Ranchi-Lohardaga-Tori Rail Line: ट्रेन यात्रियों के लिए बड़ी राहत! रेलवे अब बस से पहुंचाएगी मंजिल

Ranchi | झारखंड के रेल यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। रांची-लोहरदगा-टोरी रेल खंड पर कोयल नदी पुल में आई दरार के कारण बाधित हुई रेल सेवा के बीच रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। अब ट्रेन के सफर के बीच जो बाधा आ रही थी, उसे रेलवे ‘बस सर्विस’ के जरिए दूर करेगी। दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों को बीच रास्ते में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें बस द्वारा उनके गंतव्य तक कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।

​कोयल नदी पुल पर संकट और रेलवे का ‘प्लान बी’

​रांची-लोहरदगा-टोरी लाइन झारखंड की लाइफलाइन मानी जाती है, लेकिन कोयल नदी पर स्थित रेलवे ब्रिज संख्या 115 के पिलर संख्या 4 और 5 में दरार आने के बाद से परिचालन ठप है। इस गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक (GM) अनिल कुमार मिश्र अपनी उच्चस्तरीय तकनीकी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

​निरीक्षण के बाद जीएम ने घोषणा की कि जब तक पुल की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक यात्रियों की सुविधा के लिए इरगांव हॉल्ट तक मेमू ट्रेन चलाई जाएगी। इसके आगे का सफर, यानी लोहरदगा से इरगांव और इरगांव से लोहरदगा तक की दूरी के लिए रेलवे बस सेवा उपलब्ध कराएगा।

​कैसे काम करेगी यह वैकल्पिक व्यवस्था?

​रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की परेशानी को देखते हुए यह ‘मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट’ व्यवस्था अपनाई गई है:

  • मेमू ट्रेन का विस्तार: पैसेंजर ट्रेन अब लोहरदगा स्टेशन से आगे बढ़कर इरगांव हॉल्ट तक जाएगी।
  • बस कनेक्टिविटी: लोहरदगा से इरगांव (लगभग 7 किलोमीटर) के बीच यात्रियों को बस की सुविधा मिलेगी।
  • कनेक्टिंग ट्रेन: लोहरदगा से टोरी जाने वाले यात्रियों के लिए भी कनेक्टिंग ट्रेन की सुविधा बहाल करने की योजना है।

​फिलहाल, सुरक्षा कारणों से रांची और लोहरदगा के बीच एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा।

​मार्च के अंत तक ट्रेन सेवा बहाल करने का लक्ष्य

​महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र ने तकनीकी टीम और निर्माण एजेंसियों के साथ पुल पर ही मैराथन बैठक की। उन्होंने इंजीनियरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर किया जाए।

​मरम्मत की समय-सीमा (Timeline) कुछ इस प्रकार तय की गई है:

  1. 15 फरवरी तक: सॉइल टेस्टिंग (मिट्टी की जांच) का काम पूरा कर लिया जाएगा।
  2. मार्च के अंत तक: तकनीकी टीम का प्रयास है कि मार्च महीने के अंतिम सप्ताह तक इस ट्रैक पर फिर से ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया जाए।
  3. मई 2026 तक: पुल की पूर्ण मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम मई 2026 तक पूरा होगा।

​मरम्मत कार्य के लिए तीन से चार विशेषज्ञ टीमें बनाई गई हैं जो 24 घंटे शिफ्ट में काम करेंगी

​क्यों आई पुल में दरार? महाप्रबंधक ने बताई असली वजह

​कोयल नदी पर बने इस मजबूत रेलवे पुल को नुकसान कैसे पहुंचा? इस सवाल का जवाब देते हुए जीएम अनिल कुमार मिश्र ने एक चिंताजनक कारण बताया। उन्होंने कहा कि नदी से बालू के अत्यधिक उठाव और कटाव की वजह से पिलर की नींव कमजोर हुई है, जिससे रेलवे पुल को भारी नुकसान पहुंचा है। यह न केवल रेलवे की संपत्ति का नुकसान है, बल्कि हजारों यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा था, जिसे समय रहते भांप लिया गया।

​पिलर की ‘जैकेटिंग’ से जुड़ेगी टूटी उम्मीद

​तकनीकी टीम ने पुल को बचाने के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करने का फैसला किया है:

  • प्राथमिकता: सबसे पहले पिलर संख्या 5 की मरम्मत की जाएगी, क्योंकि यह सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त है।
  • तकनीक: पिलर संख्या 4, 5, 6 और 7 को ‘जैकेटिंग’ (Jacketing) और ‘पाइलिंग’ (Piling) के जरिए दुरुस्त किया जाएगा। यह तकनीक पिलर को चारों तरफ से कंक्रीट और स्टील का एक नया आवरण देती है, जिससे उसकी भार सहने की क्षमता बढ़ जाती है।
  • स्टील गार्डर: तत्काल परिचालन शुरू करने के लिए स्टील गार्डर का सहारा लिया जाएगा।

​भविष्य की योजना: बनेगा नया पुल

​दक्षिण पूर्व रेलवे सिर्फ मरम्मत तक ही सीमित नहीं है। भविष्य में ऐसी किसी भी बाधा से बचने के लिए रेलवे ने इसी लाइन पर कोयल नदी में एक नए पुल के निर्माण की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है। यह कदम बताता है कि रेलवे इस रूट को लेकर कितना गंभीर है।

​रांची-लोहरदगा-टोरी लाइन का बंद होना दैनिक यात्रियों के लिए किसी झटके से कम नहीं था। हालांकि, रेलवे द्वारा बस सेवा शुरू करने की घोषणा ने बड़ी राहत दी है। मार्च तक परिचालन शुरू करने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन 24 घंटे चल रहे काम से उम्मीद है कि जल्द ही झारखंड की यह प्रमुख रेल लाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ने लगेगी। तब तक, यात्रियों को रेलवे की बस सेवा का लाभ लेकर थोड़ा धैर्य रखना होगा।

Bipin Gupta

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