Ranchi | सनातन धर्म में आस्था के महापर्व का समय आ गया है। साल 2026 की पहली पूर्णिमा यानी ‘पौष पूर्णिमा’ इस बार बेहद खास संयोग लेकर आ रही है। पंचांग के अनुसार, 3 जनवरी 2026 (शनिवार) को पौष पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति से तीन अत्यंत शुभ योग—ब्रह्म योग, इंद्र योग और शिव वास योग—का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही तीर्थराज प्रयाग में विश्व प्रसिद्ध माघ मेले की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जहां लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
साल की पहली पूर्णिमा पर बन रहा अद्भुत संयोग
इस वर्ष पौष पूर्णिमा का महत्व कई गुना बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार, शनिवार को पूर्णिमा होने और तीन शुभ योगों का एक साथ बनना इसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से ‘महापुण्यकारी’ बना रहा है। पौष मास को सूर्य देव का महीना माना जाता है, जबकि पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को समर्पित है। ऐसे में सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भुत संगम साधकों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
शास्त्रों में कहा गया है कि पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से मोक्ष के द्वार खुलते हैं। यह तिथि केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और चंद्र दोष निवारण के लिए भी उत्तम मानी गई है।
शुभ मुहूर्त: कब से कब तक रहेगी पूर्णिमा?
भक्तों और व्रत रखने वालों के लिए सही समय की जानकारी होना अनिवार्य है। पंचांग की गणना के अनुसार:
- पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 2 जनवरी 2026, शुक्रवार, शाम 06:53 बजे।
- पूर्णिमा तिथि का समापन: 3 जनवरी 2026, शनिवार, दोपहर 03:32 बजे।
- उदया तिथि का नियम: हिंदू धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय वाली तिथि) ही मान्य होती है, इसलिए पौष पूर्णिमा का व्रत और स्नान-दान 3 जनवरी, शनिवार को ही किया जाएगा।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जो लोग सत्यनारायण भगवान की कथा या विशेष पूजा करना चाहते हैं, वे दोपहर 3:32 बजे से पहले पूजा संपन्न कर लें, क्योंकि इसके बाद तिथि बदल जाएगी।
तीन महायोगों का प्रभाव: ब्रह्म, इंद्र और शिव वास
इस बार की पौष पूर्णिमा सामान्य नहीं है। ग्रहों की चाल ने इसे विशिष्ट बना दिया है। पंडित विनोद शास्त्री ने इन योगों के समय और महत्व पर प्रकाश डाला है:
- ब्रह्म योग: यह योग 3 जनवरी की सुबह 09:05 बजे तक रहेगा। ब्रह्म योग में की गई पूजा और साधना का फल कभी निष्फल नहीं होता। यह ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए उत्तम समय है।
- इंद्र योग: सुबह 09:06 बजे से इंद्र योग की शुरुआत होगी, जो अगले दिन यानी 4 जनवरी तक प्रभावी रहेगा। राज्य पक्ष या सरकारी कार्यों में सफलता और पद-प्रतिष्ठा के लिए इस योग में दान-पुण्य करना लाभकारी माना गया है।
- शिव वास योग: दोपहर 03:32 बजे से शिव वास योग प्रभावी होगा। यह समय भगवान शिव की आराधना और रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ है।
इन तीनों योगों के मिलन से यह दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा के साथ-साथ शिव आराधना के लिए भी श्रेष्ठ बन गया है।
प्रयागराज में माघ मेले का शंखनाद
पौष पूर्णिमा का सीधा संबंध प्रयागराज के संगम तट पर लगने वाले ऐतिहासिक माघ मेले से है। 3 जनवरी से संगम की रेती पर तंबुओं की नगरी पूरी तरह से आबाद हो जाएगी।
- कल्पवास की शुरुआत: इसी दिन से लाखों साधु-संत और गृहस्थ ‘कल्पवास’ का संकल्प लेंगे। कल्पवास का अर्थ है—संगम तट पर निवास करते हुए संयमित जीवन जीना, तीनों समय स्नान और ईश्वरीय आराधना करना।
- 30 दिनों का अनुष्ठान: यह मेला लगभग 30 दिनों तक चलेगा। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु कल्पवास के दौरान वैदिक नियमों का पालन करेंगे।
- प्रशासन की तैयारी: माघ मेले को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। घाटों पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
स्नान-दान का विशेष महत्व और विधि
पौष का महीना कड़ाके की ठंड का होता है, लेकिन आस्था इस ठंड पर भारी पड़ती है। पौष पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, नर्मदा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान का विधान है।
पूजा और दान विधि: धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन स्नान के बाद सूर्य देव को ‘ॐ सूर्याय नम:’ मंत्र के साथ अर्घ्य देना चाहिए। चूंकि पौष मास सूर्य का है, इसलिए सूर्य पूजा से आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके बाद तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्रों का दान जरूरतमंदों को करना चाहिए। माना जाता है कि पौष पूर्णिमा पर किया गया तिल का दान पापों का नाश करता है।
आगे क्या? माघ मास का आध्यात्मिक सफर
पौष पूर्णिमा के साथ ही पौष मास का समापन हो जाएगा और पवित्र माघ मास की शुरुआत (स्नान की दृष्टि से) हो जाएगी। माघ महीने में प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व स्नान को ‘माघ स्नान’ कहा जाता है, जो भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। आने वाले दिनों में मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे बड़े स्नान पर्व भी आएंगे, जिसके लिए श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है।
वर्ष 2026 की शुरुआत एक अत्यंत शुभ धार्मिक संयोग के साथ हो रही है। 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर बनने वाले दुर्लभ योग न केवल धार्मिक आस्था को प्रबल करेंगे, बल्कि माघ मेले के माध्यम से भारतीय संस्कृति की भव्यता को भी प्रदर्शित करेंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन संयम, साधना और दान के जरिए पुण्य कमाने का सुनहरा अवसर है।










