Ranchi | झारखंड में इंटर कॉलेजों में मनमाने तरीके से सीट बढ़ाने पर अब सख्ती तय मानी जा रही है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वित्त रहित इंटर कॉलेजों में सीटों की बढ़ोतरी केवल अत्यंत विशेष परिस्थितियों में ही की जाए और वह भी वित्तीय भार के आकलन व आवश्यक जांच के बाद।
शिक्षा सचिव द्वारा जैक के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सीट बढ़ाने का कोई भी निर्णय लेने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित इंटर कॉलेज के पास पर्याप्त आधारभूत संरचना, प्रयोगशाला, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी उपलब्ध हों। इसके साथ ही कला, विज्ञान और वाणिज्य—तीनों संकायों में विद्यार्थियों का नामांकन समानुपातिक होना अनिवार्य होगा।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल नामांकन संख्या के आधार पर सीट वृद्धि की अनुमति नहीं दी जा सकती। गुणवत्ता, संसाधन और संतुलन—तीनों कसौटियों पर खरा उतरना जरूरी होगा।
विभाग के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि कई वित्त रहित इंटर कॉलेजों में समानुपातिक नामांकन का पालन नहीं हो रहा है। उदाहरण के तौर पर कुछ संस्थानों में कला संकाय में अत्यधिक नामांकन है, जबकि विज्ञान संकाय में अपेक्षाकृत कम छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं।
शिक्षा सचिव ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे राज्य में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने की परिकल्पना को लागू करने में कठिनाई हो सकती है। सरकार की मंशा है कि विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को मजबूती मिले, लेकिन असंतुलित नामांकन इस लक्ष्य के विपरीत जाता है।
सरकार की सख्त चेतावनी
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि तीनों शर्तों—आधारभूत संरचना, मानव संसाधन और समानुपातिक नामांकन—का पालन करते हुए ही विशेष परिस्थिति में सीट वृद्धि की अनुमति दी जाएगी।
इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि इंटर कॉलेजों की आधारभूत संरचना की विभागीय जांच कराई जाएगी। जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर जैक को जवाबदेह माना जाएगा।
512 सीटों की सीमा और नियम उल्लंघन
विभाग पहले ही प्रत्येक इंटर कॉलेज के लिए अधिकतम 512 सीटों की सीमा तय कर चुका है। इसके बावजूद कई कॉलेजों द्वारा इस सीमा से अधिक सीटों पर नामांकन लिए जाने की बात सामने आई है।
अब ऐसे मामलों में जैक द्वारा कॉलेजों की जांच कर संतुष्ट होने के बाद ही विशेष परिस्थिति में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी, ताकि बढ़ी हुई सीटों पर नामांकित छात्र-छात्राओं का नामांकन वैध हो सके।
असमान नामांकन के उदाहरण
विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार—
- अमानत अली इंटर कॉलेज, बुंडू में कला संकाय में 1,252 विद्यार्थी नामांकित हैं, जबकि विज्ञान संकाय में 757 विद्यार्थी ही हैं।
- बेथेसदा इंटर कॉलेज, रांची में कला संकाय में 738 छात्राएं, जबकि विज्ञान संकाय में केवल 110 छात्राएं नामांकित हैं।
ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि कई संस्थानों में संकायों के बीच गंभीर असंतुलन मौजूद है।
छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर असर
इस फैसले का सीधा असर इंटर कॉलेजों की नामांकन नीति और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ेगा। जहां एक ओर मनमानी सीट वृद्धि पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर कॉलेजों को विज्ञान संकाय में संसाधन बढ़ाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
छात्रों के लिए यह निर्णय इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे बेहतर प्रयोगशाला, योग्य शिक्षक और संतुलित कक्षाएं सुनिश्चित होंगी।
अब आने वाले दिनों में जैक द्वारा वित्त रहित इंटर कॉलेजों की गहन जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि किन संस्थानों को विशेष परिस्थिति में सीट बढ़ाने की अनुमति मिलेगी।
शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलेजों पर कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
झारखंड में इंटर शिक्षा व्यवस्था को संतुलित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में यह फैसला मील का पत्थर माना जा रहा है। सीट वृद्धि पर नियंत्रण, विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा और जवाबदेही तय करने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।











