झारखंड में शराब व्यापार संकट गहराया, नीति पर पुनर्विचार और 10% राजस्व वृद्धि वापस लेने की मांग

झारखंड में शराब व्यापार संकट गहराया, नीति पर पुनर्विचार और 10% राजस्व वृद्धि वापस लेने की मांग

Ranchi | झारखंड में शराब कारोबार गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार की नई उत्पाद नीति और प्रस्तावित 10% राजस्व वृद्धि के विरोध में झारखंड शराब व्यापारी संघ ने नीति पर पुनर्विचार की मांग तेज कर दी है। संघ का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ सकता है।

झारखंड राज्य में शराब व्यापार से जुड़े लाइसेंसधारी इन दिनों भारी दबाव में हैं। झारखंड शराब व्यापारी संघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार को चेताया है कि मौजूदा नीति व्यापारिक रूप से व्यवहारिक नहीं है।

संघ के अनुसार, उत्पाद विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 34,000 करोड़ रुपये के उत्पाद राजस्व लक्ष्य को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया, जबकि इसे केवल सात महीनों में हासिल करने का दबाव बनाया जा रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि बिना बाजार की वास्तविक स्थिति और जमीनी चुनौतियों का आकलन किए लक्ष्य बढ़ाना अव्यावहारिक है।

राजस्व लक्ष्य निर्धारण पर उठे सवाल

संघ का दावा है कि वित्त विभाग द्वारा निर्धारित 34,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को उत्पाद मंत्री ने नई नीति लागू करते समय 40,000 करोड़ रुपये कर दिया। यह लक्ष्य न केवल अधिक है, बल्कि इसे सीमित समय में प्राप्त करने की शर्त ने व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

इसके अलावा, JSBCL (झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड) द्वारा चालू वित्तीय वर्ष के पहले पांच महीनों में संचालित कारोबार से प्राप्त लगभग 4,000 करोड़ रुपये के राजस्व को नए लक्ष्य में समायोजित नहीं किया गया, जिससे वास्तविक बोझ और बढ़ गया है।

2: नई नीति और अनुभवहीन लाइसेंसधारियों से बाजार प्रभावित

शराब व्यापारी संघ का कहना है कि नई नीति के तहत कई अनुभवहीन लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं। ये लाइसेंसधारी लागत से कम दरों पर शराब बेच रहे हैं, जिससे पूरे बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है।

इस स्थिति का सीधा असर पुराने और नियमित कारोबारियों पर पड़ रहा है, जो नियमों के तहत व्यापार करते हुए प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।

पड़ोसी राज्यों से महंगी शराब और स्मगलिंग की स्थिति

संघ ने यह भी बताया कि झारखंड में शराब की MRP पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक है। इससे अवैध बिक्री और गैरकानूनी विकल्पों को बढ़ावा मिलता है।

हालांकि, बिहार में नई सरकार के गठन के बाद सख्ती बढ़ने से शराब की स्मगलिंग पर कुछ हद तक रोक लगी है, लेकिन झारखंड की ऊंची कीमतें अब भी वैध कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं।

उत्पाद विभाग की सीमाएं और कार्रवाई की कमी

व्यापारियों का कहना है कि उत्पाद विभाग के पास संसाधनों की भारी कमी है। स्टाफ और तकनीकी साधनों के अभाव में नियमित छापेमारी (रेड) नहीं हो पा रही है।

इसका लाभ अवैध कारोबारियों को मिल रहा है, जबकि वैध लाइसेंसधारी दोहरी मार झेल रहे हैं—एक ओर कम बिक्री और दूसरी ओर भारी पेनाल्टी।

पेनाल्टी और वित्तीय दबाव से व्यापारी टूटे

समय पर राजस्व जमा नहीं होने की स्थिति में व्यापारियों पर लाखों रुपये की पेनाल्टी लगाई जा रही है। संघ का कहना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में यह जुर्माना व्यापारियों को पूरी तरह तोड़ रहा है।

कई लाइसेंसधारी आगामी वित्तीय वर्ष में लाइसेंस नवीनीकरण न कराने का मन बना चुके हैं।

सरकार से क्या मांग कर रहा है संघ?

झारखंड शराब व्यापारी संघ ने राज्य सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

संघ की प्रमुख मांगें

  • वर्तमान शराब नीति पर तत्काल पुनर्विचार
  • प्रस्तावित 10% राजस्व वृद्धि को वापस लिया जाए
  • राजस्व जमा करने में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए पेनाल्टी में राहत
  • राज्य के शराब व्यापारियों के साथ तत्काल बैठक कर समाधान निकाला जाए

चेतावनी—राजस्व को होगा बड़ा नुकसान

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो बड़ी संख्या में लाइसेंसधारी अपने लाइसेंस सरेंडर करने को मजबूर होंगे।

इससे न केवल रोजगार प्रभावित होगा, बल्कि राज्य सरकार को भी भारी उत्पाद राजस्व नुकसान झेलना पड़ेगा।

संघ के पदाधिकारियों का बयान

संघ के महासचिव सुबोध कुमार जयसवाल और अध्यक्ष अचिंत्य शॉ (हेमा दा) ने संयुक्त बयान में कहा कि सरकार को जिद छोड़कर व्यावहारिक नीति अपनानी चाहिए।

उनका कहना है कि व्यापार बचेगा तभी राजस्व बचेगा, अन्यथा लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और उत्पाद विभाग पर टिकी हैं। यदि सरकार व्यापारियों के साथ बैठक बुलाकर नीति में संशोधन करती है, तो स्थिति संभल सकती है।

अन्यथा, आने वाले महीनों में झारखंड का शराब व्यापार और राजस्व दोनों गंभीर संकट में आ सकते हैं।

झारखंड में शराब नीति को लेकर उठा यह विवाद केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर राज्य के राजस्व, रोजगार और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ने वाला है। समय रहते संतुलित निर्णय ही इस संकट का समाधान बन सकता है।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment