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झारखंड नगर निकाय: ‘डिप्टी’ मेयर की जंग, क्या निर्दलीय पार्षद बनेंगे BJP और JMM के लिए किंगमेकर?

रांची | झारखंड के नगर निकाय चुनावों में मेयर और अध्यक्ष पद के नतीजे आने के बाद अब असली सियासी बिसात ‘डिप्टी मेयर’ और ‘उपाध्यक्ष’ की कुर्सी के लिए बिछ गई है। आम जनता ने अपना फैसला सुना दिया है, लेकिन अब बारी निर्वाचित पार्षदों की है। सूबे के सभी 48 नगर निकायों में 10 मार्च से 20 मार्च के बीच होने वाले इन अप्रत्यक्ष चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी का लक्ष्य साफ है—भले ही मेयर की कुर्सी हाथ से फिसली हो, लेकिन ‘डिप्टी’ की कमान अपने ही सिपाही के हाथ में हो।

भाजपा की ‘घेराबंदी’: हार का बदला क्या ‘डिप्टी’ की जीत से पूरा होगा?

राज्य के शहरी क्षेत्रों में खुद को अपराजेय मानने वाली भाजपा के लिए हालिया नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं। 48 निकायों में से पार्टी समर्थित मात्र 16 उम्मीदवार ही शीर्ष पदों पर जीत सके हैं। गिरिडीह और देवघर जैसे अभेद्य किलों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पहली बार सेंधमारी कर भाजपा को चौंका दिया है।

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अब भाजपा ने ‘अप्रत्यक्ष चुनाव’ को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक का दावा है कि पार्षदों की संख्या बल के आधार पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार ही डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष बनेंगे। रणनीति यह है कि जहां भाजपा का मेयर है, वहां ‘डबल इंजन’ सरकार चले और जहां विपक्षी मेयर हैं, वहां डिप्टी मेयर के जरिए सत्ता पर पकड़ बनाई रखी जाए।

पार्षदों के हाथ में ‘पावर’: कैसे तय होगा जीत का गणित?

नगर निकाय की राजनीति में यह चुनाव बेहद दिलचस्प होता है क्योंकि इसमें आम जनता वोट नहीं डालती।

  • कौन देगा वोट: केवल नवनिर्वाचित वार्ड पार्षद ही इस प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।
  • मेयर की भूमिका: चौंकाने वाली बात यह है कि मेयर या अध्यक्ष इस चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे।
  • आरक्षण का पेंच: डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के पदों पर कोई आरक्षण लागू नहीं है, जिससे किसी भी वर्ग का पार्षद इस रेस में शामिल हो सकता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: रांची नगर निगम के 53 वार्डों के पार्षदों पर सबकी नजरें टिकी हैं। यहां 19 मार्च को तय होगा कि राजधानी का ‘डिप्टी’ कौन बनेगा। भाजपा के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि निर्दलीय जीते पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसे प्रयास जमीनी स्तर पर शुरू हो चुके हैं।

चुनाव का पूरा शेड्यूल: नोट कर लें तारीखें

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद के निर्देशानुसार, 10 दिनों के भीतर शपथ ग्रहण और चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य है।

नगर निगमचुनाव की तारीखमुख्य मुकाबला
मेदिनीनगर14 मार्चभाजपा बनाम निर्दलीय
मानगो17 मार्चकांग्रेस (बन्ना गुप्ता फैक्टर) बनाम अन्य
धनबाद18 मार्चसंजीव सिंह समर्थित बनाम भाजपा
रांची19 मार्चसाख की सबसे बड़ी लड़ाई

विश्लेषण: क्यों अहम है यह चुनाव?

यह महज एक पद की लड़ाई नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए ‘शहरी पकड़’ का लिटमस टेस्ट है। मानगो में कांग्रेस (बन्ना गुप्ता की पत्नी की जीत) और गिरिडीह में JMM के उभार ने भाजपा के ‘अर्बन वोट बैंक’ के नैरेटिव को चुनौती दी है। यदि भाजपा निर्दलीय पार्षदों को साधने में सफल रहती है, तो वह निकाय बोर्डों में विपक्ष की राह मुश्किल कर सकती है। वहीं, JMM और कांग्रेस की कोशिश होगी कि वे अपने पार्षदों को एकजुट रखकर भाजपा के विजय रथ को रोकें।

10 मार्च से गहमागहमी शुरू होगी। सबसे पहले पार्षदों को शपथ दिलाई जाएगी, जिसके तुरंत बाद नामांकन और वोटिंग होगी। क्या क्रॉस वोटिंग का खेल होगा? क्या निर्दलीय पार्षद ‘किंगमेकर’ बनेंगे? झारखंड की राजनीति में अगले 10 दिन ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ और बंद कमरों की बैठकों के नाम रहने वाले हैं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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