कश्मीर के शोपियां–पुलवामा में हाउसफुल हुई ‘धुरंधर’, रणवीर सिंह की फिल्म ने बदली सिनेमा देखने की तस्वीर

Subhash Shekhar
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जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों शोपियां और पुलवामा में निर्देशक आदित्य धर की स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर अप्रत्याशित उत्साह देखने को मिला है। सीमित थिएटर सुविधा के बावजूद फिल्म के कई शो हाउसफुल रहे, जिसने कश्मीर में सिनेमा संस्कृति की वापसी की उम्मीद जगा दी है।

पूरी खबर विस्तार से

फिल्म ‘धुरंधर’, जिसमें रणवीर सिंह भारतीय जासूस की भूमिका में नजर आ रहे हैं, ने कश्मीर के उन इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया है जहां लंबे समय से सिनेमा हॉल लगभग समाप्त हो चुके थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शोपियां और पुलवामा जैसे छोटे और संवेदनशील कस्बों में सिंगल-स्क्रीन थिएटरों में फिल्म के अधिकांश शो हाउसफुल रहे।

इन दोनों कस्बों में मल्टीप्लेक्स मौजूद नहीं हैं। खास तौर पर पुलवामा, जहां 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले में 40 सुरक्षा कर्मियों की जान गई थी, वहां दर्शकों का थिएटर तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

थिएटर संचालकों का कहना है कि फिल्म को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। सुरक्षा और सामाजिक दबावों के बावजूद लोग टिकट लेकर सिनेमा हॉल पहुंचे।

कश्मीर में सिनेमा संस्कृति की पृष्ठभूमि

कश्मीर में 1989 से पहले सिनेमा हॉल आम बात हुआ करते थे। श्रीनगर से लेकर छोटे कस्बों तक फिल्म देखने की संस्कृति मजबूत थी।
हालांकि उग्रवाद, सुरक्षा हालात और धार्मिक-सामाजिक विरोध के कारण सिनेमाघर बंद होते चले गए।

तीन दशकों से अधिक समय तक कश्मीर में सिनेमा जाना जोखिम भरा माना जाता रहा। कई थिएटरों पर हमले हुए, जिसके बाद अधिकांश हॉल स्थायी रूप से बंद हो गए।

हाल के वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक पहल के चलते छोटे स्तर पर सिनेमा हॉल फिर से खुलने लगे हैं।

छोटे थिएटर मॉडल ने बदली तस्वीर

कश्मीर में सिनेमा की वापसी में Citara Plex जैसी नई सिनेमा चेन की अहम भूमिका सामने आई है।
यह कंपनी 100 से 150 सीटों वाले छोटे थिएटर जम्मू-कश्मीर के कस्बों में संचालित कर रही है।

Citara Plex के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल नेहरा ने समाचार एजेंसी ANI से कहा कि उनका फोकस छोटे बाजारों के लिए किफायती और सुलभ सिनेमा अनुभव उपलब्ध कराने पर है।

उनके अनुसार, शोपियां और पुलवामा जैसे इलाकों में ‘धुरंधर’ को मिली प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि यदि सिनेमा पास, सुरक्षित और सस्ता हो, तो दर्शक थिएटर तक जरूर पहुंचते हैं।

आईनॉक्स श्रीनगर में भी मजबूत प्रदर्शन

टिकटिंग प्लेटफॉर्म BookMyShow के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को INOX श्रीनगर में फिल्म ‘धुरंधर’ के कम से कम पांच शो लगातार चल रहे थे।

यह संकेत देता है कि केवल छोटे कस्बे ही नहीं, बल्कि शहरी कश्मीर में भी दर्शकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
फिल्म को देखने के लिए युवाओं के साथ-साथ परिवार भी थिएटर पहुंच रहे हैं।

फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट

‘धुरंधर’ की कहानी शुरुआती 2000 के दशक में पाकिस्तान में सेट है।
फिल्म एक भारतीय जासूस की कहानी दिखाती है, जो कराची के अंडरवर्ल्ड और माफिया नेटवर्क को तोड़ने के मिशन पर है।

निर्देशक आदित्य धर ने इस फिल्म को वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताया है।
रणवीर सिंह के साथ फिल्म में अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन अहम भूमिकाओं में हैं।

स्पाई थ्रिलर और देशभक्ति के संयोजन ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ा है।

बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर का दबदबा

थिएटर में रिलीज के दस दिनों के भीतर ही ‘धुरंधर’ ने भारत में ₹350.75 करोड़ नेट कलेक्शन कर लिया है।
यह आंकड़ा फिल्म को साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों की सूची में शामिल करता है।

फिल्म की कमाई यह भी दर्शाती है कि कंटेंट-ड्रिवन और देश से जुड़ी कहानियों को दर्शक खुले दिल से स्वीकार कर रहे हैं।

कश्मीर में ‘धुरंधर’ को मिला रिस्पॉन्स केवल एक फिल्म की सफलता नहीं है।
यह उस मानसिक बदलाव का संकेत है, जहां लोग सामान्य जीवन और मनोरंजन की ओर लौटना चाहते हैं।

स्थानीय व्यापारियों और थिएटर कर्मियों के अनुसार, फिल्म के चलते इलाके में हलचल बढ़ी और रोजगार के अवसर भी बने।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच शांतिपूर्ण तरीके से शो का संचालन होना भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

आगे क्या?

फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे ही रिस्पॉन्स मिलते रहे, तो आने वाले समय में कश्मीर के अन्य कस्बों में भी छोटे सिनेमा हॉल खुल सकते हैं।

प्रदर्शकों को उम्मीद है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और कश्मीर में सिनेमा देखने की संस्कृति धीरे-धीरे मजबूत होगी।

Conclusion

‘धुरंधर’ ने कश्मीर में सिर्फ बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि दशकों बाद सिनेमा हॉल में भरोसे की वापसी का रास्ता भी खोला है।
शोपियां और पुलवामा जैसे इलाकों में हाउसफुल शो इस बात का संकेत हैं कि हालात बदल रहे हैं और दर्शक फिर से बड़े पर्दे की ओर लौट रहे हैं।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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