भल्ला, अध्यक्ष, नेफ्रोलॉजी विभाग, सर गंगाराम अस्पताल ने कहा, “उन्हें आज सुबह मृत घोषित किया गया। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।”
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो शिबू सोरेन के बेटे हैं, ने भावुक होते हुए कहा, “आज मैं शून्य हो गया हूं… दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए।” उनके इस बयान से पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई।

आदिवासी आंदोलन से मुख्यमंत्री तक का संघर्षपूर्ण सफर
शिबू सोरेन का झारखंड को अलग राज्य बनाने में अहम योगदान रहा है। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना कर आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को राजनीतिक मुकाम तक पहुंचाया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और सात बार लोकसभा सदस्य के रूप में संसद पहुंचे।
वर्ष 2004 में वे केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री भी बने। हालांकि, कुछ विवादों और कानूनी उलझनों के चलते उन्हें उस पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बावजूद इसके, झारखंड की राजनीति में उनका प्रभाव कभी कम नहीं हुआ।
उनके नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा न केवल एक क्षेत्रीय पार्टी बनी, बल्कि राज्य की सत्ता का केंद्र भी बनी रही। उनकी पहचान ‘दिशोम गुरु’ के रूप में एक आंदोलनकारी नेता की रही, जिसने आदिवासियों की पीड़ा को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाया।
राजनीतिक विरासत में सोरेन परिवार की भूमिका
शिबू सोरेन के परिवार में वर्तमान में भी राजनीतिक प्रभाव कायम है। उनके बेटे हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री हैं, जबकि बहू कल्पना सोरेन विधायक हैं। छोटे बेटे बसंत सोरेन भी दुमका से विधायक हैं। हालांकि, उनके बड़े बेटे दुर्गा सोरेन का पहले ही निधन हो चुका है। दुर्गा की पत्नी सीता सोरेन फिलहाल बीजेपी में हैं।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक तौर पर एक गहरी खालीपन पैदा हो गई है। उनके विचार, संघर्ष और नेतृत्व हमेशा राज्य के विकास में मार्गदर्शन करते रहेंगे।
राज्यपाल और राष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि
शिबू सोरेन की तबीयत बिगड़ने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन (पूर्व में संतोष गंगवार का नाम आया था, पर वर्तमान राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन हैं) भी गंगाराम अस्पताल पहुंचे और परिवार से मुलाकात की।
सरकार ने राज्य में शोक की घोषणा की है और अंतिम संस्कार रांची में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। झारखंड ने आज सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि अपनी आत्मा खो दी है।








