रांची/साहिबगंज: झारखंड की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर घोटाले के आरोपों में महीनों से जेल में बंद झारखंड सरकार के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। इस फैसले ने न केवल उनके परिवार और समर्थकों को राहत दी है, बल्कि राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। साहिबगंज और पाकुड़ समेत पूरे संथाल परगना में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं।
खुशियों में डूबा संथाल परगना: कहीं बंटी मिठाई, कहीं फूटे पटाखे
जैसे ही दिल्ली से जमानत की खबर झारखंड पहुंची, बरहड़वा, श्रीकुंड, कोटालपोखर और मयुरकोला जैसे इलाकों में उत्सव जैसा माहौल हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर और मिठाई बांटकर जीत का दावा किया। कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि “यह सत्य की जीत है और साजिश करने वालों के मुंह पर तमाचा है।”
32 करोड़ का वो ‘कैश कांड’ और गिरफ्तारी की पूरी कहानी
यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब 15 मई 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की थी। आलमगीर आलम के निजी सचिव (PA) संजीव लाल के नौकर जहांगीर आलम के घर से ED ने 32 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की थी।
- तारीख दर तारीख: 14 और 15 मई को रांची स्थित ED दफ्तर में लंबी पूछताछ हुई।
- गिरफ्तारी: 15 मई की देर रात ED ने उन्हें PMLA कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
- आरोप: करोड़ों के टेंडर कमीशन और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्तता का दावा।
पत्नी निसात आलम का बड़ा बयान: “यह राजनीतिक षड्यंत्र था”
जमानत की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए आलमगीर आलम की पत्नी और पाकुड़ विधायक निसात आलम भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, “हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। मेरे पति को एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया था। देर से ही सही, लेकिन आज इंसाफ हुआ है।”
क्या होगा झारखंड की सियासत पर असर?
आलमगीर आलम की रिहाई सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं:
- संथाल में कांग्रेस की मजबूती: आलमगीर आलम संथाल परगना के कद्दावर नेता माने जाते हैं। उनके बाहर आने से कांग्रेस का कैडर फिर से सक्रिय होगा।
- चुनावी माहौल पर प्रभाव: विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस जमानत को विपक्षी दल ‘क्लीन चिट’ के रूप में पेश करने की कोशिश करेंगे, जबकि सत्ता पक्ष इसे कानूनी प्रक्रिया बताएगा।
- पार्टी के अंदर कद: क्या जेल से बाहर आने के बाद आलमगीर आलम को फिर से वही सांगठनिक ताकत मिलेगी? यह बड़ा सवाल है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट से आदेश की कॉपी मिलते ही निचली अदालत में बेल बॉन्ड भरा जाएगा, जिसके बाद उनकी जेल से रिहाई की प्रक्रिया पूरी होगी। हालांकि, ED अभी भी इस मामले की जांच कर रही है और ट्रायल जारी रहेगा। क्या आलमगीर आलम दोबारा अपनी खोई हुई राजनीतिक विरासत को उसी मजबूती से खड़ा कर पाएंगे? झारखंड की जनता की नजरें अब उनकी पहली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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