नीतीश कुमार का बड़ा धमाका: मुख्यमंत्री पद छोड़ अब जाएंगे राज्यसभा? बिहार की राजनीति में आया सबसे बड़ा भूचाल!

नीतीश कुमार का बड़ा धमाका: मुख्यमंत्री पद छोड़ अब जाएंगे राज्यसभा? बिहार की राजनीति में आया सबसे बड़ा भूचाल!

पटना। बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐसा सोशल मीडिया पोस्ट (ट्वीट) किया है, जिसने राज्य से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। नीतीश कुमार ने अपनी बरसों पुरानी दबी इच्छा को सार्वजनिक करते हुए संकेत दिया है कि वे अब बिहार विधान मंडल के बाद देश की ऊपरी अदालत यानी राज्यसभा का रुख करना चाहते हैं।

इस ऐलान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने की तैयारी कर चुके हैं? अगर नीतीश राज्यसभा जाते हैं, तो बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथ में होगी? पिछले दो दशकों से बिहार की धुरी रहे नीतीश का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ है या सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई का रास्ता, इसे लेकर कयासों का बाजार गर्म है।

नीतीश की अधूरी इच्छा: चारों सदनों का सदस्य बनने का सपना

नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में भावुक होते हुए लिखा है कि उनके मन में संसदीय जीवन की शुरुआत से ही एक इच्छा थी। वे बिहार विधानसभा और विधान परिषद (दोनों सदनों) के सदस्य रह चुके हैं। साथ ही वे लोकसभा के सदस्य और केंद्र में मंत्री भी रहे हैं। अब उनकी अंतिम इच्छा राज्यसभा का सदस्य बनने की है।

“संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।” – नीतीश कुमार

ग्राउंड रिपोर्ट: पटना से दिल्ली तक क्यों मची हलचल?

बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक इच्छा मात्र नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है।

  1. सत्ता हस्तांतरण का संकेत: क्या जेडीयू और एनडीए के बीच किसी नए फॉर्मूले पर सहमति बन गई है?
  2. नई सरकार को मार्गदर्शन: नीतीश ने साफ कहा है कि जो ‘नई सरकार’ बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन रहेगा। यह लाइन स्पष्ट करती है कि बिहार में जल्द ही नए नेतृत्व की ताजपोशी हो सकती है।
  3. इतिहास रचने की तैयारी: अगर नीतीश राज्यसभा जाते हैं, तो वे देश के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है।

बिहार के आम आदमी और विकास पर क्या होगा असर?

नीतीश कुमार ने अपने दो दशकों के शासनकाल का जिक्र करते हुए जनता के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने ‘विकसित बिहार’ के संकल्प को दोहराया है, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन की आहट ने प्रशासनिक अमले में भी बेचैनी पैदा कर दी है। जमीनी हकीकत यह है कि नीतीश के बिना बिहार की राजनीति की कल्पना करना फिलहाल मुश्किल है। ऐसे में नई सरकार के लिए नीतीश के ‘मार्गदर्शन’ की भूमिका सबसे अहम होने वाली है।

आगे क्या? क्या नीतीश बनेंगे देश के अगले उपराष्ट्रपति?

राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि राज्यसभा जाने का रास्ता नीतीश कुमार को किसी बड़े संवैधानिक पद (जैसे उपराष्ट्रपति) की ओर ले जा सकता है। फिलहाल, सबकी नजरें राजभवन और एनडीए के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या आने वाले कुछ घंटों में नीतीश कुमार इस्तीफा सौंपेंगे? यह सवाल बिहार की जनता के जेहन में कौंध रहा है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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