Patna: बिहार की राजनीति इस वक्त मतदाता सूची संशोधन (SIR) को लेकर गरमाई हुई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने आज, 17 अगस्त 2025 से, सासाराम (रोहतास) से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत कर रहे हैं। यह यात्रा 16 दिनों तक चलेगी और करीब 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 23 से 30 जिलों को कवर करेगी। यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक विशाल रैली के साथ होगा।
मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप
विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कटौती उन क्षेत्रों में की गई है जहां कांग्रेस और राजद का मजबूत जनाधार है। इस कदम को विपक्ष ने “वोट चोरी” और “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया है।
तेजस्वी यादव ने खुलासा किया कि तीन लाख से अधिक मतदाताओं के पते में ‘0000’ मकान नंबर दर्ज किया गया है। उनका कहना है कि यह गंभीर प्रशासनिक अनियमितता है, जिसका सीधा असर आम लोगों के मतदान अधिकार पर पड़ेगा।
राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि गरीब, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश रची गई है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा प्रहार है और जनता को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने की कोशिश है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल चुनावी तैयारी नहीं बल्कि लोकतंत्र की रक्षा करना है। राहुल गांधी ने साफ कहा कि “एक व्यक्ति, एक वोट” का सिद्धांत ही लोकतंत्र की आत्मा है और इसे किसी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
विपक्ष की एकजुटता और NDA की प्रतिक्रिया
‘वोटर अधिकार यात्रा’ का एक और मकसद INDIA गठबंधन की एकजुटता दिखाना है। इस मंच पर कांग्रेस, राजद, वाम दल और वीआईपी जैसे सहयोगी दल साथ आए हैं। विपक्ष का दावा है कि जनता को जागरूक कर वे सत्ता पक्ष पर दबाव बनाएंगे।
वहीं, बीजेपी और एनडीए नेताओं ने इस यात्रा को राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। उनका कहना है कि विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है और चुनावी हार को देखते हुए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
चुनाव आयोग ने भी विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा है कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसका उद्देश्य फर्जी मतदाताओं को हटाना है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें 65 लाख नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने को कहा गया है।
चुनावी महत्व और आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले विपक्ष की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी इसे अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की तर्ज पर पेश कर रहे हैं, जबकि तेजस्वी यादव इसे “जन अधिकार की लड़ाई” बता रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह यात्रा प्रशांत किशोर की उस टिप्पणी का भी जवाब मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर “बिहार में रात न बिताने” का तंज कसा था।
अब यह यात्रा बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। विपक्ष इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की जंग बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे केवल चुनावी रणनीति कह रहा है। नतीजे चाहे जो हों, लेकिन इस यात्रा ने बिहार की सियासत को नई दिशा देने का काम जरूर कर दिया है।











