वोटर अधिकार यात्रा ने बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने 17 अगस्त 2025 को सासाराम से इस यात्रा की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों को उजागर करना और मतदाता सूची से हटाए गए लाखों नामों के खिलाफ आवाज उठाना है। यह यात्रा 16 दिनों में 20 से 25 जिलों को कवर करते हुए लगभग 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में विशाल जनसभा के साथ इसका समापन होगा।
यात्रा का दूसरा दिन और मुख्य पड़ाव
18 अगस्त को यात्रा अपने दूसरे दिन औरंगाबाद के देव सूर्य मंदिर से शुरू हुई। इसके बाद अम्बा, कुटुंबा और रफीगंज होते हुए यह काफिला गया की ओर बढ़ा। पहले दिन सासाराम में जिस तरह की भारी भीड़ उमड़ी, उससे यह साफ है कि जनता इस आंदोलन को लेकर उत्साहित है। सोशल मीडिया पर साझा हुई तस्वीरों में राहुल और तेजस्वी एक जीप में साथ नजर आए, जिसमें तेजस्वी ड्राइविंग सीट पर थे।
उद्देश्य और नेताओं का आरोप
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का कहना है कि यह सिर्फ एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है। राहुल ने ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत की रक्षा की बात की, जबकि तेजस्वी ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के नाम पर जीवित लोगों के नाम तक मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उनका आरोप है कि बीजेपी और चुनाव आयोग “वोट चोरी” की साजिश में शामिल हैं।

चुनाव आयोग का जवाब और सियासी तंज
इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने राहुल गांधी से कहा है कि वे 7 दिनों के भीतर अपने दावों के सबूत पेश करें, अन्यथा सार्वजनिक माफी मांगें। वहीं बीजेपी ने इस यात्रा को “फर्जी वोटरों को बचाने की कोशिश” बताया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसे “नौटंकी” करार दिया। इसके जवाब में तेजस्वी ने नीतीश कुमार और बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह यात्रा बिहार और लोकतंत्र के सम्मान की रक्षा का अभियान है।
गठबंधन की ताकत और जनता का जोश
इस यात्रा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राजद सुप्रीमो लालू यादव, माले के दीपंकर भट्टाचार्य और वीआईपी के मुकेश सहनी जैसे इंडिया गठबंधन के बड़े नेता भी शामिल हैं। इससे साफ है कि यह महज कांग्रेस-राजद की यात्रा नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन की संयुक्त ताकत का प्रदर्शन है। जनता भी बड़े उत्साह के साथ इस अभियान का हिस्सा बन रही है।
यात्रा का शेड्यूल और राजनीतिक असर
यात्रा का पहला चरण सासाराम से नवादा और लखीसराय तक, दूसरा चरण भागलपुर से दरभंगा तक और तीसरा चरण उत्तर बिहार से होते हुए पटना तक जाएगा। हर पड़ाव पर यह यात्रा स्थानीय जनता को जोड़ने और मतदाता अधिकारों की बहाली की मांग को मजबूत करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “वोटर अधिकार यात्रा” बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले विपक्ष के लिए एक बड़ा जनआंदोलन साबित हो सकती है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र की अस्मिता और हर नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा के लिए है।











