JPSC Mains Exam News: रांची से बड़ी खबर सामने आई है। झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश दीपक रोशन की एकल पीठ ने 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका अयूब तिर्की और राजेश कुमार की ओर से दायर की गई थी, जिसमें मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि जेपीएससी ने जिस तरीके से डिजिटल इवैल्यूएशन कराया, वह परीक्षा के नियमों के खिलाफ है। साथ ही यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय भाषा की उत्तरपुस्तिकाओं की जांच अनुभवहीन परीक्षकों से कराई गई, जबकि नियमों के अनुसार ऐसे परीक्षकों को उत्तरपुस्तिका जांचनी चाहिए जिनके पास कम से कम 10 वर्षों का अनुभव हो।
डिजिटल मूल्यांकन पर उठे सवाल, कोर्ट ने दिए स्पष्ट संकेत
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में अनियमितता और लापरवाही सामने आई है। उनके अनुसार, इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं और इसलिए परिणाम को रद्द किया जाना चाहिए।
वहीं, जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पीपरवाल ने कोर्ट में जवाब दायर करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता परीक्षा में असफल हो गए हैं, इसी कारण अब पूरी प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं। अगर उन्हें प्रक्रिया से कोई आपत्ति थी, तो उन्हें परिणाम आने से पहले ही अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी।
जेपीएससी की तरफ से यह भी कहा गया कि सभी उम्मीदवारों के लिए परीक्षा की प्रक्रिया समान रही है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया है।
कोर्ट का फैसला: याचिका निराधार, सफल अभ्यर्थियों को राहत
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ताओं की आपत्ति समयबद्ध नहीं थी और मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे यह कहा जा सके कि परीक्षा परिणाम रद्द करने योग्य है।
न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि आयोग की प्रक्रिया पारदर्शी रही और इसमें कोई गंभीर खामी नहीं पाई गई। कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह से निराधार करार देते हुए खारिज कर दिया।
इस फैसले के बाद उन हजारों उम्मीदवारों ने राहत की सांस ली है जिन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से जेपीएससी परीक्षा पास की है। अब उनके भविष्य पर कोई संकट नहीं रहेगा।









